राजगोपाल पी.वी. अन्ना हजारे से मिलेंगे, चंबल में शांति और पर्यटन पर होगी चर्चा
गांधीवादी कार्यकर्ता राजगोपाल पी.वी. अन्ना हजारे से मुलाकात कर जनहित के मुद्दों पर चर्चा करेंगे। इस दौरान चंबल में 'पीस टूरिज्म' की संभावनाओं पर भी...

द क्लिफ न्यूज़ | ग्वालियर | 12 सितंबर 2026
विख्यात गांधीवादी सामाजिक कार्यकर्ता और महात्मा गांधी सेवा आश्रम, जौरा के अध्यक्ष राजगोपाल पी. वी. ने हाल ही में चंबल अंचल का अपना प्रवास संपन्न किया है। अब वे पुणे में कुछ विशेष कार्यक्रमों में भाग लेने के बाद मुंबई के लिए प्रस्थान करेंगे। मुंबई में उनकी मुलाकात देश के वरिष्ठ समाजसेवी अन्ना हजारे से प्रस्तावित है। यह भेंट ऐसे समय में हो रही है जब अन्ना हजारे हाल ही में अस्पताल से डिस्चार्ज हुए हैं। इस मुलाकात के दौरान दोनों दिग्गजों के बीच गांधीवादी विचारधारा, सामाजिक सरोकारों और जनहित से जुड़े ज्वलंत मुद्दों पर गहन संवाद होने की उम्मीद है।
राजगोपाल पी. वी. का चंबल अंचल का हालिया प्रवास क्षेत्र की शांति, अहिंसा और सामाजिक परिवर्तन की ऐतिहासिक विरासत को एक नए आयाम देने की दिशा में केंद्रित रहा। उनका प्रमुख उद्देश्य चंबल की पहचान को केवल 'दस्युओं की भूमि' के रूप में देखने की पुरानी धारणा से बाहर निकालकर, इसे शांति और अहिंसा से जुड़े एक सकारात्मक संदेशवाहक के रूप में विश्व पटल पर स्थापित करना है।
चंबल की अहिंसा विरासत और 'पीस टूरिज्म' की पहल
अपनी चंबल यात्रा के अंतिम चरण में, राजगोपाल पी. वी. की ग्वालियर रेलवे स्टेशन पर मध्य प्रदेश के पूर्व कैबिनेट मंत्री डॉ. गोविंद सिंह के साथ एक महत्वपूर्ण बैठक हुई। इस चर्चा में चंबल क्षेत्र में शांति की स्थापना, सामाजिक विकास और ऐतिहासिक गांधीवादी प्रयासों की विरासत को आगे बढ़ाने जैसे गंभीर विषयों पर गहन विचार-विमर्श हुआ। डॉ. गोविंद सिंह ने इस अवसर पर क्षेत्र में शांति स्थापना और सामाजिक परिवर्तन के लिए लोकनायक जयप्रकाश नारायण, आचार्य विनोबा भावे और स्वयं राजगोपाल पी. वी. जैसे नेताओं के अमूल्य योगदान को रेखांकित किया। उन्होंने इस बात पर बल दिया कि चंबल की सामाजिक यात्रा में अहिंसा और संवाद ने सदैव महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है और इस समृद्ध विरासत को भावी पीढ़ी तक पहुंचाना अत्यंत आवश्यक है।
इस ऐतिहासिक बैठक के दौरान, 14 अप्रैल 1972 को जौरा स्थित महात्मा गांधी सेवा आश्रम में हुए एक अत्यंत महत्वपूर्ण आत्मसमर्पण समारोह का भी स्मरण किया गया। उस ऐतिहासिक दिन, 654 लोगों ने हिंसा का रास्ता छोड़कर समाज की मुख्यधारा में लौटने का संकल्प लिया था। यह घटना अहिंसा, संवाद और सामाजिक पुनर्वास के सफल प्रयासों के एक महत्वपूर्ण अध्याय के रूप में आज भी इतिहास में दर्ज है।
राजगोपाल पी. वी. इसी ऐतिहासिक और अहिंसक विरासत को एक व्यापक धरातल पर प्रस्तुत करने के लिए पूर्णतः प्रतिबद्ध हैं। उनका दृढ़ विश्वास है कि चंबल को शांति और अहिंसा की भूमि के रूप में विकसित करके यहां 'पीस टूरिज्म' यानी शांति पर्यटन की अपार संभावनाओं को पंख लगाए जा सकते हैं। यदि यह पहल सफल होती है, तो इससे न केवल क्षेत्र में पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा, बल्कि स्थानीय रोजगार के अवसर सृजित होंगे और आर्थिक गतिविधियां भी तेज होंगी। साथ ही, यह शांति एवं सह-अस्तित्व का एक शक्तिशाली संदेश देश और दुनिया तक पहुंचाएगा।
सामाजिक-आर्थिक चुनौतियों और सशक्तिकरण पर विचार-विमर्श
ग्वालियर रेलवे स्टेशन पर पूर्व कैबिनेट मंत्री डॉ. गोविंद सिंह के साथ हुई मुलाकात में, राजगोपाल पी. वी. और डॉ. गोविंद सिंह ने क्षेत्र के युवाओं, मजदूरों, वंचित समुदायों और आदिवासी समाज के सामने खड़ी सामाजिक, आर्थिक और शैक्षिक चुनौतियों पर भी खुलकर चर्चा की। दोनों नेताओं ने इन महत्वपूर्ण वर्गों के सशक्तिकरण, शिक्षा के प्रसार, रोजगार के अवसर बढ़ाने और सामाजिक भागीदारी को सुदृढ़ करने के लिए अधिक प्रभावी और सुविचारित प्रयासों की आवश्यकता पर अपने विचार साझा किए।
इस बैठक में गांधी आश्रम के सचिव दिलीप जैन, प्रफुल्ल श्रीवास्तव, उदयभान सिंह परिहार, डोंगर शर्मा, अधिवक्ता दिनेश सिंह सिकरवार, सुनील जैन, सुनील शर्मा और अमित भाई सहित अनेक प्रमुख सामाजिक कार्यकर्ता और गणमान्य नागरिक भी उपस्थित रहे। सभी उपस्थित सदस्यों ने चंबल क्षेत्र में सामाजिक समरसता, शांतिपूर्ण सह-अस्तित्व और समग्र विकास को बढ़ावा देने हेतु विभिन्न व्यावहारिक उपायों पर अपने मूल्यवान सुझाव प्रस्तुत किए।
मुंबई में राजगोपाल पी. वी. और अन्ना हजारे के बीच प्रस्तावित मुलाकात को गांधीवादी विचारधारा के सिद्धांतों, सामाजिक सरोकारों के प्रति गहरी प्रतिबद्धता और अहिंसक जनभागीदारी से जुड़े विषयों पर होने वाले संवाद की एक अत्यंत महत्वपूर्ण और मूल्यवान कड़ी के रूप में देखा जा रहा है। यह बैठक भविष्य में सामाजिक आंदोलनों और जनकल्याणकारी पहलों के लिए एक नई दिशा प्रदान कर सकती है।
