रेलवे ट्रैक पर सुरक्षा: 19,700 किमी बाड़ से रोकने की कवायद
भारतीय रेलवे ने ट्रैक की सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए 19,700 किमी हिस्से में बाड़ लगाई है। पत्थरबाजी रोकने के लिए जागरूकता अभियान और पुलिस समन्वय भी तेज किया गया है।

द क्लिफ न्यूज़ | जबलपुर | 13 अगस्त 2026
भारतीय रेलवे ने रेल परिचालन की सुरक्षा को अभूतपूर्व प्राथमिकता देते हुए देश भर में रेलवे ट्रैक के किनारे लगभग 19,700 किलोमीटर हिस्से में सुरक्षा बाड़ का निर्माण पूरा कर लिया है। इस व्यापक पहल का मुख्य उद्देश्य रेलवे ट्रैक पर अनधिकृत प्रवेश को सख्ती से रोकना, मवेशियों और असामाजिक तत्वों की आवाजाही पर अंकुश लगाना तथा ट्रेनों के निर्बाध और सुरक्षित संचालन को सुनिश्चित करना है। केंद्रीय रेल मंत्री, सूचना एवं प्रसारण मंत्री तथा इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री अश्विनी वैष्णव ने लोकसभा में एक प्रश्न के जवाब में यह जानकारी दी, जिससे रेल सुरक्षा को लेकर सरकार की गंभीरता स्पष्ट होती है।
रेलवे मंत्रालय के अनुसार, यात्रियों के जीवन की सुरक्षा सर्वोपरि है। ट्रेनों पर पत्थरबाजी की घटनाओं को रेलवे संपत्ति को नुकसान पहुंचाने वाले एक गंभीर सुरक्षा खतरे के रूप में देखा जा रहा है। इन घटनाओं से निपटने के लिए, रेलवे ने संवेदनशील क्षेत्रों और 'ब्लैक स्पॉट' की पहचान कर वहां निगरानी और निवारक गतिविधियों को विशेष रूप से बढ़ाया है। संबंधित कानूनी प्रावधानों के तहत पत्थरबाजी करने वाले व्यक्तियों के विरुद्ध कड़ी कार्रवाई की जा रही है।
असामाजिक तत्वों पर कड़ी निगरानी और कार्रवाई
रेलवे ट्रैक के आसपास के उन प्रभावित क्षेत्रों में, जहां असामाजिक गतिविधियों की आशंका अधिक रहती है, रेलवे प्रशासन नियमित अभियान चला रहा है। इन अभियानों का ध्यान मुख्य रूप से शराबियों, उपद्रवी तत्वों और अन्य संदिग्ध व्यक्तियों पर केंद्रित है। इन अभियानों के दौरान पकड़े गए व्यक्तियों के विरुद्ध प्रचलित कानूनी नियमों के अनुसार त्वरित कार्रवाई की जाती है। रेलवे का स्पष्ट उद्देश्य ऐसे तत्वों पर एक प्रभावी नियंत्रण स्थापित करना है, जिनकी गतिविधियों से न केवल रेल संपत्ति को नुकसान पहुंच सकता है, बल्कि यात्रियों की सुरक्षा भी गंभीर रूप से प्रभावित हो सकती है।
इसके अतिरिक्त, ट्रेनों के साथ चलने वाले कर्मचारियों और रेलवे सुरक्षा बलों को ऐसे संवेदनशील स्थानों पर विशेष सतर्कता बरतने के सख्त निर्देश जारी किए गए हैं। जिन क्षेत्रों में पूर्व में ट्रेनों पर पत्थरबाजी या तोड़फोड़ जैसी घटनाएं सामने आई हैं, वहां सुरक्षा व्यवस्था की चौबीसों घंटे, विशेष निगरानी की जा रही है। यह कदम भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति को रोकने की दिशा में एक महत्वपूर्ण प्रयास है।
'ऑपरेशन साथी' के माध्यम से जागरूकता का प्रसार
रेलवे ट्रैक के निकट बसे आबादी वाले क्षेत्रों में, जहां अक्सर पत्थरबाजी जैसी घटनाएं देखी जाती हैं, वहां के निवासियों को इसके खतरों और गंभीर कानूनी परिणामों से अवगत कराने के लिए रेलवे द्वारा 'ऑपरेशन साथी' जैसे विशेष जागरूकता कार्यक्रम चलाए जा रहे हैं। इन अभियानों के माध्यम से, विशेष रूप से बच्चों और युवाओं को यह समझाया जाता है कि चलती ट्रेन पर पत्थर फेंकना न केवल एक जघन्य अपराध है, बल्कि यह अनजाने में यात्रियों और रेलकर्मियों के जीवन के लिए एक विकट खतरा भी उत्पन्न कर सकता है।
रेलवे द्वारा पत्थरबाजी की घटनाओं को प्रभावी ढंग से नियंत्रित करने के लिए विस्तृत दिशा-निर्देश भी जारी किए गए हैं। प्रत्येक घटना का गहन विश्लेषण किया जाता है, जिसमें उसके संभावित कारणों, भौगोलिक स्थानों और परिस्थितियों का विस्तृत अध्ययन शामिल होता है। इस अध्ययन के आधार पर ही रोकथाम के लिए आवश्यक और लक्षित कदम उठाए जाते हैं।
जीआरपी और स्थानीय पुलिस के साथ मजबूत समन्वय
ट्रेनों पर पत्थरबाजी जैसी गंभीर घटनाओं पर अंकुश लगाने के लिए, रेलवे सुरक्षा बल (आरपीएफ) राज्यकीय रेलवे पुलिस (जीआरपी) और स्थानीय पुलिस के साथ निरंतर और प्रभावी समन्वय स्थापित किए हुए है। संवेदनशील क्षेत्रों से संबंधित महत्वपूर्ण सूचनाएं नियमित रूप से साझा की जाती हैं, और आवश्यकता पड़ने पर संयुक्त कार्रवाई भी की जाती है। यह बहु-स्तरीय समन्वय यह सुनिश्चित करता है कि सुरक्षा एजेंसियों के बीच कोई सूचना गैप न रहे और त्वरित प्रतिक्रिया संभव हो सके।
रेलवे सुरक्षा व्यवस्था की नियमित निगरानी और समीक्षा के उद्देश्य से, देश के सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में 'राज्य स्तरीय रेलवे सुरक्षा समिति' (एसएलएससीआर) का गठन किया गया है। इन समितियों की अध्यक्षता संबंधित राज्य या केंद्र शासित प्रदेश के पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) या पुलिस आयुक्त स्तर के वरिष्ठ अधिकारी करते हैं। इन समितियों के माध्यम से रेलवे सुरक्षा से जुड़े विभिन्न महत्वपूर्ण मुद्दों पर विस्तार से चर्चा की जाती है और आवश्यक सुधारात्मक कार्रवाई सुनिश्चित की जाती है।
रेलवे क्रॉसिंग और ट्रैक के आसपास सुरक्षा का विस्तार
भारतीय रेलवे केवल पत्थरबाजी को रोकने तक ही सीमित नहीं है, बल्कि रेलवे ट्रैक पर अनधिकृत प्रवेश को रोकने के लिए भी विभिन्न स्तरों पर सुरक्षा उपायों को मजबूत कर रहा है। यात्रियों की सुविधा और सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए, पैदल चलने वालों के लिए बनाए गए सबवे में भी सुरक्षा बाड़ लगाने की व्यवस्था की जा रही है। इसका उद्देश्य लोगों, मवेशियों और छोटे वाहनों को रेलवे ट्रैक पार करने की आवश्यकता से बचाना है, जिससे दुर्घटनाओं की आशंका कम हो सके।
रेलवे के नवीनतम आंकड़ों के अनुसार, ट्रैक के किनारे अब तक लगभग 19,700 किलोमीटर की सुरक्षा बाड़ सफलतापूर्वक लगाई जा चुकी है। इस निर्माण कार्य में बिहार, मध्य प्रदेश, आंध्र प्रदेश और उत्तर प्रदेश जैसे महत्वपूर्ण राज्यों में स्थित रेलवे खंडों को प्राथमिकता दी गई है। रेलवे का यह दृढ़ विश्वास है कि सुरक्षा बाड़ के निर्माण, निरंतर निगरानी, जन-जागरूकता अभियानों और पुलिस-रेलवे के बीच सुदृढ़ समन्वय के माध्यम से ट्रैक पर अनधिकृत प्रवेश और ट्रेनों पर पत्थरबाजी जैसी घटनाओं को प्रभावी ढंग से नियंत्रित किया जा सकता है। यात्रियों की यात्रा को पूर्णतः सुरक्षित बनाने के लिए रेलवे इन उपायों की निरंतर समीक्षा कर रहा है और आवश्यकतानुसार इनका विस्तार भी कर रहा है।
