रेलवे पुलिया में जलभराव से इटावा के ग्रामीणों का जीवन ठप
इटावा के बढ़पुरा ब्लॉक के कई गांवों के ग्रामीण रेलवे पुलिया में जलभराव से परेशान हैं। इससे खेतों में काम, बच्चों की पढ़ाई और स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुंच बाधित हो गई है।

द क्लिफ न्यूज़ | इटावा | 10 अगस्त 2026
उत्तर मध्य रेलवे पर स्थित एक रेलवे पुलिया में गंभीर जलभराव के कारण इटावा जिले के बढ़पुरा ब्लॉक के शेखूपुर जखोली ग्राम पंचायत सहित महानेपुर, केशोंपुर और महातुआ गांवों के निवासियों का जनजीवन अस्त-व्यस्त हो गया है। रेलवे लाइन के पोल नंबर 1148/22 के पास बनी यह पुलिया, जो वर्षों से आवागमन का मुख्य मार्ग रही है, वर्तमान में जलमग्न होने के कारण पूरी तरह अनुपयोगी हो गई है।
जलभराव की समस्या ने न केवल ग्रामीणों के दैनिक जीवन को प्रभावित किया है, बल्कि उनकी आजीविका पर भी गहरा असर डाला है। इस क्षेत्र के कई किसानों के खेत रेलवे लाइन के पास स्थित हैं, और पुलिया के अवरुद्ध होने से उन्हें अपने कृषि कार्यों में भारी कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। इसके अतिरिक्त, इकदिल कस्बा, जो इन गांवों को एक डाबर रोड से जोड़ता है, ग्रामीणों के लिए एक महत्वपूर्ण केंद्र है। यहाँ के छात्र-छात्राएं पढ़ने के लिए जाते हैं, ग्रामीण साप्ताहिक हाट में खरीदारी के लिए आते हैं, और क्षेत्र का सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र भी यहीं स्थित है, जिससे दवाइयां प्राप्त करना भी दूभर हो गया है। इकदिल कस्बे में लगने वाला बकरी का बाजार, जो क्षेत्र के ग्रामीणों के लिए व्यापार और आर्थिक लाभ का एक महत्वपूर्ण जरिया था, वह भी इस समस्या से प्रभावित हुआ है।
रेलवे प्रशासन से मदद की गुहार
ग्रामीणों का कहना है कि रेलवे लाइन के निर्माण के समय से ही इस पुलिया का उपयोग किया जा रहा था। रेलवे विभाग द्वारा अपनी सीमा में बैरिकेडिंग कर दिए जाने से पुलिया के अलावा अन्य किसी मार्ग से आवागमन पूरी तरह से बाधित है। ऐसे में, पुलिया में हुआ भारी जलभराव ग्रामीणों के लिए एक बड़ी आपदा बन गया है। नाथूराम, रामनारायण, हरि शंकर, प्रताप, सुभाष, मालती, रामवती, रामदेवी, दयाशंकर, रामकुमार, राजकुमार, सुभाष, राज बहादुर, विजय बहादुर, राम सिंह और बड़ी संख्या में अन्य ग्रामीणों ने रेलवे प्रशासन से निवेदन किया है कि वह उनकी समस्या को गंभीरता से ले और इसका शीघ्र निराकरण करे।
ग्रामीणों की मांग है कि रेलवे प्रशासन यदि बैरिकेडिंग वाले हिस्से में मात्र दो से तीन फीट का रास्ता भी उपलब्ध करा दे, तो उनका बाधित जीवन सामान्य हो सकता है और वे अपने दैनिक क्रियाकलापों को सुचारू रूप से कर सकेंगे।
आक्रोश और चेतावनी
ग्रामीणों ने रेलवे प्रशासन के प्रति अपना आक्रोश भी व्यक्त किया है। उन्होंने चेतावनी दी है कि यदि उनकी इस गंभीर समस्या का समाधान नहीं किया गया, तो वे मजबूरन कोई भी कदम उठा सकते हैं, जिसकी पूरी जिम्मेदारी रेल प्रशासन की होगी। इस समस्या के समाधान में हो रही देरी ने ग्रामीणों में असंतोष बढ़ाया है और वे जल्द से जल्द किसी राहत की उम्मीद कर रहे हैं।
