राहुल गांधी का सरकार पर वार: "युवाओं के लिए बंद हो रहे अवसरों के द्वार"
कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने युवाओं के भविष्य को लेकर केंद्र सरकार पर निशाना साधा है। उन्होंने रोजगार, पेपर लीक, महंगी शिक्षा और छात्रों की आवाज दबाने के मुद्दों को उठाया है।

द क्लिफ न्यूज़ | नई दिल्ली | 31 जुलाई 2026
कांग्रेस के वरिष्ठ नेता राहुल गांधी ने एक बार फिर केंद्र सरकार पर देश के युवाओं के भविष्य को लेकर गंभीर चिंता व्यक्त की है। उन्होंने आरोप लगाया है कि मौजूदा सरकारी नीतियों और व्यवस्था के चलते युवाओं के लिए रोजगार, गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और प्रगति के अवसर लगातार संकुचित हो रहे हैं, जिससे उनके लिए विकास के द्वार बंद होते जा रहे हैं। गांधी ने इन मुद्दों को लेकर सरकार को आड़े हाथों लिया है।
राहुल गांधी के अनुसार, देश में सरकारी नौकरियों की संख्या में गिरावट आई है, वहीं निजी क्षेत्र में भी पर्याप्त रोजगार के अवसर सृजित नहीं हो पा रहे हैं। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि लाखों शिक्षित युवा प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी में अपना कीमती समय और संसाधन लगाते हैं, परंतु भर्ती प्रक्रियाओं में होने वाली देरी और रिक्त पदों को समय पर न भरने के कारण उनका भविष्य अनिश्चितता के घेरे में चला जाता है। कांग्रेस नेता ने कहा कि रोजगार सृजन की दर युवाओं की अपेक्षाओं और देश की आवश्यकता के अनुरूप नहीं है।
प्रतियोगी परीक्षाओं में धांधली और युवाओं का मोहभंग
गांधी ने विशेष रूप से प्रतियोगी परीक्षाओं में बार-बार सामने आ रहे पेपर लीक और अन्य अनियमितताओं के मुद्दे को उठाया। उनका कहना है कि जब परीक्षाओं के प्रश्नपत्र लीक हो जाते हैं या परीक्षाओं को रद्द करना पड़ता है, तो इसका सबसे गहरा और निराशाजनक प्रभाव उन लाखों मेहनती युवाओं पर पड़ता है, जिन्होंने पूरी लगन और ईमानदारी से परीक्षा की तैयारी की होती है। ऐसे कृत्य युवाओं के आत्मविश्वास को तोड़ने के साथ-साथ देश की व्यवस्था और सरकारी संस्थानों पर उनके विश्वास को भी डिगाते हैं।
शिक्षा के बढ़ते बोझ और पहुंच को लेकर भी राहुल गांधी ने चिंता जताई। उन्होंने कहा कि उच्च शिक्षा लगातार महंगी होती जा रही है, जिससे सामान्य और मध्यम वर्गीय परिवारों के विद्यार्थियों के लिए गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्राप्त करना एक बड़ी चुनौती बनता जा रहा है। फीस में वृद्धि, गलाकाट प्रतिस्पर्धा और आर्थिक दबाव के चलते कई मेधावी छात्र अपने सपनों को पूरा करने से वंचित रह जाते हैं। गांधी का तर्क है कि शिक्षा और रोजगार के क्षेत्र में सभी के लिए समान अवसर सुनिश्चित किए जाने चाहिए, ताकि प्रतिभा किसी आर्थिक बाधा के कारण पीछे न छूट जाए।
छात्र आंदोलनों पर सख्ती का आरोप
कांग्रेस नेता ने छात्रों और युवाओं द्वारा अपनी समस्याओं के समाधान के लिए उठाए जाने वाले आंदोलनों और विरोध-प्रदर्शनों पर सरकार द्वारा बरती जा रही कथित सख्ती का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि कई मामलों में, जब युवा अपनी जायज मांगों और समस्याओं को लेकर लोकतांत्रिक तरीके से अपनी आवाज बुलंद करते हैं, तो उनके विरोध-प्रदर्शनों को बलपूर्वक दबाने का प्रयास किया जाता है। कांग्रेस का आरोप है कि सरकार छात्रों की चिंताओं और मांगों को सुनने के बजाय उनकी आवाज को अनसुना कर रही है या दबा रही है।
पार्टी का मानना है कि देश के युवाओं को एक सुरक्षित, पारदर्शी और विश्वसनीय परीक्षा प्रणाली प्रदान करना, भर्ती प्रक्रियाओं को समयबद्ध तरीके से पूरा करना, सुलभ और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा सुनिश्चित करना तथा पर्याप्त रोजगार के अवसर उपलब्ध कराना सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में से एक होना चाहिए। कांग्रेस ने सरकार से युवाओं के इन ज्वलंत मुद्दों का समाधान शीघ्रता से करने, भर्ती प्रक्रियाओं में अधिक पारदर्शिता लाने तथा पेपर लीक जैसी गंभीर घटनाओं पर प्रभावी अंकुश लगाने के लिए ठोस कदम उठाने की पुरजोर मांग की है।
सरकार का पक्ष और राष्ट्रीय संवाद
वहीं, इस मुद्दे पर केंद्र सरकार का कहना है कि वह भर्ती प्रक्रियाओं को अधिक पारदर्शी, निष्पक्ष और सुरक्षित बनाने के लिए लगातार प्रयासरत है। सरकार का दावा है कि परीक्षा प्रणालियों को मजबूत करने और रोजगार तथा कौशल विकास के अवसरों को बढ़ाने के लिए विभिन्न स्तरों पर महत्वपूर्ण कदम उठाए जा रहे हैं। सरकार के अनुसार, पेपर लीक और परीक्षा में अनियमितताओं जैसी गतिविधियों पर अंकुश लगाने के उद्देश्य से कड़े कानून बनाए गए हैं और उन्नत तकनीकी उपायों को भी लागू किया गया है।
रोजगार, शिक्षा और परीक्षा प्रणाली जैसे मुद्दे एक बार फिर देश की राष्ट्रीय चर्चा के केंद्र में आ गए हैं। सरकार और मुख्य विपक्षी दल के बीच इन महत्वपूर्ण विषयों पर आरोप-प्रत्यारोप का दौर जारी है, जो युवाओं के भविष्य से जुड़े इन ज्वलंत मुद्दों के समाधान की आवश्यकता को रेखांकित करता है।
