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राहुल गांधी का मनुस्मृति पर प्रहार, महिलाओं की सीमित पहचान की आलोचना

पुणे में 'छात्रों की गूंज' कार्यक्रम में राहुल गांधी ने मनुस्मृति को लेकर महिलाओं की सीमित पहचान पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि महिलाएं किसी की संपत्ति नहीं, बल्कि स्वतंत्र पहचान रखती हैं।

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राहुल गांधी का मनुस्मृति पर प्रहार, महिलाओं की सीमित पहचान की आलोचना

द क्लिफ न्यूज़ | पुणे | 23 अगस्त 2026

कांग्रेस नेता और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने पुणे में आयोजित 'छात्रों की गूंज' कार्यक्रम के दौरान महिलाओं की स्वतंत्रता, समानता और पितृसत्तात्मक सोच पर तीखी टिप्पणी की है। 22 अगस्त को संपन्न हुए इस कार्यक्रम में उन्होंने मनुस्मृति का हवाला देते हुए महिलाओं को केवल पिता, पति या पुत्र के अधीन रखने वाली सोच की कड़ी आलोचना की। राहुल गांधी ने युवाओं से आह्वान किया कि वे ऐसी संकीर्ण मानसिकता को चुनौती दें और महिलाओं को उनके व्यक्तिगत अस्तित्व व स्वतंत्र पहचान के साथ स्वीकार करें।

राहुल गांधी ने कहा, "मनुस्मृति में महिलाओं के जीवन को पिता, पति और पुत्र के अधीन रखने की बात कही गई है। यह अत्यंत शर्मनाक है। महिला किसी की संपत्ति नहीं है, उसका अपना स्वतंत्र अस्तित्व और पहचान है।" उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि किसी महिला को केवल बेटी, पत्नी या मां के रूप में देखना उसकी संपूर्ण पहचान को संकुचित करना है। यद्यपि ये रिश्ते महिला के जीवन के महत्वपूर्ण पहलू हैं, परंतु यही उसकी एकमात्र पहचान नहीं हो सकती। महिलाएं पेशेवर, खिलाड़ी, विद्यार्थी, उद्यमी और समाज के विभिन्न क्षेत्रों में सक्रिय नागरिक के तौर पर अपनी भूमिका निभाती हैं। उन्हें अपनी पसंद, करियर और जीवन के अहम फैसले स्वयं लेने का पूर्ण अधिकार होना चाहिए।

महिला शक्ति को देश की सबसे बड़ी पूंजी बताया

कांग्रेस नेता ने कहा कि भारत की सबसे बड़ी शक्ति उसकी करीब 70 करोड़ महिलाएं हैं। उन्होंने महिलाओं की कल्पना, सपनों और क्षमताओं को देश की सबसे बड़ी पूंजी बताते हुए कहा कि जब महिलाओं को स्वतंत्र होकर आगे बढ़ने का अवसर मिलेगा, तभी देश अपनी पूरी क्षमता का उपयोग कर सकेगा। इस संदर्भ में, उन्होंने पितृसत्तात्मक व्यवस्था को चुनौती देने की आवश्यकता पर भी बल दिया। राहुल गांधी ने विशेष रूप से युवाओं से आग्रह किया कि वे महिलाओं को नियंत्रित करने वाली सामाजिक सोच को बदलने में सक्रिय भूमिका निभाएं। उनके अनुसार, महिलाओं को भय, दबाव और सामाजिक बंधनों के बजाय अपनी पहचान और भविष्य को स्वयं तय करने का अवसर मिलना चाहिए।

छात्राओं ने शिक्षा, करियर और सुरक्षा पर उठाए सवाल

'छात्रों की गूंज' कार्यक्रम में छात्राओं ने शिक्षा, प्रतियोगी परीक्षाओं, पेपर लीक, करियर, सुरक्षा और सामाजिक दबाव जैसे अनेक महत्वपूर्ण मुद्दों को उठाया। राहुल गांधी ने इन छात्राओं की समस्याओं को धैर्यपूर्वक सुना और उन्हें संबोधित करते हुए कहा कि शिक्षा और रोजगार के अवसरों के साथ-साथ महिलाओं की सुरक्षा और सम्मान भी समान रूप से आवश्यक हैं। उन्होंने आश्वासन दिया कि कांग्रेस इन मुद्दों पर सक्रियता से काम करेगी।

भाजपा की प्रतिक्रिया: हिंदू धर्म और सनातन परंपराओं पर हमले का आरोप

राहुल गांधी के मनुस्मृति संबंधी बयान के बाद राजनीतिक प्रतिक्रियाएं भी सामने आई हैं। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के नेताओं ने कांग्रेस नेता के इस बयान पर कड़ी आपत्ति जताई है। भाजपा नेताओं ने आरोप लगाया कि राहुल गांधी लगातार हिंदू धर्म और सनातन परंपराओं को निशाना बनाते हैं। उन्होंने इस बयान को 'हिंदू विरोधी सोच' से जोड़ते हुए कहा कि राजनीतिक लाभ के लिए धार्मिक ग्रंथों पर इस प्रकार की टिप्पणी करना उचित नहीं है। भाजपा नेता निशिकांत दुबे ने भी राहुल गांधी के बयान पर पलटवार करते हुए मनुस्मृति के संदर्भ में उनकी समझ पर सवाल उठाए। उन्होंने एक श्लोक का उल्लेख करते हुए कांग्रेस नेता पर व्यंग्य कसा।

इसके विपरीत, कांग्रेस और उसके समर्थकों ने राहुल गांधी के बयान का समर्थन किया है और इसे महिला स्वतंत्रता तथा लैंगिक समानता की लड़ाई से जोड़ा है। उनका मानना है कि राहुल गांधी ने सामाजिक रूढ़ियों और पितृसत्तात्मक सोच पर प्रहार करके महिलाओं के सशक्तिकरण का मार्ग प्रशस्त किया है।

वैचारिक और राजनीतिक बहस तेज

राहुल गांधी के इस बयान ने एक बार फिर मनुस्मृति, महिला अधिकार, सामाजिक परंपराओं और पितृसत्ता को लेकर देश में राजनीतिक बहस को तेज कर दिया है। पुणे का 'छात्रों की गूंज' कार्यक्रम, जो मूल रूप से छात्राओं की समस्याओं पर संवाद के लिए आयोजित किया गया था, अब इन गहन वैचारिक और राजनीतिक मुद्दों का एक महत्वपूर्ण मंच भी बन गया है। यह घटनाक्रम भारत में लैंगिक समानता और महिलाओं के अधिकारों को लेकर चल रही व्यापक सामाजिक चर्चा को और मुखर करेगा।