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पुत्रदा एकादशी: श्रीराम-जानकी मंदिर में झूला उत्सव, भक्ति गीतों से गूंजा परिसर

नर्मदापुरम के सेठानी घाट स्थित श्रीराम-जानकी मंदिर में पुत्रदा एकादशी एवं झूला ग्यारस का उत्सव श्रद्धा और उल्लास से मनाया गया। भगवान के मनोहारी श्रृंगार और झूले के पदों के गायन ने श्रद्धालुओं को भाव-विभोर कर दिया।

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पुत्रदा एकादशी: श्रीराम-जानकी मंदिर में झूला उत्सव, भक्ति गीतों से गूंजा परिसर

द क्लिफ न्यूज़ | नर्मदापुरम | 23 अगस्त 2026

नर्मदापुरम के सेठानी घाट पर स्थित श्रीराम-जानकी मंदिर में श्रावण मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी, जिसे पुत्रदा एकादशी या झूला ग्यारस के नाम से भी जाना जाता है, का उत्सव अत्यंत श्रद्धा और उल्लास के साथ संपन्न हुआ। इस पावन अवसर पर मंदिर परिसर भक्तिमय संगीत और मनोहारी सजावट से सराबोर रहा, जिसने बड़ी संख्या में उपस्थित श्रद्धालुओं को मंत्रमुग्ध कर दिया। पुत्रदा एकादशी का महत्व संतान प्राप्ति और वंश वृद्धि से जुड़ा है, जिसके चलते विवाहित दंपतियों के बीच इस व्रत का विशेष विधान है। इस वर्ष के श्रावण मास में पड़ने के कारण इस एकादशी का महत्व और भी बढ़ गया, क्योंकि श्रावण मास भगवान शिव और विष्णु दोनों को प्रिय है।

उत्सव की परंपरा का निर्वहन करते हुए, मंदिर में भगवान श्रीकृष्ण, राधारानी और बाल गोपाल का विशेष और आकर्षक श्रृंगार किया गया। विभिन्न प्रकार के पुष्पों, जैसे गुलाब, गेंदा, और रजनीगंधा, तथा मनोहारी सजावट के लिए श्वेतपत्र, झालरें और रंगीन वस्त्रों का उपयोग किया गया। भगवान की झांकी अत्यंत मनोहारी थी, जिसमें बाल गोपाल को माखन चोर के रूप में दर्शाया गया था, और राधारानी एवं श्रीकृष्ण को दिव्य प्रेम के प्रतीक के रूप में प्रस्तुत किया गया। इसके पश्चात, भगवान को एक सुंदर, कलात्मक ढंग से बनाए गए झूले पर विराजमान कर श्रद्धापूर्वक झुलाया गया, जो इस उत्सव का मुख्य आकर्षण रहा। यह झूले का दृश्य भक्त और भगवान के बीच वात्सल्य और स्नेह का अद्भुत संगम प्रस्तुत कर रहा था।

भक्तिमय वातावरण और पारंपरिक गायन

पूरे आयोजन के दौरान मंदिर परिसर भक्ति गीतों और भजनों की मधुर ध्वनि से गूंजता रहा। पारंपरिक भक्ति संगीत, जिसमें 'यशोदा का लाल झुलावे', 'राधा कृष्ण की जोड़ी', और 'बाल गोपाल के भजन' शामिल थे, अनवरत प्रस्तुत किए जा रहे थे। श्रद्धालुओं ने बड़ी संख्या में भाग लिया और भगवान के समक्ष झूले के पारंपरिक पदों एवं हिंडोले के गीतों का सामूहिक गायन किया। इस भक्ति संगीत और धार्मिक वातावरण ने श्रद्धालुओं को भाव-विभोर कर दिया और वे पूर्णतः ईश्वर की आराधना में लीन नजर आए। कई भक्त ऐसे भी थे जो आँसुओं के साथ अपनी आस्था व्यक्त कर रहे थे।

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, भगवान को झूला झुलाकर परिवार की सुख-समृद्धि, उत्तम स्वास्थ्य और संतान की मंगलकामना की जाती है। इसी भावना के साथ श्रद्धालुओं ने भगवान के दर्शन कर पुण्य लाभ अर्जित किया। श्रावण मास की हरियाली और बढ़ती धार्मिक आस्था के बीच, झूला ग्यारस का यह पर्व इस वर्ष श्रद्धालुओं के लिए विशेष रूप से स्मरणीय बन गया। भगवान के दिव्य श्रृंगार, मनमोहक झूला उत्सव और भक्ति पदों के सामूहिक गायन के साथ-साथ मंदिर में वितरित किए गए प्रसाद ने इस आयोजन को एक यादगार और आनंददायक अनुभव प्रदान किया। श्रद्धालुओं ने इस अवसर पर मंदिर के पुजारियों और आयोजकों के प्रति भी आभार व्यक्त किया, जिनके प्रयासों से यह उत्सव सफलतापूर्वक संपन्न हुआ।