पूर्वा फाल्गुनी नक्षत्र में सूर्य का प्रवेश, 13 सितंबर तक जारी रहेगी वर्षा
31 अगस्त को सूर्य के पूर्वा फाल्गुनी नक्षत्र में प्रवेश से वर्षा का छठवां नक्षत्र शुरू होगा, जो 13 सितंबर तक रहेगा। ज्योतिषियों के अनुसार,...

द क्लिफ न्यूज़ | भोपाल | 30 अगस्त 2026
31 अगस्त की शाम 7:18 बजे सूर्य पूर्वा फाल्गुनी नक्षत्र में प्रवेश करेंगे, जिसके साथ ही वर्षा का छठवां नक्षत्र आरंभ हो जाएगा। यह नक्षत्र 13 सितंबर तक सक्रिय रहेगा। ज्योतिष मठ संस्थान भोपाल के ज्योतिषाचार्य पंडित विनोद गौतम ने भारतीय मौसम ज्योतिष विज्ञान के अनुसार बताया कि वर्षा के आठ नक्षत्र माने जाते हैं, और पूर्वा फाल्गुनी नक्षत्र का यह विशेष चरण आगामी 13 सितंबर तक मौसम पर अपना प्रभाव बनाए रखेगा।
नक्षत्र के आधार पर वर्षा का अनुमान
पंडित गौतम के अनुसार, पूर्वा फाल्गुनी नक्षत्र में नक्षत्र संज्ञा स्त्री-पुरुष और योग सूर्य-चंद्र का निर्माण होगा। इसके आधार पर वर्षा का वाहन 'खर' अर्थात गधा माना गया है। नक्षत्र के वाहन अधिपति मंगल होने के कारण सामान्य वर्षा के योग बन रहे हैं। हालांकि, उन्होंने यह भी संभावना जताई कि योग-योग के आधार पर इस नक्षत्र में वर्षा का एक और दौर शुरू हो सकता है, जिसके चलते कई स्थानों पर असामान्य अथवा अधिक वर्षा की स्थिति निर्मित हो सकती है। यह अनुमान भारतीय मौसम ज्योतिष के प्राचीन सिद्धांतों पर आधारित है, जो खगोलीय पिंडों की चाल और उनके प्रभावों का अध्ययन करते हैं।
मेघों का स्वामी और वर्षा का वितरण
इस वर्ष तक्षक नामक मेघ वर्षा करा रहे हैं, जबकि मेघों के स्वामी चंद्रमा हैं। पंडित गौतम के मुताबिक, रोहिणी का निवास संधि में होने के कारण वर्षा के वितरण में बदलाव देखने को मिल रहा है। इसके परिणामस्वरूप, विभिन्न क्षेत्रों में कहीं सामान्य तो कहीं अत्यधिक वर्षा की स्थिति उत्पन्न होने के योग हैं। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि पूर्वा फाल्गुनी नक्षत्र के सक्रिय रहने के दौरान वर्षा के स्वरूप में क्षेत्रवार अंतर स्पष्ट रूप से देखने को मिलेगा। यह अंतर विभिन्न भौगोलिक और जलवायुगत कारकों के साथ-साथ खगोलीय प्रभावों के संयुक्त परिणाम के रूप में देखा जा सकता है।
आगे के संभावित मौसम का पूर्वानुमान
पूर्वा फाल्गुनी नक्षत्र में सूर्य का गोचर वर्षा की प्रकृति और तीव्रता को प्रभावित करेगा। ज्योतिषीय गणनाओं के अनुसार, इस अवधि में वर्षा का पैटर्न अप्रत्याशित हो सकता है। जहां कुछ क्षेत्रों को सामान्य बारिश से राहत मिल सकती है, वहीं अन्य स्थानों पर भारी वर्षा से बाढ़ जैसी स्थिति का भी सामना करना पड़ सकता है। मेघों के स्वामी चंद्रमा की भूमिका को देखते हुए, वर्षा की मात्रा में उतार-चढ़ाव की संभावना बनी रहेगी। पंडित गौतम ने सलाह दी है कि स्थानीय मौसम विभाग की चेतावनियों पर भी ध्यान देना महत्वपूर्ण होगा, क्योंकि यह ज्योतिषीय अनुमानों के पूरक के रूप में कार्य करता है।
मौसम ज्योतिष का महत्व
भारतीय संस्कृति में मौसम ज्योतिष का गहरा महत्व रहा है, जिसके द्वारा सदियों से कृषि और दैनिक जीवन के लिए मौसम का पूर्वानुमान लगाया जाता रहा है। पूर्वा फाल्गुनी नक्षत्र का यह प्रवेश, नक्षत्रों के एक क्रम का हिस्सा है जो वर्ष भर मौसम को प्रभावित करते हैं। आठ प्रमुख वर्षा नक्षत्रों में से प्रत्येक का अपना विशिष्ट प्रभाव होता है। पूर्वा फाल्गुनी नक्षत्र, जो 13 सितंबर तक सक्रिय रहेगा, वर्तमान मौसम चक्र में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। इसके प्रभाव को समझना, आगामी दिनों के लिए संभावित वर्षा की दिशा और प्रकृति का एक प्रारंभिक अनुमान प्रदान करता है।
