पुलिसकर्मियों के कल्याण पर बड़ा जोर: डीजीपी ने की अहम घोषणाएं
मध्य प्रदेश पुलिस के डीजीपी कैलाश मकवाणा ने पुलिसकर्मियों और उनके परिवारों के कल्याण से जुड़ी कई महत्वपूर्ण घोषणाएं कीं। स्वास्थ्य, शिक्षा, मानसिक स्वास्थ्य, पदोन्नति और प्रशासनिक सुविधाओं में सुधार पर विशेष जोर दिया गया।

द क्लिफ न्यूज़ | भोपाल | 2 नवंबर 2026
मध्य प्रदेश पुलिस के पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) श्री कैलाश मकवाणा ने पुलिसकर्मियों और उनके परिवारों के कल्याण, सेवा सुविधाओं और कार्य परिस्थितियों में निरंतर सुधार को सर्वोच्च प्राथमिकता देने की बात कही है। भोपाल में राज्य संयुक्त पुलिस परामर्शदात्री समिति एवं पुलिस कल्याण समिति की वार्षिक बैठक की अध्यक्षता करते हुए डीजीपी ने स्वास्थ्य, शिक्षा, मानसिक स्वास्थ्य, पदोन्नति और प्रशासनिक सुधारों से जुड़े कई महत्वपूर्ण फैसलों की जानकारी दी। उन्होंने जनसुनवाई, शिकायतों के समयबद्ध निराकरण और मानसिक स्वास्थ्य को लेकर विशेष प्रयासों पर भी प्रकाश डाला।
बैठक की शुरुआत में, देवास जिले के खातेगांव थाना प्रभारी निरीक्षक श्री दिलीप पुरी के आकस्मिक निधन पर शोक व्यक्त किया गया, जिन्होंने कर्तव्य निर्वहन के दौरान अपनी जान गंवा दी। उपस्थित अधिकारियों और कर्मचारियों ने दो मिनट का मौन रखकर उन्हें श्रद्धांजलि दी।
पुलिस परिवारों के प्रति संवेदनशीलता और सुविधाओं में विस्तार
डीजीपी श्री मकवाणा ने कहा कि पुलिस एक अनुशासित संगठन है, लेकिन इसके सदस्यों के स्वास्थ्य, पारिवारिक संतुष्टि और आर्थिक सुरक्षा का ध्यान रखना भी संगठन की प्राथमिक जिम्मेदारी है। उन्होंने पिछले बैठक में लिए गए निर्णयों के क्रियान्वयन की जानकारी देते हुए इकाई प्रमुखों को निर्देश दिए कि कल्याणकारी योजनाओं का लाभ पात्र पुलिसकर्मियों और उनके परिवारों तक समय पर पहुंचे। उन्होंने नियमित जनसुनवाई आयोजित करने, शिकायतों का समय पर निवारण करने तथा आम नागरिकों और अधीनस्थ कर्मचारियों के प्रति संवेदनशील व्यवहार सुनिश्चित करने पर जोर दिया। आकस्मिक परिस्थितियों में आश्रित परिवारों को आर्थिक सहायता प्राप्त करने में अनावश्यक दस्तावेजी कठिनाइयों का सामना न करना पड़े, इसके लिए बीमा दावों और अन्य लाभों से संबंधित मामलों की इकाई स्तर पर नियमित निगरानी के निर्देश दिए गए।
मानसिक स्वास्थ्य और शैक्षणिक सुविधाओं को बेहतर बनाने पर जोर
पुलिस महानिदेशक ने पुलिसकर्मियों के मानसिक स्वास्थ्य को एक अत्यंत महत्वपूर्ण विषय बताया। उन्होंने मानसिक स्वास्थ्य परामर्श केंद्र के प्रस्ताव की सराहना की और हार्टफुलनेस संस्था के सहयोग से संचालित ध्यान एवं मानसिक स्वास्थ्य सत्रों की नियमित समीक्षा पर बल दिया। योग, आसन और प्राणायाम जैसी गतिविधियों को प्रोत्साहित करने पर भी जोर दिया गया। दिशा लर्निंग सेंटर की उपयोगिता बढ़ाने के संबंध में, डीजीपी ने कहा कि इन केंद्रों को केवल पुस्तकालय तक सीमित न रखकर, पुलिस परिवारों के बच्चों की वास्तविक शैक्षणिक आवश्यकताओं के अनुरूप विकसित किया जाए। आवश्यकतानुसार विशेषज्ञ शिक्षकों को आमंत्रित करने, ऑनलाइन कोचिंग का अधिकतम उपयोग करने और बच्चों की मांग के अनुसार विशेष कक्षाएं आयोजित करने के निर्देश दिए गए। साथ ही, केंद्रों में पर्याप्त स्थान, बेहतर इंटरनेट सुविधा और अध्ययन के लिए उपयुक्त समय उपलब्ध कराने पर भी जोर दिया गया।
भर्ती, पदोन्नति और प्रशासनिक सुधारों की प्रगति
पुलिस बल की कार्यक्षमता बढ़ाने और कार्यभार कम करने के लिए किए जा रहे प्रयासों के तहत, डीजीपी ने बताया कि वर्ष 2025 और 2026 में लगभग 19 से 20 हजार पदों पर भर्ती प्रक्रिया पूरी या जारी है। आठ वर्ष के अंतराल के बाद उप निरीक्षक और सूबेदार संवर्ग की भर्ती कर उनका प्रशिक्षण प्रारंभ किया जा चुका है, और कांस्टेबल चालक के 1,000 पदों पर भी भर्ती प्रक्रिया जारी है। उन्होंने यह भी बताया कि विभिन्न संवर्गों में लंबे समय से लंबित पदोन्नति के मामलों में तेजी लाते हुए लगभग 28 हजार पुलिसकर्मियों को पदोन्नति प्रदान की गई है। अनुकंपा नियुक्ति के प्रकरणों का भी संवेदनशीलता से निराकरण किया गया है। ईएचआरएमएस के तहत लीव मॉड्यूल प्रारंभ होने से अवकाश आवेदन और स्वीकृति की प्रक्रिया ऑनलाइन हो गई है।
कानून-व्यवस्था और अभियानों में पुलिस के योगदान की सराहना
श्री मकवाणा ने प्रदेश में कानून-व्यवस्था बनाए रखने, त्योहारों के शांतिपूर्ण आयोजन, संवेदनशील परिस्थितियों के प्रबंधन और विभिन्न अभियानों में पुलिस अधिकारियों एवं कर्मचारियों के योगदान की सराहना की। उन्होंने बताया कि गत वर्ष मध्यप्रदेश पुलिस ने 14 हजार से अधिक बालिकाओं को खोजने में अभूतपूर्व सफलता प्राप्त की, जो अब तक का सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन है। नक्सल उन्मूलन की दिशा में किए गए प्रयासों की भी सराहना की गई और अभियान में उत्कृष्ट योगदान देने वाले पुलिस अधिकारियों एवं कर्मचारियों को आउट ऑफ टर्न प्रमोशन प्रदान करने का उल्लेख किया। नशामुक्त भारत के लक्ष्य की ओर जनजागरूकता और प्रवर्तन गतिविधियों को निरंतर प्रभावी बनाए रखने पर भी जोर दिया गया।
नशामुक्ति अभियान में उत्कृष्ट कार्य पर पांच पुलिस इकाइयों को सम्मान
डीजीपी ने ‘नशे से दूरी है जरूरी’ अभियान के दोनों चरणों में पुलिस इकाइयों के योगदान की सराहना करते हुए, नशामुक्ति अभियान के दौरान उत्कृष्ट कार्य करने वाली पांच पुलिस इकाइयों को सम्मानित किया। इनमें इंदौर नगरीय और भोपाल नगरीय को व्यापक जनभागीदारी, प्रभावी संचालन और जागरूकता गतिविधियों के लिए, तथा बालाघाट, बुरहानपुर और छिंदवाड़ा को अभियान के प्रभावी क्रियान्वयन, जनजागरूकता और सामुदायिक सहभागिता के लिए सम्मानित किया गया। डीजीपी ने इन सभी इकाइयों के सदस्यों को बधाई देते हुए कहा कि यह सम्मान पूरी टीम के सामूहिक प्रयासों का है और अन्य इकाइयों को भी इससे प्रेरणा लेनी चाहिए।
आर्थिक सुरक्षा और बीमा लाभों की समीक्षा
बैठक में पुलिसकर्मियों एवं उनके आश्रित परिवारों की आर्थिक सुरक्षा से जुड़े प्रावधानों की भी समीक्षा की गई। वर्ष 2025 की राज्य स्तरीय वार्षिक बैठक के निर्णय के अनुसार, परोपकार निधि से दी जाने वाली आर्थिक सहायता राशि 1 लाख रुपये से बढ़ाकर 5 लाख रुपये कर दी गई है। पुलिस सैलरी पैकेज योजना के अंतर्गत विभिन्न बैंकों द्वारा उपलब्ध कराई जा रही सुविधाओं की समीक्षा की गई और पात्र पुलिसकर्मियों के वेतन खातों के पीएसपी श्रेणी में पंजीकरण और बीमा लाभों की पर्याप्त जानकारी सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए।
शिक्षा निधि से छात्रवृत्ति और हेल्थ प्लान का विस्तार
पुलिस मुख्यालय स्तर पर संचालित कल्याणकारी योजनाओं की प्रगति की जानकारी देते हुए बताया गया कि शिक्षा निधि के अंतर्गत चालू वित्तीय वर्ष में अब तक 1,694 पुलिसकर्मियों के बच्चों को लगभग 5 करोड़ 45 लाख रुपये की छात्रवृत्ति प्रदान की गई है। शिक्षा निधि से जुड़े लाभार्थियों को लगभग 5 करोड़ 24 लाख रुपये की सहायता उपलब्ध कराई गई है। पुलिस हेल्थ प्लान के तहत वर्तमान में 64 अस्पताल अनुबंधित हैं, जिनमें 11 प्रदेश के बाहर हैं। पुलिसकर्मियों की आवश्यकता को देखते हुए अस्पतालों का पैनल बढ़ाने तथा सीमावर्ती राज्यों के ऐसे अस्पतालों को योजना से जोड़ने की संभावनाओं पर विचार किया गया।
खेल प्रतिभाओं को प्रोत्साहन और दिशा लर्निंग सेंटर की सफलता
पुलिसकर्मियों के बच्चों को खेल के क्षेत्र में आगे बढ़ाने के उद्देश्य से संचालित खेल प्रोत्साहन योजना की भी समीक्षा की गई। राष्ट्रीय और राज्य स्तरीय प्रतियोगिताओं में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले पात्र बच्चों की पहचान कर उन्हें योजना का लाभ दिलाने के लिए सक्रिय प्रयास करने पर जोर दिया गया। दिशा लर्निंग सेंटर के माध्यम से प्रदेश की 86 इकाइयों में संचालित पुस्तकालयों और ऑनलाइन कोचिंग की सुविधाओं का उल्लेख करते हुए बताया गया कि पिछले वर्ष इन केंद्रों के माध्यम से 300 से अधिक बच्चों ने विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं में सफलता प्राप्त की। ऑनलाइन कोचिंग प्लेटफॉर्म, विशेष सत्रों और अन्य उपयोगी विषयों पर प्रशिक्षण आयोजित करने के सुझाव भी प्राप्त हुए।
बैठक में पुलिस स्कूलों, स्वस्ति चिकित्सालय और पुलिसकर्मियों के हित से जुड़े अन्य प्रस्तावों पर भी विचार-विमर्श किया गया। विभिन्न इकाइयों के अधिकारियों द्वारा प्रस्तुत सुझावों पर संबंधित शाखाओं को परीक्षण और आवश्यक कार्यवाही के निर्देश दिए गए। इस अवसर पर अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक (कल्याण) श्री सोलोमन यश कुमार मिंज ने प्रमुख कल्याणकारी योजनाओं और उनकी प्रगति का प्रस्तुतिकरण दिया। बैठक में प्रदेशभर के वरिष्ठ पुलिस अधिकारी उपस्थित रहे।
