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पुलिस और SOS बाल ग्राम के संयुक्त प्रयास से भटके बच्चों को मिला परिवार का सहारा

मध्यप्रदेश पुलिस और SOS बाल ग्राम के समन्वय से कई भटके हुए बच्चों को सुरक्षित आश्रय, काउंसलिंग और परिवार का सहारा मिला है। यह पहल बच्चों की सुरक्षा और पुनर्वास सुनिश्चित करती है।

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पुलिस और SOS बाल ग्राम के संयुक्त प्रयास से भटके बच्चों को मिला परिवार का सहारा

द क्लिफ न्यूज़ | भोपाल | 22 अगस्त 2026

मध्यप्रदेश पुलिस और एसओएस बाल ग्राम (SOS Children's Villages) के साझा प्रयासों के माध्यम से घर से बिछड़कर भटके हुए बच्चों को न केवल सुरक्षित आश्रय मिल रहा है, बल्कि संवेदनशील काउंसलिंग और त्वरित कार्रवाई के ज़रिए उन्हें उनके परिवार से दोबारा मिलाने में भी सफलता मिल रही है। पुलिस महानिदेशक श्री कैलाश मकवाणा के मार्गदर्शन और पुलिस उप महानिरीक्षक डॉ. विनीत कपूर के नेतृत्व में संचालित हो रही सामुदायिक पुलिसिंग की यह पहल पुलिस की मानवीय और जनसरोकार वाली भूमिका को उजागर करती है, साथ ही समाज में पुलिस और नागरिक संस्थाओं के बीच विश्वास को मज़बूत करती है।

इस अनूठी पहल का मुख्य उद्देश्य समाज के सबसे कमजोर वर्गों, विशेषकर बच्चों की सुरक्षा, देखभाल और पुनर्वास सुनिश्चित करना है। पुलिस की तत्परता और स्वयंसेवी संस्थाओं की संवेदनशीलता के तालमेल से ऐसे कई मामले सामने आए हैं, जहां खोए हुए बच्चे अपने परिवार की मुस्कान वापस ला सके हैं। यह समन्वय केवल प्रदेश तक सीमित नहीं है, बल्कि आवश्यकता पड़ने पर अन्य राज्यों की पुलिस से भी प्रभावी संपर्क स्थापित कर बच्चों की घर वापसी का मार्ग प्रशस्त किया जा रहा है।

संवेदनशील समन्वय से लौटे बिछड़े बच्चे

हाल ही में 15 अगस्त की रात रायसेन में एक बालक और एक बालिका डरे-सहमे मिले। वे अपने दोस्त के साथ यात्रा कर रहे थे और घबराहट में किसी अंजान स्टेशन पर ट्रेन से उतर गए। बच्चों के पास किसी परिजन का मोबाइल नंबर नहीं था और वे केवल अपने घर की सीमित जानकारी दे पा रहे थे। ऐसी स्थिति में, मध्यप्रदेश पुलिस ने तत्काल बच्चों को सुरक्षित संरक्षण में लिया और एसओएस बाल ग्राम के सहयोग से उनके परिजनों की तलाश शुरू की। जबलपुर पुलिस कंट्रोल रूम सहित अन्य पुलिस इकाइयों से समन्वय कर, उपलब्ध सीमित जानकारी के आधार पर परिवार की पहचान की गई। आवश्यक कानूनी प्रक्रिया पूरी होने के बाद, दोनों बच्चों को बाल कल्याण समिति के माध्यम से उनके माता-पिता को सौंप दिया गया।

एक अन्य मामले में, दिल्ली से गलती से भोपाल पहुंची एक 15-16 वर्षीय किशोरी ने डर के कारण अपना हुलिया बदल लिया था और एक मनगढ़ंत कहानी बताई थी। भोपाल और छतरपुर पुलिस कंट्रोल रूम से संपर्क कर और फोटो मिलान के ज़रिए, पुलिस ने किशोरी के माता-पिता की पहचान की, जो उसे लगातार तलाश रहे थे और जिसकी गुमशुदगी की रिपोर्ट भी दर्ज थी। केवल तीन दिनों के भीतर, पुलिस और संस्था के समन्वित प्रयासों से किशोरी को उसके परिवार से मिला दिया गया।

त्वरित कार्रवाई और तकनीकी सहायता का महत्व

रानी कमलापति रेलवे स्टेशन के पास रेलवे ट्रैक पर भटकते हुए मिले एक 7-8 वर्षीय बच्चे को भी पुलिस की त्वरित कार्रवाई ने सुरक्षित बचाया। बच्चा केवल गोविंदपुरा का नाम बता पा रहा था। थाना गोविंदपुरा के स्तर पर किए गए समन्वय से बच्चे की गुमशुदगी की पुष्टि हुई और उसे सुरक्षित उसके परिवार तक पहुंचाया गया। ऐसे ही एक अन्य मामले में, एक किशोर जो लंबे समय से अपनी पहचान और पते को लेकर स्पष्ट जानकारी नहीं दे पा रहा था, एसओएस बाल ग्राम के प्रशिक्षित कार्यकर्ताओं की संवेदनशील काउंसलिंग और लगातार संवाद से उसकी सही पहचान सुनिश्चित हुई। बच्चे द्वारा दी गई नई जानकारी के आधार पर संबंधित क्षेत्र की पुलिस से संपर्क किया गया, जहां उसकी गुमशुदगी की जानकारी मिली और फोटो मिलान से उसकी पहचान पक्की हुई, जिसके बाद वह अपने परिवार से मिल सका।

अंतर-राज्यीय समन्वय से बच्चों की घर वापसी

मध्यप्रदेश पुलिस और एसओएस बाल ग्राम का यह समन्वय प्रदेश की सीमाओं तक सीमित नहीं है। जनवरी माह में 14-15 वर्षीय एक किशोर को उत्तर प्रदेश के झांसी तक सुरक्षित पहुंचाया गया। इसी प्रकार, 15 वर्षीय एक अन्य भटके हुए बच्चे के संबंध में बिहार के भभुआ जिले के मोहनिया थाना पुलिस से संपर्क कर उसे परिवार से मिलाने की प्रक्रिया आगे बढ़ाई गई। वर्तमान में भी राजगढ़ जिले और बिहार के सीवान क्षेत्र के बच्चों को उनके परिवारों तक पहुंचाने का कार्य जारी है।

नागरिकों के लिए अपील: भटके बच्चे दिखने पर तत्काल सूचित करें

यह महत्वपूर्ण है कि यदि किसी नागरिक को कोई बच्चा अकेला, भटका हुआ या असहाय अवस्था में दिखाई देता है, तो उसे तत्काल पुलिस या बाल सहायता तंत्र को सूचित करना चाहिए। बच्चे को सुरक्षित स्थान तक पहुंचाने की जिम्मेदारी पुलिस और बाल संरक्षण व्यवस्था को सौंपना ही सबसे उचित कदम है। नागरिक तत्काल डायल-112 अथवा बाल सहायता सेवा 1098 पर संपर्क कर सकते हैं। सूचना मिलने पर पुलिस और बाल संरक्षण संस्थाएं बच्चे को सुरक्षित संरक्षण प्रदान कर आवश्यक कानूनी प्रक्रिया के माध्यम से उसके परिवार तक पहुंचाती हैं।

घर वापसी की व्यवस्थित प्रक्रिया

भटके हुए बच्चे की घर वापसी की प्रक्रिया में सबसे पहले पुलिस उसे सुरक्षित संरक्षण में लेकर आवश्यक प्रविष्टि और मेडिकल परीक्षण कराती है। इसके बाद, नियमानुसार बच्चे को सुरक्षित बाल संरक्षण संस्था में रात्रि प्रवास के लिए भेजा जाता है और अगले दिन बाल कल्याण समिति के समक्ष प्रस्तुत किया जाता है। संस्था के प्रशिक्षित कार्यकर्ता बच्चे की संवेदनशीलता के साथ काउंसलिंग कर उसके घर, माता-पिता और पते से संबंधित जानकारी जुटाते हैं। प्राप्त जानकारी के आधार पर, पुलिस कंट्रोल रूम के माध्यम से संबंधित जिले या राज्य की पुलिस से समन्वय कर गुमशुदगी की जानकारी का सत्यापन किया जाता है। पहचान सुनिश्चित होने पर, बाल कल्याण समिति की आवश्यक प्रक्रिया के तहत बच्चे को सुरक्षित रूप से उसके माता-पिता या वैध अभिभावक को सौंप दिया जाता है।

अनाथ और बेसहारा बच्चों के लिए संवेदनात्मक व्यवस्था

जिन बच्चों के माता-पिता जीवित नहीं हैं, उनके लिए भी संस्था द्वारा दादा-दादी या अन्य उपयुक्त रिश्तेदारों की तलाश कर बच्चे को उनके संरक्षण में सौंपने का प्रयास किया जाता है। बच्चों की शिक्षा और पोषण सुनिश्चित करने के लिए संस्था आर्थिक सहायता भी प्रदान करती है। वर्तमान में भोपाल और विदिशा में 83 बच्चे इस योजना का लाभ उठा रहे हैं। यदि किसी बच्चे का कोई पारिवारिक सहारा नहीं मिलता, तो निर्धारित कानूनी प्रक्रिया के बाद उसे 'Legally Free for Adoption' घोषित किया जाता है, ताकि उसे एक सुरक्षित और स्थायी परिवार मिल सके।

SOS चिल्ड्रेन्स विलेजेज इंडिया: बच्चों और परिवारों को सशक्त बनाने का एक दशक पुराना प्रयास

SOS चिल्ड्रेन्स विलेजेज इंडिया, एक स्वतंत्र, गैर-सरकारी और गैर-लाभकारी संस्था है, जो माता-पिता की देखभाल से वंचित बच्चों के संरक्षण, शिक्षा, स्वास्थ्य और समग्र विकास के साथ-साथ कमजोर परिवारों को सशक्त बनाने के लिए कार्यरत है। वर्ष 1964 से भारत में सक्रिय इस संस्था ने अब तक 65,000 से अधिक बच्चों तक अपनी पहुंच बनाई है। संस्था का 'Family Like Care Model' बच्चों को परिवार जैसा सुरक्षित और स्नेहपूर्ण वातावरण प्रदान करता है, जबकि 'Family Strengthening Programme' के माध्यम से कमजोर परिवारों, महिलाओं और बच्चों को शिक्षा, स्वास्थ्य, पोषण, कौशल विकास और आजीविका के क्षेत्र में सहयोग दिया जाता है। पुलिस के साथ समन्वय करते हुए, संस्था भटके या परिवार से बिछड़े बच्चों को सुरक्षित संरक्षण, संवेदनशील काउंसलिंग और आवश्यक सहयोग प्रदान करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है।