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प्रियंका के बयान पर लोकसभा में हंगामा, नए शिक्षा मंत्री की नियुक्ति पर उठे सवाल

लोकसभा में कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी वाड्रा के शिक्षा नीति, पेपर लीक और छात्र आंदोलनों पर दिए भाषण के दौरान नए शिक्षा मंत्री की नियुक्ति पर की गई टिप्पणी से सत्ता पक्ष ने कड़ा विरोध जताया।

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प्रियंका के बयान पर लोकसभा में हंगामा, नए शिक्षा मंत्री की नियुक्ति पर उठे सवाल

द क्लिफ न्यूज़ | नई दिल्ली | 28 जुलाई 2026

नई दिल्ली में लोकसभा का माहौल मंगलवार को तब काफी देर तक गरमाया रहा, जब कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी वाड्रा ने अपने भाषण में केंद्र सरकार की शिक्षा नीति, देश में हो रहे पेपर लीक की घटनाओं और छात्र आंदोलनों की पृष्ठभूमि में नए शिक्षा मंत्री की नियुक्ति पर भी सवाल उठाए। उनके एक बयान पर सत्ता पक्ष के सदस्यों ने कड़ा विरोध दर्ज कराते हुए सदन में हंगामा खड़ा कर दिया।

प्रियंका गांधी ने अपने संबोधन की शुरुआत देश में रोजगार, शिक्षा की गुणवत्ता और परीक्षा प्रणाली की वर्तमान स्थिति पर चिंता व्यक्त करते हुए की। उन्होंने सरकार पर आरोप लगाया कि रोजगार सृजन से जुड़े सभी प्रमुख क्षेत्रों को लगातार कमजोर किया गया है। उन्होंने विशेष रूप से प्रतियोगी परीक्षाओं में बार-बार होने वाले पेपर लीक का उल्लेख किया, जिससे करोड़ों छात्रों के भविष्य पर असर पड़ रहा है। उन्होंने कहा कि इन मामलों में अब तक किसी भी बड़े दोषी को प्रभावी सजा नहीं मिल पाई है।

शिक्षा व्यवस्था में केंद्रीयकरण और बजट पर चिंता

कांग्रेस सांसद ने राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (एनटीए) के गठन के बाद परीक्षा प्रणाली में अत्यधिक केंद्रीयकरण को पारदर्शिता और जवाबदेही के लिए एक गंभीर चिंता का विषय बताया। उनके अनुसार, शिक्षा संस्थानों में वैचारिक हस्तक्षेप बढ़ा है और शिक्षा का समग्र स्तर लगातार गिरता जा रहा है। प्रियंका गांधी ने यह भी दावा किया कि केंद्र सरकार द्वारा शिक्षा के लिए आवंटित बजट का प्रतिशत हर वर्ष घटाया जा रहा है, जबकि दूसरी ओर बड़े उद्योगपतियों के ऋण माफ करने पर अधिक धन खर्च किया जा रहा है। उन्होंने सरकार से उसकी प्राथमिकताओं पर सवाल उठाते हुए पूछा कि क्या उसकी प्राथमिकता शिक्षा है या अन्य मुद्दे।

युवाओं का टूटता भरोसा और पूर्व शिक्षा मंत्री पर टिप्पणी

प्रियंका गांधी ने कहा कि देश के युवाओं का मौजूदा व्यवस्था से भरोसा उठ चुका है। उन्होंने जोर दिया कि जिन व्यवस्थाओं पर ही सवाल उठ रहे हों, उन्हीं के भीतर समाधान खोजना पर्याप्त नहीं है। सरकार को इस परिदृश्य से बाहर निकलकर ऐसे ठोस कदम उठाने होंगे जिनसे विश्वास बहाल हो सके। इस संदर्भ में, उन्होंने पूर्व शिक्षा मंत्री के इस्तीफे के बाद सदन में उनके अभिनंदन का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि जिस समय सदन में एक तरह का 'उत्सव' मनाया जा रहा था, उसी समय महाराष्ट्र में एक परिवार अपनी बेटी की आत्महत्या के दुख से गुजर रहा था। उन्होंने जवाबदेही और संवेदनशीलता की अपेक्षा के विपरीत माहौल पर अफसोस जताया।

नए शिक्षा मंत्री पर बयान से विवाद गहराया

भाषण के एक अहम मोड़ पर, प्रियंका गांधी ने नए शिक्षा मंत्री के चयन पर टिप्पणी करते हुए कहा कि प्रधानमंत्री ने ऐसे व्यक्ति को इस महत्वपूर्ण पद पर नियुक्त किया है, जिसने एक गर्भवती दुष्कर्म पीड़िता के दोषियों की रिहाई पर सहमति जताई थी। इस बयान के साथ ही सत्ता पक्ष के सदस्यों ने तुरंत अपनी सीटों से खड़े होकर तीव्र विरोध जताया, जिससे सदन में काफी शोर-शराबा हो गया।

लोकसभा अध्यक्ष ने तुरंत हस्तक्षेप करते हुए प्रियंका गांधी को सदन में तथ्यों के आधार पर बोलने की नसीहत दी और स्पष्ट किया कि बिना किसी प्रमाण के इस प्रकार के आरोप नहीं लगाए जाने चाहिए।

किरेन रिजिजू की प्रतिक्रिया और माफी की मांग

संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने प्रियंका गांधी के बयान पर कड़ी आपत्ति जताते हुए इसे मंत्री के 'चरित्र का हनन' बताया और संसद की गरिमा के अनुरूप नहीं करार दिया। उन्होंने मांग की कि इस विवादास्पद टिप्पणी को सदन की कार्यवाही से तुरंत हटाया जाए। रिजिजू ने कहा कि संसद में बहस का स्तर ऊंचा रहना चाहिए और हर सदस्य को जिम्मेदारी से बोलना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि यदि प्रियंका गांधी अपने आरोपों को प्रमाणित नहीं कर पाती हैं, तो उन्हें सदन से माफी मांगनी चाहिए।

छात्र आंदोलन और पुलिस कार्रवाई पर सवाल

प्रियंका गांधी ने छात्र आंदोलनों के दौरान हुई पुलिस कार्रवाई का भी मुद्दा उठाया। उन्होंने दिल्ली के राम मनोहर लोहिया (आरएमएल) अस्पताल जाने का जिक्र किया, जहाँ घायल छात्रों का इलाज चल रहा था। उन्होंने एक घायल छात्रा की माँ से मुलाकात का अनुभव साझा किया, जिसने नेताओं के आने-जाने पर अपनी पीड़ा और नाराजगी व्यक्त की थी। माँ ने कहा था कि केवल संवेदना व्यक्त करने से कुछ नहीं होगा, बल्कि उन लोगों को जवाबदेह ठहराया जाना चाहिए जिनकी वजह से उसकी बेटी इस स्थिति में पहुंची।

प्रियंका ने प्रधानमंत्री और गृह मंत्री से सवाल किया कि प्रदर्शन कर रहे छात्र-छात्राओं पर आंसू गैस, लाठीचार्ज और पैलेट गन का इस्तेमाल क्यों किया गया। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रदर्शनकारियों, विशेषकर छात्राओं के साथ अपमानजनक व्यवहार हुआ। उन्होंने पूछा कि ऐसा आदेश किसने दिया और सरकार युवाओं की आवाज से क्यों डर रही है।

सदन में जारी रहा टकराव

प्रियंका गांधी के पूरे भाषण के दौरान सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी नोकझोंक चलती रही। नए शिक्षा मंत्री को लेकर की गई टिप्पणी पर सबसे अधिक विवाद हुआ। सत्ता पक्ष के सांसद बार-बार टिप्पणी वापस लेने और रिकॉर्ड से हटाने की मांग कर रहे थे, जबकि विपक्ष अपनी बात पर अड़ा रहा। लोकसभा अध्यक्ष ने दोनों पक्षों से संयम बनाए रखने और संसदीय मर्यादा का पालन करने की अपील की।

इस घटनाक्रम के साथ ही शिक्षा नीति, पेपर लीक, छात्र आंदोलनों और संसदीय भाषा की मर्यादा जैसे महत्वपूर्ण मुद्दे एक बार फिर संसद के एजेंडे में आ गए हैं। यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि इस विवादित टिप्पणी को रिकॉर्ड से हटाने अथवा अन्य संसदीय कार्रवाई के संबंध में अध्यक्ष क्या निर्णय लेते हैं।