प्रशिक्षु आईपीएस अधिकारियों से बोले डीजीपी मकवाणा: नैतिकता, विश्वसनीयता ही उत्कृष्ट नेतृत्व की पहचान
भोपाल में पुलिस मुख्यालय में सरदार वल्लभभाई पटेल राष्ट्रीय पुलिस अकादमी के 21 प्रशिक्षु आईपीएस अधिकारियों ने डीजीपी कैलाश मकवाणा से भेंट की। डीजीपी ने पुलिस सेवा में नैतिकता और जनसेवा पर जोर दिया।

द क्लिफ न्यूज़ | भोपाल | 29 जुलाई 2026
मध्य प्रदेश पुलिस मुख्यालय में आज एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित हुई, जिसमें सरदार वल्लभभाई पटेल राष्ट्रीय पुलिस अकादमी, हैदराबाद से प्रशिक्षण के अंतर्गत भारत भ्रमण पर आए 21 प्रशिक्षु आईपीएस अधिकारियों ने पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) श्री कैलाश मकवाणा से सौजन्य भेंट की। इस अवसर पर डीजीपी मकवाणा ने प्रशिक्षु अधिकारियों को संबोधित करते हुए पुलिस नेतृत्व के लिए नैतिकता, विश्वसनीयता और जनसेवा की भावना के महत्व पर प्रकाश डाला।
यह दल 'भारत दर्शन' (Study-cum-Cultural Tour) के हिस्से के रूप में मध्य प्रदेश की यात्रा पर है। इसमें भारतीय पुलिस सेवा के 19 प्रशिक्षु अधिकारियों के अतिरिक्त मॉरीशस और नेपाल के दो विदेशी पुलिस अधिकारी भी शामिल हैं। इन प्रशिक्षु अधिकारियों का संबंध उत्तर प्रदेश, बिहार, नागालैंड, केरल, पश्चिम बंगाल, मेघालय, महाराष्ट्र, राजस्थान और तमिलनाडु सहित देश के विभिन्न राज्यों से है।
पुलिस सेवा: एक आजीवन उत्तरदायित्व
डीजीपी श्री मकवाणा ने प्रशिक्षु आईपीएस अधिकारियों का मध्य प्रदेश में हार्दिक स्वागत करते हुए भारतीय पुलिस सेवा में उनके चयन पर बधाई दी और उनके परिवारों को शुभकामनाएं दीं। उन्होंने पुलिस सेवा को केवल एक कर्तव्य नहीं, बल्कि समाज के प्रति आजीवन उत्तरदायित्व बताया। डीजीपी ने इस बात पर जोर दिया कि ईमानदारी और समर्पण के साथ कार्य करने वाले अधिकारी अपने सेवाकाल में जनता के जीवन में सकारात्मक परिवर्तन लाने से सबसे अधिक संतुष्टि प्राप्त करते हैं।
उन्होंने कहा कि आधुनिक समय में पुलिसिंग का स्वरूप तेजी से तकनीक-आधारित हो रहा है, लेकिन इसके साथ ही मूलभूत पुलिसिंग के सिद्धांतों को बनाए रखना अत्यंत आवश्यक है। डीजीपी के अनुसार, प्रभावी कानून व्यवस्था के लिए आधुनिक तकनीक और पारंपरिक पुलिसिंग पद्धतियों का संतुलित एवं सर्वोत्तम उपयोग ही कुंजी है। प्रत्येक अधिकारी को कानून एवं नियमों के अनुरूप निष्पक्ष निर्णय लेने और जनता की शिकायतों को संवेदनशीलता के साथ सुनकर उनका समयबद्ध समाधान सुनिश्चित करने की सलाह दी गई।
नैतिकता और विश्वसनीयता पर बल
श्री मकवाणा ने कहा कि एक अधिकारी की पहचान उसकी नैतिकता, सत्यनिष्ठा और विश्वसनीयता से होती है। उन्होंने इस बात पर ज़ोर दिया कि उच्च नैतिक मूल्यों को आत्मसात करना प्रत्येक पुलिस अधिकारी का प्राथमिक दायित्व है। यह भी रेखांकित किया गया कि व्यक्ति की अच्छी छवि बनाने में वर्षों लग जाते हैं, जबकि एक गलत निर्णय या आचरण उसे पल भर में धूमिल कर सकता है। इसलिए, सेवा के हर चरण में ईमानदारी, अनुशासन और मर्यादित आचरण बनाए रखना अनिवार्य है।
पुलिस महानिदेशक ने स्वीकार किया कि पुलिस सेवा में चुनौतियाँ निरंतर बढ़ती रहेंगी, लेकिन उन्होंने अधिकारियों को प्रत्येक परिस्थिति का सामना धैर्य, विवेक और सकारात्मक दृष्टिकोण से करने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने उत्कृष्ट कार्य करने वाले अधीनस्थों को प्रोत्साहित एवं पुरस्कृत करने और अनुशासनहीनता या गलत कार्यों पर निष्पक्ष कार्रवाई सुनिश्चित करने की आवश्यकता पर बल दिया। डीजीपी के अनुसार, नेतृत्व का सबसे महत्वपूर्ण गुण विश्वास अर्जित करना है, और जब जनता तथा अधीनस्थ अधिकारी आपके निर्णयों और व्यक्तित्व पर भरोसा करते हैं, तभी नेतृत्व प्रभावी सिद्ध होता है।
मध्य प्रदेश पुलिस की परंपराएं और नवाचार
बैठक के दौरान, विशेष पुलिस महानिदेशक (प्रशिक्षण) श्री रवि कुमार गुप्ता ने प्रशिक्षु अधिकारियों का स्वागत किया और मध्य प्रदेश पुलिस की समृद्ध परंपराओं, पेशेवर कार्यशैली एवं प्रशिक्षण व्यवस्था का विस्तृत परिचय दिया। उन्होंने प्रदेश की भौगोलिक, सांस्कृतिक एवं प्रशासनिक विशेषताओं के बारे में जानकारी देते हुए दस्यु उन्मूलन तथा नक्सल समस्या के प्रभावी नियंत्रण में मध्य प्रदेश पुलिस की सफलताओं का उल्लेख किया। श्री गुप्ता ने यह भी बताया कि मध्य प्रदेश पुलिस ने जनभागीदारी आधारित पुलिसिंग के माध्यम से अनेक ऐसे नवाचार किए हैं, जिन्हें राष्ट्रीय स्तर पर सराहना मिली है।
प्रशिक्षु अधिकारियों को मध्य प्रदेश पुलिस द्वारा संचालित जन-जागरूकता अभियानों 'नशे से दूरी है ज़रूरी 2.0' और 'सेफ क्लिक 2.0' पर आधारित वीडियो भी दिखाए गए। इन अभियानों की अवधारणा, उनकी व्यापक जनसहभागिता और सामाजिक प्रभाव के बारे में विस्तृत जानकारी साझा की गई।
जिज्ञासाओं का समाधान
इस अवसर पर, प्रशिक्षु आईपीएस अधिकारियों ने भी अपने-अपने अनुभव साझा किए। कार्यक्रम के दौरान, उन्होंने पुलिसिंग, नेतृत्व, तकनीक आधारित अपराध नियंत्रण, सामुदायिक पुलिसिंग और सेवा संबंधी विभिन्न विषयों पर अपनी जिज्ञासाएं व्यक्त कीं, जिनका डीजीपी और अन्य वरिष्ठ अधिकारियों द्वारा विस्तारपूर्वक समाधान किया गया।
इस महत्वपूर्ण भेंट के अवसर पर उप पुलिस महानिरीक्षक प्रशिक्षण श्री मनीष अग्रवाल, उप निदेशक पुलिस अकादमी भौंरी श्री रामजी श्रीवास्तव, एसओ टू डीजीपी श्री मलय जैन, सहायक पुलिस महानिरीक्षक श्रीमती निमिषा पाण्डेय, श्रीमती अंशुमान अग्रवाल सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारी भी उपस्थित थे।
