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प्रगति की 53वीं बैठक: पीएम मोदी ने ₹30,000 करोड़ की परियोजनाओं पर गुणवत्ता और समयबद्धता पर जोर दिया

प्रगति की 53वीं बैठक में पीएम मोदी ने ₹30,000 करोड़ से अधिक की छह परियोजनाओं की समीक्षा की। उन्होंने गुणवत्ता से समझौता किए बिना समय पर क्रियान्वयन पर विशेष बल दिया।

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प्रगति की 53वीं बैठक: पीएम मोदी ने ₹30,000 करोड़ की परियोजनाओं पर गुणवत्ता और समयबद्धता पर जोर दिया

द क्लिफ न्यूज़ | 26 अगस्त 2026

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सक्रिय शासन और समयबद्ध परियोजना क्रियान्वयन को बढ़ावा देने वाले सूचना और संचार प्रौद्योगिकी (आईसीटी) आधारित बहु-मॉडल प्लेटफॉर्म, प्रगति की 53वीं बैठक की अध्यक्षता की। सेवा तीर्थ में आयोजित इस महत्वपूर्ण बैठक में प्रधानमंत्री ने रेलवे, सड़क और ऊर्जा क्षेत्रों से जुड़ी छह बड़ी बुनियादी ढांचागत परियोजनाओं की विस्तृत समीक्षा की। इन महत्वाकांक्षी परियोजनाओं का विस्तार नौ राज्यों तक फैला हुआ है और इन पर कुल ₹30,000 करोड़ से अधिक का निवेश प्रस्तावित है।

बैठक के दौरान, प्रधानमंत्री ने परियोजनाओं को निर्धारित समय-सीमा के भीतर पूरा करने के साथ-साथ विभिन्न मंत्रालयों, राज्य सरकारों और कार्यान्वयन एजेंसियों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करने पर विशेष बल दिया। उन्होंने इस बात पर प्रकाश डाला कि किसी भी बड़ी बुनियादी ढांचागत परियोजना को केवल अलग-अलग हिस्सों या पैकेजों के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए, बल्कि इसे एक एकीकृत परियोजना के रूप में देखा जाना चाहिए। इससे यह सुनिश्चित होगा कि उसका वास्तविक लाभ समय पर नागरिकों, उद्योगों और व्यापक अर्थव्यवस्था तक पहुंचे।

परियोजनाओं में देरी से लागत और लाभ दोनों प्रभावित

प्रधानमंत्री मोदी ने इस बात पर जोर दिया कि बुनियादी ढांचागत परियोजनाओं में होने वाली देरी का प्रभाव केवल निर्माण लागत में वृद्धि तक ही सीमित नहीं रहता। इससे नागरिकों, व्यवसायों और पूरी अर्थव्यवस्था को मिलने वाले अपेक्षित लाभों में भी अनावश्यक विलंब होता है। इसलिए, यह आवश्यक है कि परियोजनाओं की शुरुआत से लेकर उनके अंतिम पूरा होने और संचालन तक, प्रत्येक चरण की लगातार और प्रभावी निगरानी की जाए।

उन्होंने सभी मंत्रालयों और राज्य सरकारों से 'शुरू से अंत तक' पूरा करने की सोच के साथ आगे बढ़ने का आह्वान किया। प्रधानमंत्री ने समझाया कि यदि किसी परियोजना के अलग-अलग पैकेज समय पर पूरे हो भी जाते हैं, लेकिन यदि कोई महत्वपूर्ण हिस्सा अभी भी लंबित रहता है, तो पूरी परियोजना का लाभ जनता तक नहीं पहुंच पाता। ऐसे अवरोधों की पहचान करना और उन्हें समय रहते दूर करना अत्यंत महत्वपूर्ण है।

सक्रिय कार्य-संस्कृति और प्रभावी समन्वय पर बल

प्रधानमंत्री ने मंत्रालयों और राज्यों में एक ऐसी कार्य-संस्कृति विकसित करने की आवश्यकता बताई, जिसमें अधिकारी और संबंधित एजेंसियां समस्याओं के उत्पन्न होने का इंतजार करने के बजाय, संभावित बाधाओं की पहले से पहचान करें और उनका सक्रिय रूप से समाधान निकालें।

उन्होंने परियोजनाओं के क्रियान्वयन के प्रत्येक स्तर पर अधिक जिम्मेदारी लेने, लंबित मामलों को तेजी से निपटाने और विभिन्न विभागों के बीच सक्रिय और निर्बाध समन्वय सुनिश्चित करने पर जोर दिया। बैठक में यह भी रेखांकित किया गया कि समय-सीमा का पालन, अंतर-विभागीय तालमेल और बाधाओं का त्वरित समाधान परियोजनाओं की सफलता के लिए महत्वपूर्ण कारक हैं।

कॉमन यूटिलिटी कॉरिडोर की संभावनाओं पर विचार

प्रधानमंत्री ने बड़े परिवहन और बुनियादी ढांचागत प्रोजेक्ट्स की योजना बनाते समय, जहां भी संभव हो, कॉमन यूटिलिटी कॉरिडोर विकसित करने की संभावनाओं पर विचार करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि योजना के शुरुआती चरण में ही विभिन्न ढांचागत सेवाओं, जैसे बिजली, पानी, गैस और दूरसंचार के लिए एकीकृत पाइपलाइन बिछाने या गलियारे बनाने की संभावनाओं का गहन अध्ययन किया जाना चाहिए।

उन्होंने मंत्रालयों और राज्य सरकारों को ऐसी एकीकृत व्यवस्थाओं की तकनीकी और आर्थिक व्यवहार्यता का आकलन करने के निर्देश दिए। इसका उद्देश्य भविष्य में अलग-अलग परियोजनाओं के लिए बार-बार जमीन की खुदाई या समान कार्य दोहराने की आवश्यकता को कम करना और उपलब्ध संसाधनों का अधिकतम तथा कुशल उपयोग सुनिश्चित करना है।

गुणवत्ता से समझौता किए बिना गति

प्रधानमंत्री ने स्पष्ट किया कि परियोजनाओं को तेजी से पूरा करना निस्संदेह महत्वपूर्ण है, लेकिन यह कभी भी गुणवत्ता की कीमत पर नहीं होना चाहिए। उन्होंने मंत्रालयों, राज्यों और कार्यान्वयन एजेंसियों से आधुनिक तकनीकों का अधिकाधिक उपयोग बढ़ाने और परियोजना के प्रत्येक चरण में गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए अपनी व्यवस्थाओं को और मजबूत करने को कहा।

उन्होंने निगरानी तंत्र को अधिक प्रभावी बनाने तथा निर्माण और क्रियान्वयन की गुणवत्ता पर निरंतर नजर रखने की आवश्यकता पर भी बल दिया। उनका मुख्य जोर इस बात पर रहा कि समयबद्धता और गुणवत्तापूर्ण निर्माण दोनों को एक साथ लेकर चला जाए, ताकि पूरी होने के बाद परियोजनाएं लंबे समय तक प्रभावी ढंग से अपनी सेवाएं प्रदान कर सकें।

एग्रीस्टैक में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के उपयोग को बढ़ावा

बैठक के दौरान, डिजिटल कृषि मिशन के तहत विकसित किए जा रहे 'एग्रीस्टैक' की भी समीक्षा की गई। प्रधानमंत्री ने कृषि क्षेत्र में उपलब्ध डेटा का अधिक प्रभावी ढंग से उपयोग करने के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) सहित नवीन डिजिटल तकनीकों को अपनाने पर विशेष जोर दिया।

उन्होंने कहा कि कृषि क्षेत्र में डेटा इकोसिस्टम का उपयोग केवल रिकॉर्ड तैयार करने या डेटाबेस बनाने तक सीमित नहीं रहना चाहिए। इसका उपयोग इनपुट प्लानिंग से लेकर उत्पादन, प्रसंस्करण और पूरी कृषि मूल्य श्रृंखला में बेहतर और अधिक सूचित निर्णय लेने के लिए किया जाना चाहिए।

प्रधानमंत्री ने बताया कि डेटा-आधारित व्यवस्था किसानों तक उनकी जरूरत के अनुसार सहायता पहुंचाने, संसाधनों की बेहतर योजना बनाने और कृषि क्षेत्र में अधिक प्रभावी निर्णय लेने में महत्वपूर्ण मदद कर सकती है। उन्होंने एग्रीस्टैक के निर्माण में राज्यों और केंद्र सरकार द्वारा किए जा रहे प्रयासों की सराहना करते हुए, किसानों के बेहतर परिणामों के लिए इसके उपयोग को और मजबूत करने का आह्वान किया।

साइबर धोखाधड़ी और 'डिजिटल अरेस्ट' पर जागरूकता की आवश्यकता

बैठक में साइबर धोखाधड़ी और 'डिजिटल अरेस्ट' जैसी बढ़ती घटनाओं की भी समीक्षा की गई। प्रधानमंत्री ने कहा कि साइबर अपराधों की रोकथाम के लिए केवल कार्रवाई करना ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि प्रशिक्षण, जन-जागरूकता और साइबर सुरक्षा से जुड़ी शिक्षा को लगातार मजबूत करना होगा।

उन्होंने विशेष रूप से बुजुर्गों, युवाओं और समाज के कमजोर वर्गों के बीच निरंतर जागरूकता अभियान चलाने की आवश्यकता बताई। लोगों को साइबर ठगी के सामान्य तरीकों, संदिग्ध गतिविधियों के चेतावनी संकेतों और सुरक्षित डिजिटल व्यवहार के बारे में जानकारी देने पर जोर दिया गया।

प्रधानमंत्री ने साइबर अपराधों से निपटने वाले कर्मचारियों और संबंधित एजेंसियों की क्षमता बढ़ाने के लिए नियमित प्रशिक्षण की आवश्यकता पर भी बल दिया। उन्होंने कहा कि साइबर ठगी के तरीके लगातार बदल रहे हैं, इसलिए कानून-प्रवर्तन और संबंधित कर्मचारियों को नए तौर-तरीकों की पहचान करने तथा उन पर त्वरित कार्रवाई करने के लिए लगातार प्रशिक्षित किया जाना चाहिए।

विकास परियोजनाओं से डिजिटल सुरक्षा तक व्यापक समीक्षा

प्रगति की 53वीं बैठक में एक ओर जहां ₹30,000 करोड़ से अधिक की छह प्रमुख बुनियादी ढांचागत परियोजनाओं की प्रगति पर विस्तृत चर्चा हुई, वहीं दूसरी ओर कृषि क्षेत्र में डिजिटल तकनीक के प्रभावी उपयोग और साइबर अपराधों से नागरिकों की सुरक्षा जैसे अत्यंत महत्वपूर्ण विषयों की भी समीक्षा की गई।

बैठक से यह संदेश स्पष्ट रहा कि सरकार का ध्यान केवल नई परियोजनाएं शुरू करने पर केंद्रित नहीं है, बल्कि उन्हें समय पर, गुणवत्तापूर्ण और समन्वित तरीके से पूरा कर जनता तक उनका वास्तविक लाभ पहुंचाना सर्वोच्च प्राथमिकता है। साथ ही, डिजिटल अर्थव्यवस्था और कृषि जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों में तकनीक के बेहतर उपयोग को बढ़ावा देने और बढ़ते साइबर अपराधों के प्रति नागरिकों को सचेत करने को भी सुशासन की प्राथमिकताओं से जोड़ा गया है।