प्रधानमंत्री को भेंट की राजा किशोर सिंह जूदेव लोधी की प्रतिमा, दमोह में प्रतिमा लोकार्पण का न्योता
दमोह के लोधी कुटुम्ब ने पीएम मोदी को वीर राजा किशोर सिंह जूदेव लोधी की प्रतिमा भेंट की। उन्हें 1857 की क्रांति में उनके योगदान से अवगत कराया।

द क्लिफ न्यूज़ | दमोह | 31 जुलाई 2026
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को आज नई दिल्ली स्थित संसद भवन में वीर योद्धा राजा किशोर सिंह जूदेव लोधी की एक प्रतिमा भेंट की गई। दमोह के हिंडोरिया महदेले लोधी कुटुम्ब के प्रतिनिधियों ने यह सौहार्दपूर्ण भेंट की। इस अवसर पर प्रधानमंत्री को 1857 की क्रांति में राजा किशोर सिंह जूदेव लोधी के ऐतिहासिक योगदान और शौर्य से अवगत कराया गया।
भेंट के दौरान, प्रधानमंत्री को राजा किशोर सिंह जूदेव लोधी के अद्वितीय बलिदान और 1842-1857 के स्वतंत्रता संग्राम में उनके महत्वपूर्ण योगदान के बारे में विस्तृत जानकारी दी गई। प्रतिनिधियों ने श्री मोदी को दमोह में उनके कुटुम्ब द्वारा प्रस्तावित राजा किशोर सिंह जूदेव लोधी की भव्य प्रतिमा के लोकार्पण समारोह में पधारने के लिए सादर आमंत्रित भी किया।
राजा किशोर सिंह जूदेव लोधी: 1857 की क्रांति के वीर योद्धा
राजा किशोर सिंह जूदेव लोधी, हिंडोरिया रियासत के एक वीर शासक थे और उन्हें भारत के प्रथम स्वतंत्रता संग्राम, विशेषकर 1857 की क्रांति के अंतिम महानायकों में गिना जाता है। उन्होंने 1842 में ही क्रांति का बिगुल फूँक दिया था और 1857 के विद्रोह के दौरान भी वे अंग्रेजों के विरुद्ध डटे रहे।
उनके शौर्य और संघर्ष का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि 1857 की क्रांति के दौरान अंग्रेजों ने राजगढ़ी हिंडोरिया को अपनी 8-पाउंड की तोपों से ध्वस्त कर दिया था। इन तोपों के अवशेष आज भी उस ऐतिहासिक संघर्ष की गवाही देते हैं। ब्रिटिश सरकार ने राजा किशोर सिंह लोधी जूदेव को जीवित या मृत पकड़ने वाले के लिए ₹1000 का भारी इनाम घोषित किया था, जो उस समय एक बहुत बड़ी राशि थी।
दमोह का 10 माह तक अंग्रेजी शासन से मुक्ति
राजा किशोर सिंह जूदेव के नेतृत्व में दमोह जिला ने 1857 की क्रांति के दौरान एक महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की थी। यह क्षेत्र लगभग 10 महीनों तक अंग्रेजी शासन से पूर्णतः मुक्त रहा। विशेष रूप से, उन्होंने मध्य प्रदेश के दमोह जिले के कुम्हारी थाने से लगातार साढ़े चार महीने तक विद्रोह का संचालन किया। इतिहासकार इस अवधि को अखंड भारत के स्वतंत्रता संग्राम की एक अनूठी और प्रेरणादायक घटना मानते हैं।
राजा किशोर सिंह जूदेव ने दिसंबर 1858 तक ब्रिटिश सरकार के विरुद्ध अपना संघर्ष जारी रखा। उनकी लड़ाई इतनी प्रभावी थी कि ब्रिटिश सरकार को उनके साथ 10 अगस्त 1858 को एक अंतिम संधि करनी पड़ी। इसी कारण से उन्हें 1857 की क्रांति के उन अंतिम वीर राजाओं में स्मरण किया जाता है जिन्होंने अंग्रेजों से लोहा लेना तब तक जारी रखा जब तक कि संभव था, इस प्रकार वे देशभक्ति और अटूट संकल्प के प्रतीक बने।
