PoK में विधानसभा चुनावों का विरोध, गोलीबारी में 19 की मौत, इंटरनेट बंद
पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (PoK) में विधानसभा चुनावों के बहिष्कार के आह्वान पर हुए प्रदर्शनों के दौरान सुरक्षा बलों की कथित गोलीबारी में कम से कम 19 लोगों की मौत हो गई।

द क्लिफ न्यूज़ | 28 जुलाई 2026
पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (PoK) में आयोजित विधानसभा चुनावों के पहले चरण के दौरान रविवार, 27 जुलाई 2026 को हालात हिंसक हो गए। रावलकोट और मुजफ्फराबाद समेत कई क्षेत्रों में चुनावों के विरोध में प्रदर्शन कर रहे लोगों पर पाकिस्तानी सुरक्षा बलों द्वारा की गई कथित गोलीबारी में कम से कम 19 लोगों की मौत हो गई, जबकि दर्जनों प्रदर्शनकारी घायल बताए जा रहे हैं। इस घटना के बाद पूरे क्षेत्र में तनाव चरम पर पहुंच गया है और सुरक्षा कड़ी कर दी गई है।
स्थानीय नागरिकों ने इन चुनावों को 'दिखावटी' बताते हुए उनका व्यापक बहिष्कार किया। जॉइंट अवामी एक्शन कमेटी (JAAC) के आह्वान पर हजारों लोग मुजफ्फराबाद की ओर लॉन्ग मार्च निकाल रहे थे। प्रदर्शनकारियों की मुख्य मांगें थीं कि उन्हें लोकतांत्रिक अधिकार, अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और बुनियादी नागरिक सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएं। उनका यह भी आरोप है कि चुनाव स्वतंत्र और निष्पक्ष नहीं हैं तथा स्थानीय जनता की वास्तविक राजनीतिक आकांक्षाओं की अनदेखी की जा रही है।
सुरक्षा बलों की कार्रवाई और हताहतों का दावा
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, रावलकोट में सुरक्षा बलों ने निहत्थे प्रदर्शनकारियों को रोकने के लिए पहले लाठीचार्ज और आंसू गैस का इस्तेमाल किया। इसके बाद, जब हालात बिगड़े, तो कथित तौर पर गोलियां चलाई गईं। इस गोलीबारी में कई लोगों की मौके पर ही मौत हो गई और बड़ी संख्या में लोग घायल हो गए। घायलों को स्थानीय अस्पतालों में भर्ती कराया गया है, जहां कई की हालत गंभीर बनी हुई है।
सुरक्षा उपाय और संचार बंदी
हिंसा की घटनाओं के बाद, पूरे पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर में सुरक्षा व्यवस्था को और कड़ा कर दिया गया है। प्रशासन ने एहतियात के तौर पर मोबाइल इंटरनेट सेवाओं और कई संवेदनशील क्षेत्रों में बिजली आपूर्ति को भी बंद कर दिया है। प्रमुख शहरों में अतिरिक्त सुरक्षा बलों की तैनाती की गई है और लोगों की आवाजाही पर भी कड़ी निगरानी रखी जा रही है।
स्थानीय संगठनों का आरोप और प्रशासन की चुप्पी
स्थानीय संगठनों और प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि पाकिस्तान प्रशासन शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शनों को बलपूर्वक दबाने का प्रयास कर रहा है। दूसरी ओर, पाकिस्तानी प्रशासन की ओर से मृतकों और घायलों की संख्या तथा घटना के संबंध में अभी तक कोई विस्तृत आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है।
इस घटना ने पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर में राजनीतिक अधिकारों, लोकतांत्रिक प्रक्रिया और मानवाधिकारों की स्थिति को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। क्षेत्र में तनाव बरकरार है और सुरक्षा एजेंसियां स्थिति पर लगातार नजर बनाए हुए हैं। PoK विधानसभा चुनावों के दूसरे और तीसरे चरण क्रमशः 2 अगस्त और 10 अगस्त 2026 को होने वाले हैं, ऐसे में यह हिंसा आगामी चरणों को भी प्रभावित कर सकती है।
