राजगढ़ में POCSO अदालत का सख्त फैसला: 13 वर्षीय नाबालिग से दुष्कर्म के दोषी 62 वर्षीय आरोपी को आजीवन कारावास
राजगढ़ की विशेष POCSO अदालत ने एक 13 वर्षीय नाबालिग बच्ची के साथ महीनों तक यौन शोषण के मामले में 62 वर्षीय आरोपी को आजीवन...

राजगढ़ की विशेष POCSO अदालत ने एक 13 वर्षीय नाबालिग बच्ची के साथ महीनों तक यौन शोषण के मामले में 62 वर्षीय आरोपी को आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। पीड़िता की गर्भावस्था सामने आने के बाद दर्ज हुए इस मामले में अदालत ने चिकित्सा, फॉरेंसिक और डीएनए साक्ष्यों के आधार पर महज 16 दिनों में सुनवाई पूरी करते हुए दोषसिद्धि की।
मामला कहां और कैसे सामने आया
यह घटना राजगढ़ जिले के करनवास थाना क्षेत्र के एक गांव की है। अभियोजन के अनुसार, 10 मार्च 2025 को जंगल के पास एक नाले के आसपास पहली बार अपराध हुआ। आरोपी गोरधन जाटव (62) उसी गांव का निवासी है। पीड़िता के पिता का तीन वर्ष पहले निधन हो चुका था और मां मानसिक स्वास्थ्य उपचार में हैं। बच्ची बकरियां चराने जाया करती थी, उसी दौरान आरोपी ने वारदातों को अंजाम दिया।
डर और अनभिज्ञता ने बढ़ाई पीड़ा
अदालत में दिए बयान में नाबालिग ने बताया कि पहली घटना से पहले उसे यौन शोषण के बारे में कोई जानकारी नहीं थी। आरोपी ने उसके छोटे भाई को जान से मारने की धमकी दी, जिससे वह भयभीत होकर चुप रही।
उसने यह भी बताया कि घटना के कुछ समय पहले ही उसे मासिक धर्म शुरू हुआ था, जो बाद में बंद हो गया। शरीर में हो रहे बदलावों को वह समझ नहीं पाई और पेट बढ़ने के बावजूद किसी को कुछ नहीं बताया।
गर्भावस्था का खुलासा और कानूनी प्रक्रिया
जब बच्ची की मौसी ने उसके पेट में सूजन देखी और पूछताछ की, तब पूरा मामला सामने आया। मेडिकल जांच में नाबालिग के 26 सप्ताह से अधिक गर्भवती होने की पुष्टि हुई, जो मेडिकल टर्मिनेशन की सामान्य सीमा से आगे था।
पुलिस ने अदालत की अनुमति से मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की इंदौर पीठ से संपर्क किया। कई मेडिकल परीक्षणों और कानूनी प्रक्रियाओं के बाद न्यायिक निगरानी में गर्भ समापन की अनुमति दी गई।
अस्पताल में उपचार और डीएनए साक्ष्य
पीड़िता करीब 21 दिन तक अस्पताल में भर्ती रही। 2 सितंबर को प्रसव हुआ, लेकिन नवजात की 14 घंटे के भीतर मृत्यु हो गई।
नवजात, पीड़िता और आरोपी के डीएनए नमूनों की फॉरेंसिक जांच कराई गई, जिसमें आरोपी के जैविक पिता होने की पुष्टि हुई। इसके बाद चालान पेश किया गया और मामला फास्ट ट्रैक पर चला।
पुलिस और प्रशासन की भूमिका
करनवास थाना प्रभारी करमवीर सिंह ने बताया कि मामला सामने आते ही FIR दर्ज कर आरोपी को अगले ही दिन जंगलों से गिरफ्तार कर लिया गया।
राजगढ़ के पुलिस अधीक्षक अमित तोलानी ने इसे जघन्य अपराध की श्रेणी में रखते हुए जांच की सतत निगरानी की। पुलिस अधिकारियों के अनुसार, वरिष्ठ स्तर पर समन्वय के कारण 16 दिनों में सुनवाई पूरी हो सकी।
क्यों अहम है यह फैसला
यह निर्णय न केवल पीड़िता के लिए न्याय का संदेश है, बल्कि यह भी दर्शाता है कि POCSO कानून के तहत बच्चों के खिलाफ अपराधों में त्वरित और सख्त कार्रवाई संभव है। विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे फैसले समाज में निवारक प्रभाव डालते हैं और पीड़ितों को न्याय प्रणाली पर भरोसा दिलाते हैं।
आगे का रास्ता
अदालत के आदेश के बाद प्रशासन ने पीड़िता के स्वास्थ्य, पुनर्वास और काउंसलिंग पर ध्यान केंद्रित करने की बात कही है, ताकि वह इस आघात से उबरकर सामान्य जीवन की ओर लौट सके।
