संबित पात्रा ने PM के विदेश दौरों पर कांग्रेस को घेरा, परमाणु समझौते की उपलब्धियां गिनाईं
BJP प्रवक्ता संबित पात्रा ने PM मोदी के विदेश दौरों पर कांग्रेस के आरोपों का जवाब दिया और परमाणु समझौतों में भारत की जीतें बताईं।

शीर्ष सारांश
क्या हुआ: बीजेपी प्रवक्ता संबित पात्रा ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विदेशी दौरों को लेकर कांग्रेस के आरोपों पर जवाब दिया और परमाणु सहयोग समझौतों में भारत की उपलब्धियों पर प्रकाश डाला।
क्यों महत्वपूर्ण है: यह आदान-प्रदान भारत की विदेश नीति और अंतरराष्ट्रीय समझौतों पर अलग-अलग विचारों को उजागर करता है।
क्या बदलाव: इस चर्चा का उद्देश्य जनता को सरकार की विदेश नीति की सफलताओं के बारे में सूचित करना और श्रेय लेने के दावों का खंडन करना है।
कौन प्रभावित है: भारत के अंतरराष्ट्रीय संबंधों पर जनता और राजनीतिक विमर्श प्रभावित होते हैं।
पात्रा ने PM की विदेश नीति का किया बचाव
भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के राष्ट्रीय प्रवक्ता संबित पात्रा ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की इंडोनेशिया, ऑस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड की हालिया यात्राओं को लेकर कांग्रेस पार्टी के आरोपों पर कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त की है। पात्रा ने इन यात्राओं को भारत की वैश्विक कूटनीति के लिए ऐतिहासिक और दूरदर्शी कदम बताया।
परमाणु समझौता: UPA बनाम मोदी सरकार
एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में, पात्रा ने विशेष रूप से भारत-ऑस्ट्रेलिया असैन्य परमाणु सहयोग समझौते को लेकर कांग्रेस के दावों का खंडन किया। उन्होंने दावा किया कि जनता को तथ्यों के साथ गुमराह किया जा रहा है और इस समझौते का श्रेय पिछली UPA सरकार को नहीं जाता है।
पात्रा ने कहा कि UPA सरकार के कार्यकाल के दौरान, 2010 में ऑस्ट्रेलिया ने स्पष्ट रूप से भारत को यूरेनियम बेचने से इनकार कर दिया था। इसका मतलब था कि उस समय दोनों देशों के बीच परमाणु सहयोग पर कोई खास प्रगति नहीं हुई थी।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में 2014 में नई सरकार के गठन के बाद, पात्रा ने समझाया कि भारत की विदेश नीति में एक निर्णायक बदलाव आया। उन्होंने तर्क दिया कि इस नेतृत्व ने ऑस्ट्रेलिया के साथ ऐतिहासिक असैन्य परमाणु सहयोग समझौते पर हस्ताक्षर करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि इस समझौते ने दोनों देशों के बीच रणनीतिक विश्वास को बढ़ाया और भारत को यूरेनियम की आपूर्ति का मार्ग प्रशस्त किया।
व्यापक राजनयिक लक्ष्य
भाजपा प्रवक्ता ने आगे विस्तार से बताया कि प्रधानमंत्री मोदी की हालिया यात्रा केवल औपचारिक नहीं थी। इसका उद्देश्य इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में भारत की रणनीतिक भूमिका को मजबूत करना और मित्र देशों के साथ दीर्घकालिक सहयोग के लिए एक नया मार्ग तैयार करना था। यात्रा के दौरान हुई चर्चाओं में व्यापार, निवेश, रक्षा, समुद्री सुरक्षा, स्वच्छ ऊर्जा, डिजिटल प्रौद्योगिकी, शिक्षा और नवाचार सहित कई क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर बात हुई।
भारत की वैश्विक स्थिति
पात्रा ने आत्मविश्वास से कहा कि भारत अब दुनिया के मंच पर अधिक मुखरता से अपनी स्थिति मजबूत कर रहा है। कई देश भारत को एक विश्वसनीय रणनीतिक भागीदार के रूप में देखते हैं। उन्होंने नोट किया कि प्रधानमंत्री मोदी की विदेशी यात्राओं का उद्देश्य केवल द्विपक्षीय संबंधों को मजबूत करना नहीं है, बल्कि भारत के आर्थिक, रणनीतिक और वैश्विक हितों को आगे बढ़ाना भी है।
कांग्रेस पर भ्रम फैलाने का आरोप
पात्रा ने कांग्रेस पार्टी पर विदेश नीति के मामलों पर लगातार भ्रम पैदा करने की कोशिश करने का आरोप लगाया। उन्होंने बताया कि जिन क्षेत्रों में कांग्रेस अब श्रेय चाहती है, उनके शासनकाल में कोई खास उपलब्धि हासिल नहीं हुई थी। इसके विपरीत, पात्रा ने दावा किया कि मोदी सरकार ने भारत की विदेश नीति को परिणाम-उन्मुख बनाया है। इस दृष्टिकोण से विभिन्न अंतरराष्ट्रीय समझौतों और साझेदारियों के माध्यम से देश को लाभ हुआ है।
लोकतांत्रिक संबंधों को मजबूत करना
प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में, प्रमुख लोकतांत्रिक देशों के साथ भारत के संबंध काफी मजबूत हुए हैं। ऊर्जा सुरक्षा, रक्षा सहयोग, आपूर्ति श्रृंखला, महत्वपूर्ण खनिज, समुद्री सुरक्षा और तकनीकी नवाचार जैसे क्षेत्रों में भारत की भागीदारी बढ़ रही है। पात्रा ने दावा किया कि हाल की विदेशी यात्रा इस व्यापक रणनीति का हिस्सा है, जिसका उद्देश्य भारत की वैश्विक प्रतिष्ठा और राष्ट्रीय हितों को बढ़ावा देना है।
वैश्विक नेतृत्व पर ध्यान
प्रेस कॉन्फ्रेंस का समापन करते हुए, संबित पात्रा ने दोहराया कि प्रधानमंत्री मोदी की विदेश नीति का मुख्य ध्यान भारत को वैश्विक नेतृत्व की भूमिका में स्थापित करना है। उन्होंने कांग्रेस को तथ्यों के आधार पर राजनीति करने की सलाह दी, यह कहते हुए कि जनता विकास, राष्ट्रीय सुरक्षा और मजबूत वैश्विक संबंधों पर केंद्रित राजनीति को समझती है।
