पिथौरा में भालू का हमला: दो ग्रामीण घायल, क्षेत्र में दहशत
महासमुंद जिले के पिथौरा क्षेत्र के धामनपुरा में भालू ने दो ग्रामीणों पर हमला कर दिया, जिससे दोनों घायल हो गए। घटना के बाद से स्थानीय लोगों में भय का माहौल है और वन विभाग से सुरक्षा की गुहार लगाई जा रही है।

द क्लिफ न्यूज़ | महासमुंद | 16 अगस्त 2026
छत्तीसगढ़ के महासमुंद जिले के पिथौरा क्षेत्र में उस वक्त दहशत फैल गई जब एक भालू ने अचानक दो ग्रामीणों पर हमला कर दिया। इस हमले में दोनों ग्रामीण गंभीर रूप से घायल हो गए। घटना के बाद से इलाके में भय का माहौल है और स्थानीय लोग अपनी सुरक्षा को लेकर चिंतित हैं।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, पिथौरा के धामनपुरा क्षेत्र में विचरण कर रहे एक भालू ने अचानक हेमसागर बरीहा (55 वर्ष) और रूपेश (35 वर्ष) नामक दो ग्रामीणों पर हमला बोल दिया। भालू के अचानक हमले से ग्रामीण संभल नहीं पाए और घायल हो गए।
घायलों का इलाज जारी, ग्रामीणों में भय
हमले के तुरंत बाद, दोनों घायल ग्रामीणों को पिथौरा के शासकीय अस्पताल ले जाया गया, जहाँ उनका इलाज चल रहा है। घटना की खबर फैलते ही आसपास के गांवों में भी भय और चिंता का माहौल व्याप्त हो गया है। ग्रामीणों का कहना है कि पिछले कुछ समय से इस क्षेत्र में वन्यजीवों की आवाजाही बढ़ गई थी, जिस पर उन्होंने पहले भी चिंता व्यक्त की थी। भालू के हमले की इस घटना ने उनकी आशंकाओं को और पुष्ट कर दिया है।
वन विभाग से सुरक्षा की मांग
स्थानीय लोगों ने वन विभाग से इस मामले में तत्काल कार्रवाई करने और क्षेत्र में निगरानी बढ़ाने की मांग की है। ग्रामीणों का कहना है कि भालू की गतिविधियों पर कड़ी नजर रखी जाए और ग्रामीणों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए प्रभावी कदम उठाए जाएं। विशेष रूप से उन रास्तों और इलाकों में गश्त बढ़ाने का आग्रह किया गया है, जहाँ से वन्यजीवों के आबादी वाले क्षेत्रों में प्रवेश करने की आशंका बनी रहती है।
ग्रामीणों ने वन विभाग से अपील की है कि वे लोगों को वन्यजीवों से सुरक्षित रहने के तरीकों के बारे में जागरूक करें। साथ ही, वन विभाग की टीम द्वारा प्रभावित क्षेत्र का विस्तृत निरीक्षण कर भालू की मौजूदगी और उसके व्यवहार का पता लगाया जाना आवश्यक है। लोगों को इस बात की भी चिंता सता रही है कि कहीं भालू दोबारा आबादी वाले इलाकों में न पहुँच जाए। इसके मद्देनजर, वन विभाग से गश्त बढ़ाने और यदि आवश्यक हो तो वन्यजीव को सुरक्षित तरीके से उसके प्राकृतिक आवास में वापस भेजने की व्यवस्था करने की भी मांग की गई है।
