पीओके पर एनसी सांसद के बयान से गरमाई सियासत, भाजपा ने किया कड़ा पलटवार
नेशनल कॉन्फ्रेंस के सांसद चौधरी मोहम्मद रमजान के पीओके को 'अलग देश' कहने वाले बयान पर भाजपा ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। पार्टी ने इसे भारत की आधिकारिक नीति के विपरीत बताया है।

द क्लिफ न्यूज़ | नई दिल्ली | 6 अगस्त 2026
पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (पीओके) को लेकर नेशनल कॉन्फ्रेंस (एनसी) के सांसद चौधरी मोहम्मद रमजान के एक बयान ने देश की राजनीति में नया विवाद खड़ा कर दिया है। अनुच्छेद 370 हटाए जाने के सात वर्ष पूरे होने के अवसर पर, सांसद रमजान ने कहा कि “हमें पीओके की परवाह नहीं है। वह एक अलग देश है, दूसरे देश का हिस्सा है। उसके मामलों को पाकिस्तान सरकार देखेगी।” उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि वे पीओके के लोगों की समस्याओं पर इसलिए टिप्पणी नहीं करेंगे क्योंकि वहां के लोगों ने उन्हें भारतीय संसद में नहीं भेजा है।
सांसद के इस बयान के तुरंत बाद राजनीतिक गलियारों में तीखी प्रतिक्रियाओं का दौर शुरू हो गया। भारत सरकार और संसद लगातार पीओके को जम्मू-कश्मीर का अभिन्न अंग मानते रहे हैं। ऐसे में, एनसी सांसद के बयान को राष्ट्रीय नीति और संसद के संकल्प के विपरीत माना जा रहा है।
भाजपा का तीखा पलटवार, राष्ट्रीय हितों को प्राथमिकता देने पर जोर
नेशनल कॉन्फ्रेंस सांसद के बयान पर भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने कड़ा पलटवार किया है। भाजपा के वरिष्ठ नेता रविंदर रैना ने इस बयान को भारत की संप्रभुता पर हमला बताते हुए कहा कि पीओके भारत का अविभाज्य अंग है और उसे वापस लेने के लिए भारत को किसी की अनुमति की आवश्यकता नहीं है। रैना ने आरोप लगाया कि नेशनल कॉन्फ्रेंस के कुछ नेताओं के ऐसे बयान पाकिस्तान के दुष्प्रचार को बढ़ावा देते हैं और ये देश के राष्ट्रीय हितों के अनुरूप नहीं हैं। उन्होंने इस बात पर भी जोर दिया कि भारतीय संसद ने सर्वसम्मति से यह संकल्प लिया है कि पूरा जम्मू-कश्मीर, जिसमें पीओके भी शामिल है, भारत का अभिन्न अंग है।
फारूक अब्दुल्ला की संघीय ढांचे पर चिंता, राज्य का दर्जा बहाल करने की मांग
इसी बीच, नेशनल कॉन्फ्रेंस के अध्यक्ष और जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री फारूक अब्दुल्ला ने अनुच्छेद 370 हटाए जाने और राज्य के पुनर्गठन पर सवाल उठाते हुए चिंता व्यक्त की है। उन्होंने कहा कि जम्मू-कश्मीर को राज्य का दर्जा छीनकर केंद्र शासित प्रदेश में बदलना संघीय ढांचे की भावना के पूर्णतः विपरीत था। अब्दुल्ला ने आशंका जताई कि यदि इस तरह की प्रवृत्ति जारी रही, तो भविष्य में अन्य राज्यों के साथ भी ऐसा ही किया जा सकता है। उन्होंने जम्मू-कश्मीर को पुनः पूर्ण राज्य का दर्जा देने की अपनी पुरानी मांग को दोहराया।
पीओके में जारी विरोध प्रदर्शन और भारत का रुख
दूसरी ओर, पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर में आंतरिक विरोध प्रदर्शनों का दौर जारी है। वहां के लोगों द्वारा महंगाई, पाकिस्तान की प्रशासनिक नीतियों और चुनावों को लेकर व्यापक असंतोष व्यक्त किया जा रहा है। संयुक्त अवामी एक्शन कमेटी (JAAC) के नेतृत्व में चल रहे इन प्रदर्शनों के दौरान सुरक्षा बलों की कथित कार्रवाई, इंटरनेट सेवाओं पर प्रतिबंध और आम नागरिकों के हताहत होने के गंभीर आरोप भी सामने आए हैं।
भारत सरकार ने हाल ही में पीओके में पाकिस्तान द्वारा कराए गए स्थानीय चुनावों को भी “पूरी तरह दिखावा” करार दिया था। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने इस पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा था कि यह चुनावी प्रक्रिया उस क्षेत्र की वास्तविक स्थिति को छिपाने में असमर्थ है, जहाँ जनता लगातार विरोध प्रदर्शन कर रही है और पाकिस्तान की सरकार दमनकारी कार्रवाई कर रही है। जायसवाल ने यह भी रेखांकित किया कि पाकिस्तान अवैध कब्जे के तहत उन क्षेत्रों के लोगों के अधिकारों का हनन कर रहा है, जिन पर उसका नियंत्रण है। उनका वक्तव्य भारत के उस निरंतर रुख को दर्शाता है कि पीओके भारत का अभिन्न अंग है और पाकिस्तान द्वारा वहां की गई कोई भी कार्रवाई अवैध है।
महबूबा मुफ्ती की भी चिंता, शांति और आत्मनिर्णय की आकांक्षा
जम्मू-कश्मीर की पूर्व मुख्यमंत्री और पीपल्स डेमोक्रेटिक पार्टी (पीडीपी) की नेता महबूबा मुफ्ती ने भी पीओके के हालातों पर चिंता व्यक्त की है। उन्होंने कहा कि नियंत्रण रेखा के उस पार रहने वाले लोगों की भी शांति, सम्मान और अपने भविष्य का निर्णय करने की समान आकांक्षाएं हैं। मुफ्ती ने प्रतिनिधि संस्थाओं को कमजोर किए जाने पर भी सवाल उठाए और कहा कि ऐसे कदम वहां की समस्याओं को और बढ़ा सकते हैं। उनके इस बयान ने पीओके के निवासियों की भावनाओं को समझने और क्षेत्र में मानव अधिकारों के प्रति संवेदनशीलता की आवश्यकता पर प्रकाश डाला है।
एनसी सांसद के बयान और भाजपा की त्वरित प्रतिक्रिया के बाद, पीओके का मुद्दा एक बार फिर राष्ट्रीय राजनीति के केंद्र में आ गया है। यह घटनाक्रम भारत के आंतरिक राजनीतिक विमर्श के साथ-साथ अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी ध्यान आकर्षित कर रहा है। यह विवाद इस बात पर प्रकाश डालता है कि जम्मू-कश्मीर और उसके कब्जे वाले क्षेत्रों को लेकर भारत की राष्ट्रीय सहमति कितनी महत्वपूर्ण है। फिलहाल, नेशनल कॉन्फ्रेंस नेतृत्व की ओर से सांसद चौधरी मोहम्मद रमजान के बयान पर कोई आधिकारिक स्पष्टीकरण जारी नहीं किया गया है, जिससे राजनीतिक अटकलें जारी हैं और यह मामला और भी गरमाता दिख रहा है। इस बीच, पीओके में स्थितियां जटिल बनी हुई हैं, जहाँ राजनीतिक अशांति और विरोध प्रदर्शन जारी हैं, जो क्षेत्र की स्थायी अस्थिरता को दर्शाते हैं।
