पीएनबी की करेंसी चेस्ट में 17 करोड़ के नकली नोट, 3 अधिकारी निलंबित
सहारनपुर में पीएनबी की करेंसी चेस्ट से 17 करोड़ के नकली नोट मिले। इस मामले में तीन वरिष्ठ अधिकारियों को निलंबित किया गया है और एफआईआर दर्ज की गई है।

द क्लिफ न्यूज़ | सहारनपुर | 2 सितंबर 2026
पंजाब नेशनल बैंक (पीएनबी) की सहारनपुर स्थित करेंसी चेस्ट में लगभग 17 करोड़ रुपये के नकली नोटों का मामला सामने आने के बाद बैंकिंग जगत में हलचल मच गई है। इस गंभीर वित्तीय गड़बड़ी के खुलासे के बाद बैंक के तीन वरिष्ठ अधिकारियों को निलंबित कर दिया गया है और उनके खिलाफ FIR दर्ज की गई है। एक पार्ट-टाइम हाउसकीपर के खिलाफ चोरी का अलग मामला दर्ज किया गया है। मामले की तह तक जाने के लिए एक विशेष जांच दल (SIT) का गठन किया गया है।
यह पूरा मामला तब प्रकाश में आया जब सहारनपुर की सोफिया मार्केट शाखा से भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के जयपुर कार्यालय के लिए लगभग 11.50 करोड़ रुपये की नकदी भेजी गई। आरबीआई में नकदी की गिनती के दौरान 4.30 लाख रुपये से अधिक की कमी पाई गई। इस अंतर के बाद बैंक स्तर पर आंतरिक जांच शुरू की गई।
सीसीटीवी फुटेज से सामने आई भूमिका, ऑडिट में हुआ खुलासा
मेरठ से आए मुख्य प्रबंधक अरुण कुमार चौबे ने जब सीसीटीवी फुटेज खंगाला, तो पार्ट-टाइम हाउसकीपर विशाल कुमार को कथित तौर पर नोटों की गड्डियों से रकम निकालते हुए देखा गया। इसके बाद 9 अगस्त से बैंक का विस्तृत ऑडिट शुरू कराया गया। जैसे-जैसे ऑडिट आगे बढ़ा, करेंसी चेस्ट में रखी बड़ी मात्रा में नकदी को लेकर गंभीर अनियमितताएं सामने आने लगीं।
जांच में यह बात सामने आई कि नोटों की गड्डियों के ऊपर और नीचे असली नोट रखे गए थे, जबकि बीच में नकली नोट भरे गए थे। इस तरह से नकली नोटों की गड्डियों को पहली नजर में असली नोटों की गड्डी जैसा दिखाने का प्रयास किया गया था। इस चौंकाने वाले खुलासे ने बैंक की आंतरिक सुरक्षा और करेंसी चेस्ट की निगरानी व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
आंतरिक सुरक्षा और निगरानी पर उठे सवाल
इस घटना ने कई महत्वपूर्ण सवाल खड़े कर दिए हैं। सबसे बड़ा प्रश्न यह है कि इतनी बड़ी मात्रा में नकली नोट करेंसी चेस्ट तक कैसे पहुंचे और नियमित जांच के दौरान लंबे समय तक इनकी पहचान क्यों नहीं हो सकी। यह आशंका भी जांच का एक अहम हिस्सा है कि नकली नोटों को असली नोटों से बदलने की प्रक्रिया एक बार में हुई या यह काम लंबे समय से धीरे-धीरे किया जा रहा था।
यदि यह प्रक्रिया लंबे समय से चल रही थी, तो कितने कर्मचारियों या अन्य लोगों को इसकी जानकारी थी, इसकी भी गहन जांच की आवश्यकता होगी। एक अन्य महत्वपूर्ण सवाल करेंसी चेस्ट में नकदी के मिलान और ऑडिट की प्रक्रिया को लेकर है। इतनी बड़ी राशि में असली और नकली नोटों के बीच का अंतर नियमित सत्यापन के दौरान सामने क्यों नहीं आया, यह भी जांच एजेंसियों के लिए एक महत्वपूर्ण बिंदु है।
नकली नोटों की आपूर्ति और नेटवर्क की होगी पड़ताल
जांच इस पहलू पर भी केंद्रित हो सकती है कि नकली नोटों की आपूर्ति कहां से हुई और क्या इन्हें किसी संगठित नेटवर्क के जरिए करेंसी चेस्ट तक पहुंचाया गया था। हालांकि, इन आशंकाओं की पुष्टि जांच पूरी होने के बाद ही हो सकेगी। बैंक प्रबंधन का कहना है कि संदिग्ध नकली नोट आम जनता या किसी अन्य शाखा में प्रसारित नहीं हुए और वे बैंक के खजाने में ही मौजूद थे। इसके बावजूद, जांच एजेंसियां यह सुनिश्चित करने में जुटी हैं कि करेंसी चेस्ट से किसी भी स्तर पर नकली नोट बाहर तो नहीं गए।
ऑडिट पूरा होने तक रकम के आंकड़े में बढ़ोतरी की संभावना से भी इनकार नहीं किया जा रहा है। ऐसे में, यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि जांच केवल 17 करोड़ रुपये के कथित नोट बदलने तक सीमित रहती है या इससे कहीं बड़ा वित्तीय खेल सामने आता है। फिलहाल, तीन वरिष्ठ अधिकारियों के निलंबन, FIR और हाउसकीपर के खिलाफ कार्रवाई के बाद बैंक के रिकॉर्ड, सीसीटीवी फुटेज, नकदी के आवागमन और करेंसी चेस्ट की पुरानी ऑडिट रिपोर्ट की गहन जांच की जा रही है। मामले में दोषियों की भूमिका और पूरे नेटवर्क का खुलासा SIT की जांच पूरी होने के बाद ही संभव हो पाएगा।
