पीड़ित परिवार से दुर्व्यवहार पर जहानगंज थानाध्यक्ष निलंबित
फर्रुखाबाद में बालक की हत्या के मामले में न्याय मांगने गए परिवार से कथित दुर्व्यवहार के आरोप में जहानगंज थानाध्यक्ष पूनम अवस्थी को निलंबित किया...

फर्रुखाबाद | संवाददाता: संदीप तिवारी
द क्लिफ न्यूज़ | फर्रुखाबाद | 17 सितंबर 2026
फर्रुखाबाद के जहानगंज थाना क्षेत्र में नौ महीने पूर्व हुए एक बालक की अपहरण और हत्या के मामले में न्याय की गुहार लगा रहे पीड़ित परिवार के साथ कथित दुर्व्यवहार के आरोप में जहानगंज की थानाध्यक्ष पूनम अवस्थी को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है। इस घटना के बाद से पुलिस महकमे में हड़कंप मचा हुआ है।
कोरीखेड़ा गांव निवासी चंद्र प्रकाश गुप्ता के दस वर्षीय पुत्र आशुतोष गुप्ता का गत 10 दिसंबर 2025 को अपहरण कर लिया गया था। चार दिन बाद उसका शव बरामद हुआ था। मृतक की मां पूनम गुप्ता की तहरीर पर इस मामले में ग्यारह लोगों के खिलाफ प्राथमिकी भी दर्ज की गई थी, लेकिन नौ महीने बीत जाने के बाद भी मामले का खुलासा नहीं हो सका था।
मुख्यमंत्री की जनसभा में जाने से रोके जाने का आरोप
मामला तब तूल पकड़ गया जब तीन सितंबर को पीड़ित परिवार को पुलिस लाइन में आयोजित मुख्यमंत्री की जनसभा में जाने से रोका गया। आरोप है कि जहानगंज पुलिस ने गांव पहुंचकर परिजनों को उनके घर में ही कैद कर दिया और विरोध करने पर उनके साथ धक्का-मुक्की और मारपीट की। परिजनों का यह भी आरोप है कि पुलिसकर्मियों ने मोबाइल से घटना का वीडियो डेटा डिलीट करने का भी प्रयास किया। इस घटना से जुड़ा एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद मामले ने तूल पकड़ लिया और प्रशासनिक महकमे में खलबली मच गई।
उच्च अधिकारियों से की गई थी शिकायत
न्याय की आस में बालक की बहन अंशिका गुप्ता और चाचा रामजीत ने दस सितंबर को लखनऊ पहुंचकर उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य से मुलाकात कर निष्पक्ष जांच की गुहार लगाई थी। इससे पूर्व भी परिजनों ने पुलिस उपमहानिरीक्षक (डीआईजी) और अन्य वरिष्ठ अधिकारियों से मामले की निष्पक्ष जांच की मांग करते हुए न्याय की उम्मीद जताई थी।
तत्काल कार्रवाई की मांग
मामले की गंभीरता को देखते हुए तथा वायरल वीडियो और पीड़ित परिवार की शिकायत पर संज्ञान लेते हुए पुलिस अधीक्षक आरती सिंह ने प्रारंभिक जांच के आधार पर थानाध्यक्ष पूनम अवस्थी के विरुद्ध यह कड़ी कार्रवाई की है। इस निलंबन के बाद से जिले के पुलिस अधिकारियों में अनावश्यक सख्ती या पीड़ित पक्ष के प्रति असंवेदनशील व्यवहार को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं। पीड़ित परिवार अब इस उम्मीद में है कि इस कार्रवाई के बाद उनके प्रकरण का सफल खुलासा होगा और उन्हें न्याय मिलेगा।
