पिछड़े समाज की अनदेखी से आहत पूर्व सांसद ने छोड़ी भाजपा, बरेली की राजनीति में हलचल
बरेली: पूर्व सांसद धर्मेंद्र कश्यप ने भाजपा की सदस्यता से इस्तीफा दिया। उन्होंने पार्टी पर पिछड़े समाज को सम्मान न देने और भीतरघात करने वालों...

बरेली उत्तर प्रदेश | संवाददाता: इज़हार आलम
द क्लिफ न्यूज़ | बरेली | 9 अक्टूबर 2026
भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) को एक बड़ा झटका लगा है, जब पार्टी के पूर्व सांसद धर्मेंद्र कश्यप ने पिछड़े और अति-पिछड़े समाज को उचित सम्मान न मिलने का गंभीर आरोप लगाते हुए पार्टी की प्राथमिक और सक्रिय सदस्यता से इस्तीफा दे दिया है। उन्होंने अपना त्यागपत्र सोशल मीडिया पर साझा करते हुए पार्टी के राष्ट्रीय, प्रदेश, क्षेत्रीय और जिला नेतृत्व से इसे स्वीकार करने की अपील की है।
कश्यप ने अपने इस्तीफे में स्पष्ट रूप से कहा है कि लोकसभा चुनाव के दौरान भीतरघात करने वाले और संगठन के खिलाफ काम करने वाले नेताओं को लगातार प्राथमिकता दी जा रही है। उनका आरोप है कि जो लोग पार्टी को कमजोर करने का प्रयास कर रहे थे, उन्हें ही संगठन में अग्रिम पंक्ति में स्थान मिल रहा है। इस स्थिति से वे काफी आहत हैं और उन्होंने पार्टी की कार्यप्रणाली पर ही सवाल खड़े कर दिए हैं।
पार्टी संगठन में भीतरघात करने वाले नेताओं को प्राथमिकता
पूर्व सांसद धर्मेंद्र कश्यप ने अपने इस्तीफे के माध्यम से पार्टी संगठन के भीतर चल रही कार्यप्रणाली पर गहरी आपत्ति जताई है। उन्होंने विशेष रूप से उन नेताओं पर निशाना साधा है जिन्होंने हालिया लोकसभा चुनाव के दौरान पार्टी विरोधी गतिविधियों में संलिप्तता दिखाई थी। कश्यप का आरोप है कि ऐसे नेताओं को न केवल नजरअंदाज करने के बजाय, उन्हें संगठन में महत्वपूर्ण पदों पर प्राथमिकता दी जा रही है। यह स्थिति उन कार्यकर्ताओं के मनोबल को गिराने वाली है जो वर्षों से पार्टी के लिए निष्ठापूर्वक कार्य कर रहे हैं।
कश्यप के अनुसार, पिछड़े और अति-पिछड़े समाज को प्रतिनिधित्व और सम्मान न मिलने की शिकायतें लंबे समय से की जा रही थीं, लेकिन उन पर कोई ध्यान नहीं दिया गया। इसके विपरीत, जो लोग पार्टी की जड़ों को कमजोर करने में लगे थे, उन्हें पुरस्कृत किया जा रहा है। इस प्रकार के फैसलों से कश्यप स्वयं आहत हैं और उन्होंने इसे पार्टी के मूल सिद्धांतों के खिलाफ माना है। यह स्थिति पार्टी के भीतर एक गंभीर असंतोष का संकेत देती है।
बरेली की राजनीति में नए समीकरण
पूर्व सांसद धर्मेंद्र कश्यप के इस कदम को बरेली के राजनीतिक परिदृश्य में एक महत्वपूर्ण घटनाक्रम माना जा रहा है। उनके द्वारा उठाए गए प्रश्नों ने पार्टी के भीतर नेताओं की निष्ठा और सामाजिक प्रतिनिधित्व जैसे अहम मुद्दों को चर्चा के केंद्र में ला दिया है। इस इस्तीफे से स्थानीय राजनीति में नई हलचल मच गई है और नए राजनीतिक समीकरण बनने की प्रबल संभावना जताई जा रही है।
फिलहाल, भारतीय जनता पार्टी के शीर्ष नेतृत्व की ओर से इस इस्तीफे पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है। सभी की निगाहें अब इस बात पर टिकी हैं कि क्या पार्टी नेतृत्व कश्यप के आरोपों पर संज्ञान लेता है अथवा इस मामले में कोई बातचीत या समझौते की पहल की जाती है। उनके इस निर्णय ने जिले की सक्रिय राजनीति में नई बेचैनी पैदा कर दी है। यह देखना दिलचस्प होगा कि कश्यप आगे क्या कदम उठाते हैं और उनके समर्थक इस पर कैसी प्रतिक्रिया देते हैं। यह घटनाक्रम बरेली की राजनीतिक दशा और दिशा को प्रभावित कर सकता है।
