फिरोज पप्पू हत्याकांड: पूर्व सांसद, बेटी व दामाद बरी; दो अन्य दोषी करार
बलरामपुर की एमपी-एमएलए कोर्ट ने सपा नेता फिरोज पप्पू हत्याकांड में पूर्व सांसद रिजवान जहीर, उनकी बेटी जेबा और दामाद रमीज को दोषमुक्त करार दिया है। दो अन्य आरोपियों को दोषी पाया गया है, जिनकी सजा पर मंगलवार को फैसला आएगा।

द क्लिफ न्यूज़ | बलरामपुर | 7 अगस्त 2026
बलरामपुर की विशेष एमपी-एमएलए कोर्ट ने समाजवादी पार्टी के नेता एवं पूर्व नगर पंचायत अध्यक्ष फिरोज अहमद उर्फ पप्पू की हत्या के मामले में एक महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। शुक्रवार शाम को कोर्ट ने पूर्व सांसद रिजवान जहीर, उनकी बेटी जेबा रिजवान और दामाद रमीज को इस हत्याकांड में दोषमुक्त कर दिया है। हालांकि, दो अन्य आरोपियों मेराज उल हक उर्फ मामा और महफूज को हत्या का दोषी ठहराया गया है। इन दोनों की सज़ा पर फैसला आगामी मंगलवार को सुनाया जाएगा। यह बहुचर्चित हत्याकांड जनवरी 2022 में हुआ था, जिसमें कुल छह लोगों को आरोपी बनाया गया था, जिनमें से एक की सुनवाई के दौरान मृत्यु हो चुकी है।
फैसले की घोषणा के साथ ही कोर्ट परिसर में हलचल तेज हो गई थी। सुरक्षा व्यवस्था के कड़े इंतजाम किए गए थे और कोर्ट को पुलिस छावनी में तब्दील कर दिया गया था। फैसले के बाद, कोर्ट परिसर में मौजूद लोगों ने पूर्व सांसद रिजवान जहीर को गले लगाकर अपनी शुभकामनाएं व्यक्त कीं। कोर्ट से बाहर निकलते हुए पूर्व सांसद रिजवान जहीर ने कहा कि उन पर झूठा कलंक लगाया गया था, लेकिन आज उन्हें न्याय मिला है। उनकी बेटी जेबा ने भी कहा कि वे चार साल से यही बात कहते आ रहे थे कि वे निर्दोष हैं और आज सच की जीत हुई है।
चार साल पहले सरेराह हुई थी हत्या
यह हत्याकांड 4 जनवरी 2022 की रात को हुआ था। समाजवादी पार्टी के नेता फिरोज पप्पू तुलसीपुर नगर के जरवा रोड पर स्थित एक पान की दुकान पर रुके थे। इसी दौरान कुछ हमलावरों ने उन पर लोहे की रॉड और चाकू से अचानक हमला कर दिया। हमलावरों ने कथित तौर पर उनके सिर पर कई वार किए और गला रेतकर मौके से फरार हो गए। गंभीर रूप से घायल अवस्था में उन्हें तुलसीपुर के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। फिरोज पप्पू की हत्या के बाद तुलसीपुर क्षेत्र में तनाव का माहौल पैदा हो गया था और पुलिस प्रशासन को विशेष सतर्कता बरतनी पड़ी थी।
राजनीतिक प्रतिद्वंद्विता बनी हत्या का कारण?
घटना के छह दिन बाद, तत्कालीन पुलिस अधीक्षक (एसपी) हेमंत कुटियाल ने इस हत्याकांड का खुलासा किया था। 10 जनवरी 2022 को पुलिस ने इस मामले में पूर्व सांसद रिजवान जहीर, उनकी बेटी जेबा, दामाद रमीज, मेराज उल हक उर्फ मामा, महफूज और शकील को गिरफ्तार किया था। पुलिस की प्रारंभिक जांच और खुलासे में यह बात सामने आई थी कि इस हत्या के पीछे राजनीतिक वर्चस्व की लड़ाई और विधानसभा टिकट की होड़ एक प्रमुख कारण थी। पुलिस के अनुसार, फिरोज पप्पू की लोकप्रियता बढ़ रही थी और उन्हें समाजवादी पार्टी की ओर से तुलसीपुर विधानसभा सीट से एक प्रबल दावेदार के रूप में देखा जा रहा था। दूसरी ओर, पूर्व सांसद रिजवान जहीर अपनी बेटी जेबा को इसी सीट से टिकट दिलाने के प्रयास में थे। इस राजनीतिक प्रतिद्वंद्विता के कारण दोनों गुटों के बीच तनाव का माहौल बना हुआ था, जो अंततः हत्या की वजह बना।
साजिश और हत्या का प्रयास
जांच में यह भी खुलासा हुआ था कि हत्या की साजिश एक महीने पहले से रची जा रही थी और वारदात को अंजाम देने से पहले तीन बार पूर्व में भी फिरोज पप्पू की हत्या के प्रयास किए गए थे। हालांकि, वे हर बार बच निकले थे। 4 जनवरी 2022 की रात को मेराज उल हक उर्फ मामा और महफूज ने सीधे तौर पर इस वारदात को अंजाम दिया। पुलिस ने दावा किया था कि पूरी साजिश की योजना पूर्व सांसद रिजवान जहीर, उनकी बेटी जेबा, दामाद रमीज और शकील ने मिलकर रची थी। हत्या के बाद गिरफ्तार किए गए लोगों से पूछताछ और अन्य साक्ष्यों के आधार पर पुलिस ने यह निष्कर्ष निकाला था।
न्याय की लड़ाई और फैसले का इंतज़ार
इस मामले में कुल छह आरोपी थे। इनमें से एक आरोपी शकील की सुनवाई के दौरान ही मौत हो गई थी, जिससे अभियुक्तों की संख्या पांच रह गई थी। आज एमपी-एमएलए कोर्ट ने पूर्व सांसद रिजवान जहीर, उनकी बेटी जेबा और दामाद रमीज को दोषमुक्त कर दिया। वहीं, मेराज उल हक और महफूज को हत्या का दोषी पाया गया है, जिनकी सज़ा का निर्धारण मंगलवार को किया जाएगा। इस फैसले का लंबे समय से इंतज़ार था और यह मामले में एक महत्वपूर्ण मोड़ है, जिसने राजनीतिक गलियारों में भी हलचल मचा दी है।
