फतेहपुर: पुलिस पर घर में घुसकर लूटपाट और तोड़फोड़ का गंभीर आरोप
फतेहपुर के हथगांव में महिला ने पुलिस पर घर में घुसकर तोड़फोड़, मारपीट और लाखों के जेवर व नकदी लूटने का आरोप लगाया है।

फतेहपुर | संवाददाता: देवेंद्र सिंह
द क्लिफ न्यूज़ | फतेहपुर | 23 अक्टूबर 2026
उत्तर प्रदेश के फतेहपुर जिले में एक महिला ने पुलिस पर गंभीर आरोप लगाते हुए न्याय की गुहार लगाई है। कमलापुर निवासी ममता का दावा है कि हथगांव थाना पुलिस ने उसके घर में घुसकर न केवल तोड़फोड़ की, बल्कि मारपीट और लाखों रुपये की नकदी व जेवर लूट लिए। महिला ने इस संबंध में फतेहपुर के पुलिस अधीक्षक से लिखित शिकायत दर्ज कराई है।
पीड़िता के अनुसार, 16 अक्टूबर की शाम को थाना प्रभारी अरुण चतुर्वेदी के नेतृत्व में लगभग 10-12 पुलिसकर्मी बिना महिला सिपाही के उसके घर पहुंचे। उन्होंने ममता के पति धर्मेंद्र पर गांजा रखने का आरोप लगाते हुए तलाशी के बहाने घर का सारा सामान अस्त-व्यस्त कर दिया। इस दौरान घर में लगे सीसीटीवी कैमरे भी उखाड़ दिए गए।
पुलिस की कार्रवाई पर सवालिया निशान
अगले दिन, 17 अक्टूबर को ममता ने पुलिस अधीक्षक अभिमन्यु मांगलिक के समक्ष इस घटना की विस्तृत लिखित शिकायत पेश की। महिला का आरोप है कि शिकायत दर्ज होने से नाराज थाना प्रभारी ने 18 अक्टूबर की रात एक बार फिर भारी पुलिस बल के साथ उसके घर पर छापा मारा। इस बार पुलिस द्वारा कथित तौर पर फ्रिज, चक्की और अन्य घरेलू सामानों को क्षतिग्रस्त किया गया। इतना ही नहीं, अलमारी तोड़कर 2 लाख रुपये नकद और लगभग 8 लाख रुपये मूल्य के जेवर लूट लिए गए। विरोध करने पर ममता का कहना है कि उसके साथ मारपीट की गई और दोबारा शिकायत करने पर गंभीर परिणाम भुगतने की धमकी दी गई।
पीड़िता का दर्द और पुलिस का खंडन
पीड़िता ममता, जिसने दस दिन पूर्व ही बच्चे को जन्म दिया है, अपनी तीन बेटियों के साथ भयभीत बताई जा रही है। उसने पुलिस अधीक्षक से इस मामले की निष्पक्ष जांच कर थाना प्रभारी और उनकी टीम के विरुद्ध कड़ी कार्रवाई की मांग की है।
वहीं, दूसरी ओर, हथगांव थाना प्रभारी अरुण चतुर्वेदी ने महिला द्वारा लगाए गए सभी आरोपों को बेबुनियाद बताया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि महिला के पति धर्मेंद्र के विरुद्ध गांजा तस्करी के कई मुकदमे पूर्व से दर्ज हैं। इन्हीं मामलों की जांच के क्रम में पुलिस ने नियमानुसार दबिश दी थी। यह पूरा मामला अब मानवाधिकारों के उल्लंघन और पुलिस की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर रहा है।
