फतेहगढ़ के बरगदिया घाट की जर्जर स्थिति पर मां गंगा सेवा समिति चिंतित
मां गंगा सेवा समिति ने फतेहगढ़ के बरगदिया घाट पर स्वच्छता अभियान चलाया। समिति ने घाट की दयनीय स्थिति पर चिंता जताते हुए जिलाधिकारी से...

द क्लिफ न्यूज़ | फतेहगढ़ | 26 जुलाई 2026
मां गंगा सेवा समिति ने आज फतेहगढ़ के बरगदिया घाट पर अपने साप्ताहिक स्वच्छता एवं जनजागरूकता अभियान का आयोजन किया। इस दौरान समिति के सदस्यों और पदाधिकारियों ने घाट और वहां तक पहुंचने वाले रास्ते की दयनीय स्थिति पर गंभीर चिंता व्यक्त की।
समिति के सदस्यों ने विशेष रूप से इस बात पर प्रकाश डाला कि वर्तमान समय में फतेहगढ़ के निवासियों के लिए बरगदिया घाट ही स्नान का एकमात्र सुलभ स्थान है। अन्य दो घाट, किला घाट और रानी घाट, सेना द्वारा सुरक्षा कारणों का हवाला देते हुए बंद कर दिए गए हैं। इस स्थिति में बरगदिया घाट का जर्जर होना स्थानीय निवासियों के लिए एक बड़ी समस्या का कारण बन रहा है, जो धार्मिक अनुष्ठानों और दैनिक स्नान के लिए इस घाट पर निर्भर हैं। घाट की वर्तमान दशा न केवल असुविधाजनक है, बल्कि यह सुरक्षा की दृष्टि से भी चिंताजनक है, विशेषकर जब श्रद्धालु बड़ी संख्या में यहां आते हैं।
घाट सुधार की तत्काल मांग
पुण्य श्रावण मास के शीघ्र आरंभ होने की संभावना को देखते हुए, समिति ने जिलाधिकारी से अविलंब जनभावनाओं को ध्यान में रखते हुए श्रद्धालुओं के लिए सुगम और सुरक्षित स्नान हेतु रास्ते के निर्माण कार्य को शुरू करने की मांग की है। समिति का मानना है कि इस संवेदनशील समय में घाट की स्थिति में सुधार अत्यंत आवश्यक है ताकि भक्त बिना किसी बाधा के अपने धार्मिक अनुष्ठान कर सकें। श्रावण मास, जो भगवान शिव को समर्पित होता है, में गंगा स्नान का विशेष महत्व है और भक्त इस दौरान बड़ी संख्या में पवित्र नदियों में स्नान करने आते हैं। बरगदिया घाट की वर्तमान अव्यवस्था श्रद्धालुओं की भावनाओं को आहत कर सकती है और उनकी सुविधा में बाधा डाल सकती है। इसलिए, इस समय में घाट का जीर्णोद्धार और सुरक्षित रास्ते का निर्माण जनहित में अनिवार्य है।
समिति के पदाधिकारियों ने जिलाधिकारी को सौंपे ज्ञापन में इस बात पर जोर दिया कि सेना द्वारा अन्य घाटों को बंद करने के फैसले के बाद, बरगदिया घाट पर दबाव और बढ़ गया है। ऐसे में, इस घाट की उपेक्षा करना स्थानीय समुदाय के लिए भारी पड़ सकता है। उन्होंने प्रशासन से अनुरोध किया कि वे न केवल घाट के तत्काल मरम्मत का कार्य शुरू करें, बल्कि वहां तक पहुंचने वाले कच्चे और जर्जर रास्ते को भी पक्का और सुरक्षित बनाएं, ताकि बरसात के मौसम में श्रद्धालुओं को कीचड़ और जलभराव जैसी समस्याओं का सामना न करना पड़े। इस मार्ग का सुधार दैनिक आवागमन को भी सुगम बनाएगा।
इस साप्ताहिक अभियान में आलोक चतुर्वेदी, जय ओम, आशीष मिश्रा, सिरमित कटियार, नीटू मिश्रा, किशन बाथम, राजेंद्र बाथम, और राजीव वर्मा सहित समाज के कई प्रबुद्ध लोगों ने सक्रिय रूप से भाग लिया। उन्होंने न केवल घाट के आसपास के क्षेत्र की सफाई में योगदान दिया, बल्कि स्थानीय प्रशासन से इस महत्वपूर्ण मुद्दे पर तत्काल ध्यान देने की अपील भी की। इन नागरिकों की भागीदारी ने इस समस्या की गंभीरता को रेखांकित किया और यह दर्शाया कि यह केवल समिति का मुद्दा नहीं, बल्कि पूरे फतेहगढ़ समुदाय की चिंता का विषय है। सभी उपस्थित लोगों ने मिलकर नारे भी लगाए और प्रशासन से शीघ्र कार्रवाई की मांग की।
