फर्रुखाबाद: पांचाल घाट पुल पर भ्रष्टाचार, भाजपा नेता ने प्रशासन को घेरा
भाजपा नेता विकास राजपूत ने पांचाल घाट गंगा पुल की जर्जर स्थिति और मरम्मत के नाम पर हो रहे भ्रष्टाचार पर प्रशासन को आड़े हाथों...

द क्लिफ न्यूज़ | फर्रुखाबाद | 26 जुलाई 2026
फर्रुखाबाद में पांचाल घाट स्थित गंगा नदी के पुल की बदहाल स्थिति और मरम्मत के नाम पर हो रहे कथित भ्रष्टाचार को लेकर भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के नेता विकास राजपूत ने प्रशासन और संबंधित विभागों पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने आरोप लगाया है कि पुल की मरम्मत के लिए हर साल लाखों रुपये खर्च किए जाते हैं, लेकिन निर्माण की गुणवत्ता इतनी निम्न स्तर की होती है कि मरम्मत कार्य दो से तीन महीने से अधिक नहीं टिक पाता। यह स्थिति जनता द्वारा दिए गए कर के पैसों की बर्बादी और व्यापक भ्रष्टाचार का स्पष्ट संकेत है, ऐसा उन्होंने कहा।
विकास राजपूत ने जिले में बुनियादी सुविधाओं की कमी और प्रशासनिक लापरवाही पर गहरी चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा, “यह अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण है कि जब भारत दुनिया की चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनने की दिशा में अग्रसर है, तब हमारे जिले की आम जनता घंटों जाम में फंसकर बुनियादी सुविधाओं के लिए संघर्ष करने को मजबूर है। यह केवल अव्यवस्था नहीं, बल्कि प्रशासनिक निष्क्रियता का परिणाम है।” उन्होंने आगे कहा कि यह स्थिति न केवल नागरिकों के लिए असुविधाजनक है, बल्कि सरकारी तंत्र की अक्षमता को भी उजागर करती है, जहाँ विकास कार्यों के लिए आवंटित धन का सही उपयोग नहीं हो पा रहा है।
एनएच-730सी पर भ्रष्टाचार और हादसों का आरोप
भाजपा नेता ने एनएच-730सी (NH-730C) के निर्माण कार्य में भी लगातार भ्रष्टाचार के मामलों के सामने आने का आरोप दोहराया। उन्होंने कहा कि इन गंभीर आरोपों के बावजूद आज तक किसी भी जिम्मेदार अधिकारी या संबंधित पक्ष के खिलाफ कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं की गई है। उनके अनुसार, यह हाईवे अब स्थानीय लोगों के बीच “हादसों का हाईवे” के नाम से कुख्यात हो गया है। आए दिन हो रही दुर्घटनाएं इस बात का प्रमाण हैं कि निर्माण की गुणवत्ता से समझौता किया गया है।
विकास राजपूत ने सेंट्रल जेल चौराहा, बघार नाला और मसानी जैसे संवेदनशील और भीड़भाड़ वाले स्थानों पर ट्रैफिक सिग्नल की अनुपस्थिति और आवश्यक सुरक्षा उपायों की कमी को भी उजागर किया। उन्होंने चिंता व्यक्त की कि इन स्थानों पर लगातार सड़क हादसे हो रहे हैं, जिनमें लोगों की जान जा रही है। इसके बावजूद, प्रशासन नियमों का हवाला देकर स्पीड ब्रेकर बनाने की अनुमति देने से इनकार कर रहा है, जबकि ये गति नियंत्रक हादसों को रोकने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। उन्होंने सवाल उठाया कि प्रशासन कितनी और जानें जाने के बाद ही जागेगा और कब आम जनता की सुरक्षा को प्राथमिकता देगा।
स्थायी मरम्मत की अनदेखी पर सवाल
विकास राजपूत ने राज्य और केंद्र सरकार के जिम्मेदार होने के बावजूद जिले की विकास परियोजनाओं में स्पष्ट रूप से दिखाई दे रहे भ्रष्टाचार पर नाराजगी जताई। उन्होंने तीन वर्षों से पांचाल घाट गंगा पुल की स्थायी मरम्मत न कराए जाने पर प्रशासन से जवाब मांगा है, जबकि हर साल मरम्मत के नाम पर सरकारी धन का अपव्यय किया जा रहा है। यह एक चिंताजनक प्रवृत्ति है जहाँ तात्कालिक समाधानों पर जोर दिया जाता है, न कि दीर्घकालिक और स्थायी समाधानों पर।
उन्होंने प्रशासन पर अप्रत्यक्ष रूप से निशाना साधते हुए कहा कि ऐसा प्रतीत होता है मानो अधिकारी किसी बड़े हादसे का इंतजार कर रहे हों। यदि समय रहते पुल की मजबूत और स्थायी मरम्मत नहीं कराई गई, तो किसी भी दिन एक बड़ी दुर्घटना घट सकती है, जिसकी पूरी जिम्मेदारी पूरी तरह से प्रशासन की होगी। पुल की वर्तमान स्थिति को देखते हुए, यह एक गंभीर संभावित खतरा है जिस पर तत्काल ध्यान देने की आवश्यकता है।
गुणवत्ताहीन निर्माण और ठेकेदारों पर संदेह
भाजपा नेता ने इस बात पर भी प्रकाश डाला कि जनप्रतिनिधियों द्वारा कई बार शिकायतें किए जाने के बावजूद पुल की गुणवत्ता सुधारने की दिशा में कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है। उन्होंने दो वर्ष पूर्व जनता को समर्पित किए गए शुकरुल्लापुर ओवरब्रिज की स्थिति का भी उल्लेख किया, जो कथित तौर पर भ्रष्टाचार का शिकार हुआ है। यह घटना जिले में विकास कार्यों की समग्र गुणवत्ता पर गंभीर प्रश्नचिह्न लगाती है और दर्शाती है कि इस समस्या का विस्तार केवल पांचाल घाट पुल तक ही सीमित नहीं है।
विकास राजपूत ने आरोप लगाया कि पुल की मरम्मत घटिया ठेकेदारों और अकुशल कारीगरों से कराई जा रही है। उन्होंने मांग की है कि देश की प्रतिष्ठित और अनुभवी कंपनियों से पुल की मरम्मत का कार्य कराया जाए, ताकि वर्षों तक सुरक्षित और टिकाऊ निर्माण सुनिश्चित हो सके। उनका मानना है कि भारत में ऐसी कई कंपनियां उपलब्ध हैं जो आधुनिक तकनीक का उपयोग करके पुलों की मरम्मत को मजबूत और तेज गति से पूरा करने में सक्षम हैं, लेकिन प्रशासन ने आज तक उनसे संपर्क करने की आवश्यकता महसूस नहीं की है। यह दर्शाता है कि स्थानीय स्तर पर निर्णय लेने की प्रक्रिया में कहीं न कहीं चूक हो रही है, जिससे गुणवत्तापूर्ण कार्यों के बजाय लागत प्रभावी या निहित स्वार्थों वाले समाधानों को प्राथमिकता मिल रही है।
प्रशासन को चेतावनी, बड़े हादसे की आशंका
अंततः, उन्होंने प्रशासन और सरकार को चेतावनी देते हुए कहा कि अभी भी समय है। यदि प्रशासन ने इस मामले को गंभीरता से नहीं लिया, तो किसी भी दिन एक बड़ा हादसा हो सकता है, जिसके लिए संबंधित अधिकारी सीधे तौर पर जिम्मेदार होंगे। उन्होंने पुल की तत्काल और स्थायी मरम्मत की आवश्यकता पर बल दिया ताकि आम जनता को सुरक्षा मिल सके और सरकारी धन का दुरुपयोग रोका जा सके। उनकी मांग है कि इस मामले की उच्च स्तरीय जांच हो और दोषियों पर कड़ी कार्रवाई की जाए।
