फर्रुखाबाद में सीएम योगी की सभा: काले कपड़ों पर रोक, भारी सुरक्षा व्यवस्था
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के फर्रुखाबाद आगमन पर पुलिस लाइन फतेहगढ़ में सुरक्षा चाक-चौबंद रही। काले कपड़े पहने लोगों को प्रवेश नहीं मिला, जबकि कई अन्य दिक्कतों का सामना करना पड़ा।

संवाददाता: संदीप तिवारी
द क्लिफ न्यूज़ | फर्रुखाबाद | 3 सितंबर 2026
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के गुरुवार को फर्रुखाबाद के पुलिस लाइन फतेहगढ़ में बाढ़ राहत कार्यक्रम में शामिल होने के दौरान सुरक्षा व्यवस्था अत्यंत कड़ी रही। मुख्यमंत्री लगभग 11:55 बजे हेलीकॉप्टर से कार्यक्रम स्थल पर पहुंचे। उनके आगमन को देखते हुए सुबह से ही जिले के विभिन्न इलाकों से बड़ी संख्या में लोग पहुंचने लगे थे, जिससे फतेहगढ़ में यातायात को नियंत्रित करने के लिए कई स्थानों पर बैरियर लगाए गए।
मुख्यमंत्री की सभा में प्रवेश से पहले की गई सुरक्षा जांच के दौरान, काले कपड़े पहने कई व्यक्तियों को पुलिस लाइन के गेट पर रोक दिया गया। कुछ लोगों ने मौके पर ही अपने काले कपड़े उतार दिए और फिर उन्हें अंदर जाने की अनुमति मिली, जबकि अन्य बिना सभा में शामिल हुए ही वापस लौट गए। इस प्रतिबंध के कारण कुछ लोगों को निराशा हाथ लगी।
सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम और यातायात प्रबंधन
मुख्यमंत्री के आगमन को लेकर सुरक्षा के अभूतपूर्व इंतजाम किए गए थे। ड्रोन कैमरों से भी निगरानी रखी जा रही थी, और पुलिसकर्मियों की तैनाती चप्पे-चप्पे पर की गई थी।
चारों विधानसभा क्षेत्रों से बसों द्वारा लाए गए लोगों के वाहनों को फतेहगढ़ स्थित ब्रह्मदत्त स्टेडियम में पार्क कराया गया। वहां से महिला और पुरुष दोनों वर्ग के लोग पैदल ही पुलिस लाइन स्थित कार्यक्रम स्थल तक पहुंचे। दोपहिया और चारपहिया निजी वाहनों को पुलिस लाइन से कुछ दूरी पर, गेस्ट हाउस के पास लगाए गए बैरियर पर ही रोक दिया गया। इसके अलावा, अन्य स्थानों पर भी वाहनों की पार्किंग की व्यवस्था की गई थी।
सरकारी वाहनों, भारतीय जनता पार्टी के पदाधिकारियों और निर्वाचित जनप्रतिनिधियों के वाहनों को पुलिस लाइन के दूसरे गेट से सीधे कार्यक्रम स्थल तक जाने की विशेष अनुमति दी गई थी। भीड़ बढ़ने की स्थिति में, पुलिस ने कई बार बैरियर लगाकर प्रवेश को नियंत्रित करने का प्रयास किया, ताकि अव्यवस्था न फैले।
ज्ञापन और हिरासत में लिए गए लोग
गंगा और रामगंगा में हो रहे कटान तथा बाढ़ की समस्या से प्रभावित क्षेत्रों में तटबंध बनवाने की मांग को लेकर कुछ लोग मुख्यमंत्री को ज्ञापन सौंपने पहुंचे थे। इन लोगों की मांग थी कि सरकार इन गंभीर समस्याओं का स्थायी समाधान निकाले और प्रभावित लोगों को राहत प्रदान करे।
इसके अतिरिक्त, अन्य मांगों से संबंधित पत्र लेकर पहुंचे लोगों को भी पुलिस ने सभा स्थल पर प्रवेश करने से रोक दिया। इनमें से कुछ लोगों को पुलिस ने हिरासत में भी लिया। यह भी चर्चा रही कि शहर में कुछ लोगों को हाउस अरेस्ट भी किया गया था, जिनमें युवा व्यापार मंडल अध्यक्ष अंकुर श्रीवास्तव और किसान यूनियन महाशक्ति के जिलाध्यक्ष मनोज यादव के नाम प्रमुख थे। इन गिरफ्तारियों और हाउस अरेस्ट की खबरों ने स्थानीय प्रशासन की संवेदनशीलता पर सवाल उठाए।
गर्मी और उमस से लौटी भीड़
कार्यक्रम स्थल पर क्षमता से अधिक भीड़ होने के कारण, मुख्यमंत्री के आने से पहले ही कई लोग भीषण गर्मी और उमस से परेशान होकर वापस लौट गए। तेज धूप और उमस भरे मौसम ने लोगों के लिए मुश्किलें पैदा कीं। पुलिस लाइन गेट पर बार-बार बैरियर लगाकर भीड़ को नियंत्रित करने के प्रयास किए गए, लेकिन लोगों की संख्या लगातार बढ़ती रही। अमृतपुर विधानसभा क्षेत्र से भी बड़ी संख्या में लोग कार्यक्रम में शामिल होने पहुंचे थे। लोगों में मुख्यमंत्री का भाषण सुनने के साथ-साथ बाढ़ राहत सामग्री प्राप्त करने को लेकर भी उत्साह दिखाई दिया, लेकिन गर्मी के कारण उनका उत्साह कुछ कम हुआ।
ऊंचे स्थानों से निगरानी और जिला प्रशासन की भूमिका
मुख्यमंत्री की सुरक्षा को सुनिश्चित करने के लिए पुलिस लाइन और उसके आसपास के क्षेत्रों में बड़ी संख्या में पुलिसकर्मियों को तैनात किया गया था। ऊंचे स्थानों पर तैनात पुलिसकर्मी दूरबीन की सहायता से आसपास के क्षेत्र की लगातार निगरानी कर रहे थे। यह सुनिश्चित किया गया कि किसी भी अप्रिय घटना को रोका जा सके।
जिला प्रशासन के अधिकारी भी पूरे समय सुरक्षा व्यवस्था और यातायात प्रबंधन पर पैनी नजर बनाए हुए थे। उन्होंने भीड़ को नियंत्रित करने और शांति व्यवस्था बनाए रखने के लिए पुलिस बल के साथ मिलकर काम किया।
कार्यक्रम के बाद जाम की स्थिति और स्थानीय लोगों की परेशानी
मुख्यमंत्री के कार्यक्रम समाप्त होने और उनके रवाना होने के तुरंत बाद, सभा स्थल से लोगों के एक साथ बाहर निकलने के कारण कुछ समय के लिए यातायात जाम जैसी स्थिति उत्पन्न हो गई। यह एक आम समस्या होती है जब बड़े कार्यक्रमों के बाद अचानक भीड़ एक साथ निकलती है।
बीएसए कार्यालय और पुलिस लाइन के आसपास रहने वाले दोपहिया वाहन चालकों की बैरियर हटाने को लेकर पुलिस से हल्की नोकझोंक भी हुई। स्थानीय निवासियों ने बताया कि जगह-जगह बैरियर लगाए जाने से उन्हें अपने घरों और ड्यूटी स्थलों तक पहुंचने में वाहनों से काफी परेशानी हुई। नगर पालिका के सफाई कर्मचारियों और बिजली विभाग के कुछ कर्मचारियों के वाहनों को भी बैरियर पर रोके जाने से उन्हें कठिनाइयों का सामना करना पड़ा।
कुल मिलाकर, मुख्यमंत्री के कार्यक्रम को लेकर प्रशासन ने सुरक्षा और भीड़ नियंत्रण के पुख्ता इंतजाम किए थे, लेकिन कड़े प्रवेश प्रतिबंधों और व्यापक यातायात नियंत्रण उपायों के चलते आम लोगों को भी कई तरह की असुविधाओं का अनुभव करना पड़ा। सुरक्षा के उच्च स्तर को बनाए रखने के प्रयासों में आम नागरिकों की छोटी-मोटी परेशानियां भी शामिल थीं, जिन्हें इस प्रकार के सार्वजनिक आयोजनों में अक्सर अनदेखा कर दिया जाता है।
