फर्रुखाबाद में गंगा का जलस्तर बढ़ा, अमृतपुर क्षेत्र में बाढ़ से जनजीवन अस्त-व्यस्त
फर्रुखाबाद के अमृतपुर तहसील क्षेत्र में गंगा नदी का जलस्तर बढ़ने से कई संपर्क मार्ग जलमग्न हो गए हैं, जिससे स्थानीय निवासियों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।

द क्लिफ न्यूज़ | फर्रुखाबाद | 2 अगस्त 2026
फर्रुखाबाद के अमृतपुर तहसील क्षेत्र में गंगा नदी के बढ़ते जलस्तर ने जनजीवन को अस्त-व्यस्त कर दिया है। कई महत्वपूर्ण संपर्क मार्ग दो से तीन फीट पानी में डूब गए हैं, जिससे स्थानीय निवासियों के दैनिक जीवन पर गहरा असर पड़ा है। विशेष रूप से, स्कूली बच्चों और शिक्षकों को स्कूल पहुंचने के लिए जलभराव वाले रास्तों से गुजरना पड़ रहा है, जिससे उनकी शिक्षा प्रभावित हो रही है।
फखरपुर जालिम, फखरपुर बच्चन, करनपुर घाट, बनारसीपुर, किरचन पुलिया, रामप्रसाद नगला, माखन नगला, पंचम नगला और खुशी नगला जैसे कई गांवों को जोड़ने वाली सड़कें पूरी तरह से जलमग्न हो गई हैं। इन क्षेत्रों में सड़क पर तेज बहाव के साथ पानी बह रहा है, जो न केवल पैदल चलने वालों के लिए बल्कि मोटरसाइकिल और अन्य छोटे वाहनों के लिए भी आवागमन को खतरनाक बना रहा है।
जलस्तर में वृद्धि और संभावित खतरे
रविवार शाम, 2 अगस्त 2026 को, फर्रुखाबाद में लोहिया सेतु (पंचालघाट) पर गंगा नदी का जलस्तर 136.90 मीटर दर्ज किया गया। यह स्तर चेतावनी बिंदु (136.60 मीटर) से ऊपर है, जबकि खतरे का निशान 137.10 मीटर है। नरौरा बैराज से गंगा नदी में 1,72,721 क्यूसेक पानी छोड़ा गया है, जो अन्य बैराजों से आने वाले अतिरिक्त प्रवाह के साथ मिलकर जलस्तर को बढ़ा रहा है।
ग्रामीणों ने चिंता व्यक्त की है कि यदि गंगा का जलस्तर इसी तरह बढ़ता रहा तो स्थिति और भी गंभीर हो सकती है। मंझा क्षेत्र की महिलाओं ने बताया कि गांवों में बीमारियां फैल रही हैं और दवा प्राप्त करने के लिए भी उन्हें पानी से होकर गुजरना पड़ रहा है। हालांकि, इन परिस्थितियों के बावजूद, अभी तक नावों की पर्याप्त व्यवस्था नहीं की गई है, जिससे लोगों को अत्यधिक कठिनाई हो रही है।
प्रशासन की सक्रियता और ग्रामीणों की मांगें
बाढ़ और जलभराव की स्थिति को देखते हुए, प्रशासन और बाढ़ नियंत्रण विभाग अलर्ट पर हैं। वे निचले इलाकों की लगातार निगरानी कर रहे हैं ताकि किसी भी आपातकालीन स्थिति से निपटा जा सके। वहीं, ग्रामीणों ने जिला प्रशासन पर पर्याप्त इंतजाम न करने का आरोप लगाया है। उन्होंने तत्काल नावों की व्यवस्था करने, स्वास्थ्य शिविर स्थापित करने और बाढ़ प्रभावित परिवारों को राहत सामग्री उपलब्ध कराने की मांग की है, ताकि उन्हें इस संकट की घड़ी में कुछ राहत मिल सके।
