फर्रुखाबाद में बाढ़ का खतरा, जिला प्रशासन ने संभाली कमान, राहत कार्यों का जायजा
फर्रुखाबाद: गंगा और रामगंगा नदियों के जलस्तर में वृद्धि से जिला अतिसंवेदनशील श्रेणी में, जिला प्रशासन ने बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में राहत और बचाव कार्यों के लिए 24 घंटे बाढ़ नियंत्रण कक्ष स्थापित किए हैं।

द क्लिफ न्यूज़ | फर्रुखाबाद | 19 अगस्त 2026
जनपद फर्रुखाबाद में गंगा और रामगंगा नदियों के जलस्तर में लगातार हो रही वृद्धि के बीच जिला प्रशासन बाढ़ की संभावित आपदा से निपटने के लिए पूरी तरह से मुस्तैद है। अपर जिलाधिकारी वित्त एवं राजस्व, जो बाढ़ राहत कार्यों के नोडल अधिकारी भी हैं, ने मंगलवार को जनपद के बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में जिला प्रशासन द्वारा किए जा रहे विभिन्न राहत एवं बचाव कार्यों की जानकारी सर्वसाधारण को दी। जनपद को प्रदेश के बाढ़ प्रभावित जिलों में अतिसंवेदनशील श्रेणी में चिन्हित किया गया है।
वर्तमान स्थिति के अनुसार, 19 अगस्त 2026 को नरोरा बैराज से गंगा नदी में 115137 क्यूसेक पानी छोड़ा गया है, जिसके चलते पांचाल घाट पर जलस्तर 136.85 मीटर दर्ज किया गया है। यह जलस्तर अभी भी खतरे के निशान 137.10 मीटर से 20 सेंटीमीटर नीचे है। इसी प्रकार, रामगंगा नदी में भी 75445 क्यूसेक पानी छोड़े जाने से रामगंगा सेतु पर जलस्तर खतरे के निशान से नीचे बना हुआ है। हालांकि, नदियों का जलस्तर स्थिर बना हुआ है, प्रशासन किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए पूरी तरह तैयार है।
बाढ़ से प्रभावित क्षेत्र और बचाव की तैयारियां
अपर जिलाधिकारी ने बताया कि वर्तमान समय में जनपद की तीन तहसीलों – सदर, अमृतपुर और कायमगंज – के कुल 63 गांव, आंशिक आबादी और कृषि भूमि बाढ़ से प्रभावित हैं। रामगंगा नदी पर एक सुरक्षित तटबंध, कड़कका, 7.45 किलोमीटर की लंबाई में निर्मित है, जो बचाव का एक महत्वपूर्ण जरिया है। बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में किसी भी प्रकार की आपात स्थिति से निपटने के लिए रेस्क्यू टीम के रिजर्व स्टाफ की पूर्ण व्यवस्था की गई है।
इसके अतिरिक्त, 01 जून 2026 से कलेक्ट्रेट फतेहगढ़ के कक्ष संख्या 27 में एक 24 घंटे संचालित बाढ़ नियंत्रण कक्ष स्थापित है। इस नियंत्रण कक्ष के टोल फ्री नंबर 1077, दूरभाष नंबर 05692-235077 और मोबाइल नंबर 94544416457 पर संपर्क किया जा सकता है। जिलाधिकारी कैंप कार्यालय (05692-234165, 234111) और सिंचाई विभाग नलकूप कॉलोनी (8005103770) में भी बाढ़ नियंत्रण कक्ष संचालित हैं। कर्मचारियों की शिफ्टवार ड्यूटी लगाई गई है ताकि किसी भी सूचना पर तत्काल कार्रवाई की जा सके।
राहत सामग्री और सुरक्षा उपकरणों की उपलब्धता
राजस्व विभाग द्वारा 52 बाढ़ चौकियां (तहसील सदर में 05, तहसील कायमगंज में 15 और तहसील अमृतपुर में 33) तथा 24 बाढ़ शरणालय (तहसील सदर में 05, तहसील कायमगंज में 06 और तहसील अमृतपुर में 13) संचालित किए जा रहे हैं। बाढ़ से प्रभावित परिवारों की सुरक्षा के लिए 24 अस्थाई बाढ़ शरणालय और 52 अस्थाई बाढ़ चौकियां स्थापित की गई हैं, जिनमें राजस्व, पंचायती राज, ग्राम विकास, चिकित्सा और पशु चिकित्सा विभागों के कार्मिकों की तैनाती की गई है।
प्रत्येक तहसील में एक-एक मॉडल शरणालय स्थापित किया गया है, जहां बच्चों के लिए स्मार्ट क्लासेस, मनोरंजन कक्ष और खेलकूद की व्यवस्था की गई है, ताकि बाढ़ के दौरान भी उनका सर्वांगीण विकास बाधित न हो। खोज एवं बचाव कार्यों के लिए 191 निजी नावों के साथ नाविक और 53 गोताखोर सेफ्टी किट के साथ उपलब्ध हैं। इसके अतिरिक्त, लाइव जैकेट, लाइफ रिंग, सर्च लाइट, सेफ्टी हेलमेट, रेनकोट, मेगाफोन, ड्रैगन लाइट और रस्से जैसी आवश्यक सामग्री भी पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध है। मुख्यालय स्तर पर आपातकालीन आवश्यक संसाधन रिजर्व (EERR) किट भी तैयार रखी गई है।
विभिन्न विभागों द्वारा किए जा रहे कार्य
जिलाधिकारी डॉ. अंकुर लाठर के निर्देशन में विभिन्न विभागों द्वारा बाढ़ से बचाव और राहत के लिए महत्वपूर्ण कदम उठाए जा रहे हैं। कृषि विभाग द्वारा धान की सहनशील प्रजाति आई.आर. 64 सब-1 किसानों को उपलब्ध कराई गई है, जो 14 दिनों तक जलभराव की स्थिति में भी फसल को बचा सकती है। यह प्रजाति अब तक 200 एकड़ क्षेत्र में बोई जा चुकी है।
सिंचाई विभाग ने 12.15 करोड़ रुपये की लागत से गंगा और रामगंगा नदियों के कटाव से सुरक्षा के लिए चार परियोजनाओं में परकोपाइन इस पर और स्क्रीन का कार्य पूरा कराया है।
चिकित्सा विभाग ने बाढ़ प्रभावित गांवों में चिकित्सीय सुविधा सुनिश्चित करने के लिए 17 मेडिकल टीमें गठित की हैं। अब तक 144 मेडिकल कैंप लगाकर 8073 मरीजों का उपचार किया जा चुका है। 10413 ओआरएस पैकेट और 9063 क्लोरीन टैबलेट वितरित किए गए हैं। एंटी स्नेक वेनम और अन्य आवश्यक दवाओं की उपलब्धता के साथ निरंतर मेडिकल कैंप लगाए जा रहे हैं। बाढ़ प्रभावित गांवों की गर्भवती महिलाओं की भी पहचान कर ली गई है।
पशु चिकित्सा विभाग ने बाढ़ प्रभावित पशुओं के लिए 6 पशु चिकित्सा टीमें और 14 अस्थाई पशु शरणालय स्थापित किए हैं। 54 पशु शिविरों में 3273 पशुओं का उपचार और 7237 पशुओं का टीकाकरण किया गया है। राहत शिविरों में रखे गए पशुओं के लिए 120 क्विंटल भूसे का वितरण भी किया गया है।
शिक्षा विभाग बाढ़ शरणालयों में रह रहे बच्चों की शिक्षा और सर्वांगीण विकास सुनिश्चित कर रहा है। नियमित कक्षाओं के साथ-साथ नैतिक शिक्षा, खेलकूद और रचनात्मक गतिविधियों का आयोजन किया जा रहा है।
मॉकड्रिल और राहत सामग्री वितरण
जिला आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के तत्वावधान में एनडीआरएफ, आर्मी, फ्लड पीएसी, राजस्व, पुलिस, चिकित्सा, सिंचाई व अन्य संबंधित विभागों के साथ समन्वय स्थापित कर दो मॉकड्रिल, बाढ़ राहत चौपाल और 19 स्कूल सेफ्टी प्रोग्राम का सफलतापूर्वक आयोजन किया गया है।
जनपद में बाढ़ प्रभावित गांवों के 10621 परिवारों को प्रभारी मंत्री, मंडलायुक्त, जिलाधिकारी और अन्य अधिकारियों की उपस्थिति में राहत सामग्री एवं सूखे खाद्यान्न पैकेट वितरित किए जा रहे हैं। 661 व्यक्तियों को सुरक्षित बाढ़ शरणालयों में विस्थापित किया गया है, जिन्हें प्रतिदिन नाश्ता, दोपहर और रात का भोजन उपलब्ध कराया जा रहा है। अब तक 7939 पके हुए फूड पैकेट वितरित किए जा चुके हैं।
आर्थिक सहायता और पुनर्वास
गंगा नदी के जलस्तर से प्रभावित 50775 जनसंख्या में तहसील सदर के 12 गांवों की 16915, तहसील कायमगंज के 21 गांवों की 127005 और तहसील अमृतपुर के 30 गांवों की 21160 जनसंख्या शामिल है। बाढ़ से 21 परिवारों के मकान पूर्णतः क्षतिग्रस्त हो गए थे, जिन्हें पक्के मकान बनाने के लिए 25,20,000 रुपये की धनराशि गृह अनुदान के रूप में वितरित की जा चुकी है।
जनपद में 2881.8 हेक्टेयर कृषि भूमि बाढ़ से प्रभावित हुई है। बाढ़ का पानी उतरने के बाद प्रभावित कृषकों की फसलों का राजस्व एवं कृषि विभाग के कार्मिकों द्वारा सर्वे कराकर सभी पात्र किसानों को कृषि निवेश अनुदान प्रदान किया जाएगा।
जिलाधिकारी डॉ. अंकुर लाठर के निर्देशानुसार, बाढ़ के कारण आशियानों का कटाव झेलने वाले ग्रामवासियों को आवासीय पट्टा प्रदान करने हेतु संबंधित तहसीलों से प्रस्तावित सूची तैयार की जा रही है। इसी क्रम में, सदर तहसील के ग्राम दिलीप की मड़ैया के 25 परिवारों को आवासीय पट्टे वितरित किए गए हैं, जिनमें से 21 परिवारों के खातों में पट्टे की धनराशि उपलब्ध करा दी गई है। जिला प्रशासन बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में निवास करने वाले लोगों की सहायता के लिए प्रतिबद्ध है और हर संभव प्रयास कर रहा है।
