फर्रुखाबाद में आलू किसानों का सात सितंबर को प्रदर्शन, नीति की मांग
फर्रुखाबाद में किसानों, व्यापारियों और शीतगृह स्वामियों ने सात सितंबर को कलेक्ट्रेट पर प्रदर्शन की घोषणा की है। वे न्यूनतम मूल्य वृद्धि, मंडी शुल्क माफी और नई आलू नीति की मांग कर रहे हैं।

द क्लिफ न्यूज़ | फर्रुखाबाद | 20 अगस्त 2026
एशिया की सबसे बड़ी आलू मंडियों में शुमार सातनपुर, फर्रुखाबाद में आलू किसानों की गंभीर समस्याओं और लगातार हो रहे नुकसान के विरोध में किसानों, शीतगृह स्वामियों, आलू व्यापारियों, आढ़तियों और आलू निर्यातकों ने एक संयुक्त बैठक में सरकार से तत्काल एक प्रभावी आलू नीति बनाए जाने की पुरजोर मांग की है। इस महत्वपूर्ण बैठक में सभी पक्षों ने मिलकर किसानों के हितों की रक्षा के लिए कड़े कदम उठाने की आवश्यकता पर बल दिया।
बैठक के दौरान, उपस्थित सदस्यों ने कई प्रमुख मांगों को सामने रखा। यह मांग की गई कि जब तक एक नई और व्यापक आलू नीति तैयार नहीं हो जाती, तब तक शीतगृहों में भंडारित आलू के भाड़े का भुगतान सीधे सरकार द्वारा किया जाए। इसके अतिरिक्त, आलू पर लगने वाले मंडी शुल्क को तत्काल प्रभाव से समाप्त करने की मांग की गई, ताकि किसानों पर पड़ने वाला आर्थिक बोझ कम हो सके।
किसानों के लिए न्यूनतम मूल्य निर्धारण की मांग
किसानों को उनकी उपज का उचित मूल्य दिलाने के उद्देश्य से, बैठक में विभिन्न किस्मों के आलू के लिए न्यूनतम मूल्य निर्धारित करने की मांग की गई। हाइब्रिड आलू के लिए न्यूनतम मूल्य 1000 रुपये प्रति क्विंटल और चिप्सोना, हॉलैंड व 3797 (प्रोसेसिंग वैरायटी) जैसी किस्मों के लिए न्यूनतम मूल्य 1500 रुपये प्रति क्विंटल तय करने का प्रस्ताव रखा गया। यह उम्मीद की गई है कि इससे किसानों को फसल की लागत निकालने और लाभ कमाने में मदद मिलेगी।
किसानों को होने वाली अप्रत्याशित हानि की स्थिति में, सरकार द्वारा मूल्य अंतर की धनराशि का भुगतान किए जाने की मांग भी उठाई गई। इसके साथ ही, आलू को अन्य राज्यों या निर्यात के लिए बाहर भेजने हेतु ट्रेन के किराए में पूर्ण छूट देने और आलू निर्यात पर सड़क परिवहन अनुदान को वर्तमान 25 प्रतिशत से बढ़ाकर 50 प्रतिशत करने की मांग भी प्रमुखता से उठाई गई।
प्रदेशव्यापी आंदोलन की घोषणा, सात सितंबर को प्रदर्शन
इन मांगों को लेकर एक व्यापक प्रदेशव्यापी आलू आंदोलन की घोषणा की गई है। आगामी सात सितंबर को किसान, व्यापारी, कोल्ड स्टोरेज स्वामी और आढ़ती कलेक्ट्रेट फतेहगढ़ पर एकत्रित होकर शांतिपूर्ण प्रदर्शन करेंगे। इस प्रदर्शन के दौरान, किसान अपनी समस्याओं के प्रति सरकार का ध्यान आकर्षित करने के लिए आलू की माला पहनकर अपनी व्यथा व्यक्त करेंगे।
किसान आंदोलन के प्रदेश अध्यक्ष अजय अनमोल ने कहा, “जब भी आलू महंगा होता है, तो राजनीतिक दलों के नेता आलू और प्याज की माला पहनकर प्रदर्शन करते हैं। लेकिन आज किसान बर्बादी के दौर से गुजर रहा है और सरकार किसानों की समस्याओं को गंभीरता से नहीं ले रही है। अब किसान स्वयं आलू की माला पहनकर अपनी बर्बादी का प्रदर्शन करेंगे और अपनी मांगें पूरी कराने के लिए आंदोलन को तेज करेंगे।” उन्होंने आगे बताया कि सात सितंबर 2026 को फर्रुखाबाद फतेहगढ़ कलेक्ट्रेट पर यह आंदोलन होगा, जिसके बाद अन्य जनपदों में भी प्रदर्शन होंगे और अंततः राजधानी लखनऊ में एक बड़ा आंदोलन आयोजित किया जाएगा। उन्होंने आश्वासन दिया कि जब तक किसानों की सभी मांगें पूरी नहीं होतीं, यह आंदोलन जारी रहेगा।
व्यापारियों और शीतगृह मालिकों की चिंताएं
किसान आंदोलन के प्रदेश प्रभारी अशोक कटियार ने सरकार से आंदोलन को गंभीरता से लेते हुए तत्काल किसानों और आलू व्यापारियों की समस्याओं का समाधान करने की मांग की। आलू निर्यातक एवं कार्यक्रम संयोजक सुधीर कुमार शुक्ला ने स्पष्ट किया कि मांगें पूरी होने तक संघर्ष जारी रहेगा। शीतगृह संघ के महासचिव मनोज कुमार रस्तोगी ने वर्तमान स्थिति पर गहरी चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि किसानों और शीतगृह स्वामियों के सामने आलू की जो स्थिति वर्तमान में है, ऐसी विकट स्थिति पहले कभी नहीं देखी गई। उन्होंने आगाह किया कि यदि किसानों की मांगें पूरी नहीं हुईं तो किसान भुखमरी की कगार पर पहुंच जाएंगे और आलू से जुड़े शीतगृहों सहित अन्य सभी संबद्ध कारोबार पूरी तरह से प्रभावित होकर बंद हो जाएंगे।
व्यापार मंडल के अध्यक्ष सर्वेश अग्रवाल और वरिष्ठ पदाधिकारी सुभाष बंसल ने फर्रुखाबाद के आर्थिक परिदृश्य पर प्रकाश डालते हुए कहा कि फर्रुखाबाद का आर्थिक आधार पूरी तरह से आलू पर निर्भर है। आलू के सस्ता होने से बाजार में मंदी का असर स्पष्ट रूप से दिखाई दे रहा है। उन्होंने सरकार से संयुक्त रूप से उठाई गई मांगों को जल्द से जल्द पूरा करने की अपील की, ताकि स्थानीय अर्थव्यवस्था को बचाया जा सके।
आगे की रणनीति और जनसभाएं
बैठक में आलू आढ़ती एवं किसान नेता अरविंद राजपूत, सुरेंद्र सिंह पाल, अजय राजपूत, रामलड़ैते, पुरुषोत्तम, बंधेलाल वर्मा, हर्ष सिंह, वीरेंद्र दीक्षित, देवकीनंदन, मनोज राजपूत, अविनाश कुशवाहा, प्रवीण कुमार कटियार समेत बड़ी संख्या में किसान नेता, व्यापारी और शीतगृह स्वामी उपस्थित थे। कार्यक्रम की अध्यक्षता राधेलाल राजपूत ने की। प्रदेश प्रभारी अशोक कटियार ने यह भी बताया कि आंदोलन के अगले चरण के तहत, 21 अगस्त 2026 को प्रातः 11 बजे कमौज, कपूरपुर, मानिकमजरा तथा बिल्हौर के बकोंटी में किसानों की महत्वपूर्ण सभाएं आयोजित की जाएंगी, जिनमें आंदोलन की रूपरेखा पर विस्तृत चर्चा की जाएगी।
