फर्रुखाबाद लोहिया अस्पताल में ईएनटी विशेषज्ञ की अनुपस्थिति, मरीज परेशान
फर्रुखाबाद के डॉ. राम मनोहर लोहिया संयुक्त चिकित्सालय में नाक-कान-गला विशेषज्ञ के न होने से मरीज इलाज से वंचित लौट रहे हैं। भाजपा नेता ने...

फर्रुखाबाद | संवाददाता: संदीप तिवारी
द क्लिफ न्यूज़ | फर्रुखाबाद | 8 सितंबर 2026
फर्रुखाबाद स्थित डॉ. राम मनोहर लोहिया संयुक्त चिकित्सालय में नाक, कान और गला (ईएनटी) विभाग के विशेषज्ञ डॉक्टर की अनुपस्थिति के कारण दूर-दराज से इलाज कराने आए मरीजों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। अधिकांश समय डॉक्टर के अस्पताल में उपलब्ध न रहने से ग्रामीण क्षेत्रों से आने वाले मरीज बिना उपचार के ही वापस लौटने को मजबूर हैं। मरीजों का आरोप है कि विशेषज्ञ डॉक्टर नियमित रूप से ड्यूटी पर नहीं आते, जिससे उनकी समस्याएं बढ़ गई हैं।
अस्पताल के प्रवेश द्वार पर तैनात कर्मचारी अक्सर मरीजों को यह कहकर लौटा देते हैं कि डॉक्टर न्यायालय में हैं या नाइट ड्यूटी पर व्यस्त हैं। विशेषज्ञ डॉक्टर के समय पर न बैठने से अस्पताल परिसर में मरीजों का आक्रोश बढ़ता जा रहा है। स्थानीय लोगों ने जिला प्रशासन से मांग की है कि अस्पताल में डॉक्टरों की उपस्थिति सुनिश्चित की जाए ताकि निर्धन मरीजों को समय पर चिकित्सा सुविधा मिल सके।
ईएनटी विशेषज्ञ की कमी पर भाजपा नेता की शिकायत
इस गंभीर समस्या को संज्ञान में लेते हुए, भारतीय जनता पार्टी के नगर मीडिया प्रभारी राहुल राठौर ने मुख्य चिकित्सा अधीक्षक (सीएमएस) से मुलाकात कर इस मामले में हस्तक्षेप की मांग की। सीएमएस ने स्वीकार किया कि ईएनटी विभाग में केवल एक ही डॉक्टर तैनात है, जिन्हें अन्य प्रशासनिक या न्यायिक कार्यों के कारण अक्सर अस्पताल में उपस्थित रहने में कठिनाई होती है। उन्होंने डॉक्टर की अनुपस्थिति को मरीजों की समस्याओं का मुख्य कारण बताया।
प्रशासन से कार्रवाई की मांग, अनियमितता पर नाराजगी
राहुल राठौर ने प्रशासन से इस मामले का तत्काल संज्ञान लेने और दोषी के विरुद्ध कठोर कार्रवाई करने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि कुछ डॉक्टरों की इस तरह की लापरवाही से सरकार की छवि पर नकारात्मक प्रभाव पड़ रहा है, जिसे बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। मरीजों और उनके परिजनों ने चेतावनी दी है कि यदि डॉक्टर की नियमित ड्यूटी सुनिश्चित नहीं की गई, तो वे आगे बड़े आंदोलन के लिए बाध्य होंगे। वर्तमान में, उपचार के लिए अस्पताल पहुंचने वाले मरीजों को निराशा ही हाथ लग रही है।
