फर्रुखाबाद लोहिया अस्पताल में बायोमेट्रिक हाजिरी शुरू, लेटलतीफी पर लगेगा अंकुश
फर्रुखाबाद लोहिया अस्पताल में जिलाधिकारी के निर्देश पर शुक्रवार, 18 सितंबर 2026 से बायोमेट्रिक हाजिरी लागू। लेटलतीफी पर अंकुश के साथ ढाई सौ कर्मचारियों के...

फर्रुखाबाद | संवाददाता: संदीप तिवारी
द क्लिफ न्यूज़ | फर्रुखाबाद | 18 सितंबर 2026
फर्रुखाबाद स्थित लोहिया अस्पताल में जिलाधिकारी के कड़े निर्देशों के अनुपालन में शुक्रवार, 18 सितंबर 2026 से बायोमेट्रिक उपस्थिति प्रणाली का संचालन शुरू कर दिया गया है। इस नई व्यवस्था का मुख्य उद्देश्य डॉक्टरों और चिकित्सा स्टाफ की लेटलतीफी पर प्रभावी अंकुश लगाना है, ताकि मरीजों को निर्धारित समय पर सुलभ उपचार मिल सके। गुरुवार को जिलाधिकारी द्वारा अस्पताल का औचक निरीक्षण किए जाने के बाद इस निर्णय को तत्काल प्रभाव से लागू किया गया है।
शुक्रवार सुबह आठ बजे से ही डॉक्टर और अन्य चिकित्सा कर्मचारी अपनी उपस्थिति दर्ज कराने के लिए अस्पताल में स्थापित बायोमेट्रिक मशीनों पर पहुंचने लगे। अस्पताल परिसर में दो स्थानों पर यह मशीनें लगाई गई हैं; एक मुख्य चिकित्सा अधीक्षक के कक्ष में और दूसरी इमरजेंसी वार्ड में। हालांकि, प्रारंभिक चरण में कुछ तकनीकी दिक्कतें भी सामने आईं, जिसके चलते कुछ कर्मचारियों के नाम डेटाबेस में फीड न होने की वजह से उनकी उपस्थिति दर्ज करने में कठिनाई हुई।
बायोमेट्रिक हाजिरी की अनिवार्यता
लोहिया पुरुष अस्पताल के मुख्य चिकित्सा अधीक्षक (सीएमएस) डॉ. जगमोहन शर्मा ने स्पष्ट किया कि अस्पताल में कार्यरत लगभग ढाई सौ नियमित, संविदा और आउटसोर्सिंग कर्मचारियों के लिए अब बायोमेट्रिक हाजिरी पूरी तरह से अनिवार्य है। इस नई कार्यप्रणाली के लागू होते ही, सीएमएस कार्यालय से पारंपरिक हाजिरी रजिस्टर को हटा दिया गया है। अब किसी भी कर्मचारी को रजिस्टर पर हस्ताक्षर करके अपनी उपस्थिति दर्ज कराने की अनुमति नहीं होगी।
अस्पताल प्रशासन का मानना है कि यह कदम स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता में सुधार और कार्यस्थल पर अनुशासन बनाए रखने की दिशा में एक महत्वपूर्ण प्रशासनिक प्रयास है। इस व्यवस्था के लागू होने से मरीजों को मिलने वाली चिकित्सा सेवाओं में अधिक पारदर्शिता आने और समयबद्धता सुनिश्चित होने की उम्मीद है।
यह पहल केवल उपस्थिति दर्ज कराने तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका व्यापक प्रभाव अस्पताल के संचालन और रोगी देखभाल की गुणवत्ता पर भी पड़ने की उम्मीद है। पूर्व में, उपस्थिति रजिस्टर में हेरफेर या देर से आने वाले कर्मचारियों के कारण स्वास्थ्य सेवाओं के वितरण में देरी की शिकायतें आम थीं। जिलाधिकारी ने इन चिंताओं को गंभीरता से लेते हुए तत्काल सुधारात्मक कार्रवाई के निर्देश दिए थे। बायोमेट्रिक प्रणाली, जो उंगली के निशान या चेहरे की पहचान जैसी तकनीकों का उपयोग करती है, धोखाधड़ी को रोकने में अत्यधिक प्रभावी मानी जाती है।
प्रारंभिक तकनीकी समस्याओं के बावजूद, अस्पताल प्रबंधन ने इन्हें जल्द से जल्द दूर करने का आश्वासन दिया है। कर्मचारियों को भी इस नई प्रणाली के अनुकूल होने और समय पर अपनी उपस्थिति दर्ज कराने के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है। यह उम्मीद की जाती है कि आने वाले दिनों में, यह प्रणाली सुचारू रूप से कार्य करेगी और लोहिया अस्पताल में चिकित्सा सेवाओं की गुणवत्ता को एक नए स्तर पर ले जाएगी। इस परिवर्तन से न केवल कर्मचारियों में समय का पाबंद रहने की आदत विकसित होगी, बल्कि यह अस्पताल की समग्र दक्षता में भी वृद्धि करेगा, जिससे अंततः मरीजों को बेहतर और समय पर इलाज मिल सकेगा।
