फर्रुखाबाद के आलू को वैश्विक बाज़ार का रास्ता, निर्यात को बढ़ावा देने की पहल
फर्रुखाबाद में आलू के निर्यात को बढ़ावा देने के लिए जिलाधिकारी की अध्यक्षता में एपीडा के सहयोग से बैठक हुई। गुणवत्ता संवर्धन, एफपीओ गठन और नई वैश्विक मांगों पर जोर दिया गया।

द क्लिफ न्यूज़ | फर्रुखाबाद | 22 जुलाई 2026
फर्रुखाबाद जनपद के आलू को वैश्विक पहचान दिलाने और निर्यात की नई राहें खोलने के उद्देश्य से एक महत्वपूर्ण कदम उठाया गया है। जिलाधिकारी डॉ. अंकुर लाठर की अध्यक्षता में कलेक्ट्रेट सभागार, फतेहगढ़ में कृषि एवं प्रसंस्कृत खाद्य उत्पाद निर्यात विकास प्राधिकरण (एपिडा) के सहयोग से आयोजित एक बैठक में इस दिशा में ठोस पहल की गई। बैठक का मुख्य एजेंडा जनपद में उत्पादित आलू की गुणवत्ता में सुधार, विपणन को सुदृढ़ बनाना और अंतर्राष्ट्रीय बाजारों में इसकी पहुंच बढ़ाना रहा। एपीडा के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बैठक में कृषि उत्पादों के निर्यात से जुड़ी संभावनाओं और आवश्यक तकनीकी व्यवस्थाओं पर विस्तृत जानकारी दी, जिससे किसानों को अपनी उपज का बेहतर मूल्य मिलने की उम्मीद जगी है।
जिलाधिकारी डॉ. अंकुर लाठर ने इस अवसर पर स्पष्ट निर्देश जारी करते हुए कहा कि जनपद के कृषि उत्पादों को राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय बाजारों तक सुगमता से पहुंचाने के लिए सभी आवश्यक व्यवस्थाएं तय समय-सीमा के भीतर पूरी की जाएं। उन्होंने ई-जीएम पोर्टल पर जनपद के प्रासंगिक डेटा को शीघ्र अपलोड करने, उच्च गुणवत्ता वाले बीजों की निर्बाध उपलब्धता सुनिश्चित करने और विशेष रूप से निर्यात योग्य आलू के उत्पादन को व्यापक स्तर पर प्रोत्साहित करने पर ज़ोर दिया। जिलाधिकारी का मानना है कि इस प्रयास से न केवल किसानों को उनकी कड़ी मेहनत का उचित आर्थिक प्रतिफल प्राप्त होगा, बल्कि वे आत्मनिर्भर और सशक्त भी बनेंगे, जो जनपद के समग्र आर्थिक विकास में मील का पत्थर साबित होगा।
किसानों को संगठित करने पर विशेष बल, एफपीओ गठन की कवायद
बैठक के दौरान, आलू उत्पादन, गुणवत्ता संवर्धन और विपणन के क्षेत्र में विशेष रूप से कार्य करने के लिए एक समर्पित कृषक उत्पादक संगठन (एफपीओ) के गठन पर भी गहन विचार-विमर्श किया गया। इस कदम का मुख्य उद्देश्य छोटे और मध्यम किसानों को एक साथ लाकर उन्हें सामूहिक सौदेबाजी की शक्ति प्रदान करना है, जिससे वे बाजार में बेहतर मूल्य प्राप्त कर सकें। इसके साथ ही, किसानों और व्यापारियों को आधुनिक ग्रेडिंग, पैकेजिंग और सॉर्टिंग जैसी प्रणालियों को विकसित करने तथा आवश्यक तकनीकी सहायता उपलब्ध कराने की महत्ता पर भी प्रकाश डाला गया। जिलाधिकारी ने फर्रुखाबाद में मैंगो पल्प यूनिट स्थापित करने की संभावनाओं का भी पता लगाने का निर्देश दिया, जो आम उत्पादकों के लिए एक अतिरिक्त आय का स्रोत बन सकती है।
आलू उत्पादन में फर्रुखाबाद की सशक्त स्थिति
फर्रुखाबाद जनपद, आलू उत्पादन के मामले में एक महत्वपूर्ण स्थान रखता है। बैठक में प्रस्तुत आंकड़ों के अनुसार, लगभग 43,400 हेक्टेयर क्षेत्रफल में आलू की खेती की जाती है, जबकि 16.75 हेक्टेयर भूमि पर आम की बागवानी होती है। प्रतिवर्ष औसतन 15.53 लाख मीट्रिक टन आलू का उत्पादन होता है, जो फर्रुखाबाद को उत्तर प्रदेश के प्रमुख आलू उत्पादक जिलों की श्रेणी में स्थापित करता है। एपीडा, जो कृषि निर्यात को बढ़ावा देने के लिए समर्पित है, किसानों को पंजीकरण, तकनीकी परामर्श, बाजार विश्लेषण और प्रशिक्षण जैसी मूल्यवान सेवाएं प्रदान करता है, जिसका लाभ इस क्षेत्र के किसानों को मिलेगा।
निर्यात के लिए गुणवत्ता मानक और वैश्विक मांग
निर्यात को गति देने के लिए आलू की गुणवत्ता पर विशेष ध्यान दिया जाना अत्यंत आवश्यक है। बैठक में इस बात पर ज़ोर दिया गया कि अंतर्राष्ट्रीय बाजार में 45 से 80 मिलीमीटर आकार के, साफ, चिकने और किसी भी प्रकार के दाग-धब्बे या क्षरण से मुक्त आलू की सर्वाधिक मांग रहती है। निर्यातकों के लिए एक आकर्षक प्रावधान के तहत, परिवहन भाड़े पर 25 प्रतिशत तक की सब्सिडी की व्यवस्था भी की गई है, जो निर्यात को और अधिक किफायती और प्रतिस्पर्धी बनाने में सहायक सिद्ध होगी। आलू विकास अधिकारी ने किसानों को वैज्ञानिक खेती के तरीकों को अपनाने, मिट्टी की उर्वरता का परीक्षण कराने और संतुलित उर्वरकों का उपयोग करने की सलाह दी। उन्होंने जैविक खाद जैसे वर्मी कम्पोस्ट और हरी खाद के प्रयोग को बढ़ावा देने पर भी बल दिया, जिससे न केवल मिट्टी की गुणवत्ता सुधरेगी बल्कि उत्पादित आलू की पौष्टिकता भी बढ़ेगी।
रूस और इराक से आई नई मांग, किसानों के लिए बढ़ी उम्मीदें
वर्तमान में, फर्रुखाबाद का आलू सऊदी अरब, नेपाल, ओमान, इंडोनेशिया, संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) और श्रीलंका जैसे देशों को निर्यात किया जा रहा है। हाल ही में, 'कुफरी बहार' किस्म के आलू के लिए रूस से एक नई मांग प्राप्त हुई है, वहीं इराक ने भी भारतीय आलू के आयात को अपनी मंजूरी दे दी है। इन नई वैश्विक मांगों ने जनपद के किसानों के लिए निर्यात की संभावनाओं को और अधिक विस्तृत कर दिया है। एपीडा के अधिकारियों ने प्रदेश में उपलब्ध छह पैकिंग सेंटरों की जानकारी साझा करते हुए बताया कि किसान वाराणसी स्थित कार्यालय से आवश्यक तकनीकी सहायता प्राप्त कर सकते हैं, जिससे उन्हें निर्यात प्रक्रिया में सहूलियत होगी।
