फर्रुखाबाद: ईमादपुर में 28-29 जुलाई को प्रस्तावित मेले की तैयारियां ज़ोरों पर
फर्रुखाबाद के ईमादपुर में 28-29 जुलाई को प्रस्तावित प्राचीन मेले की तैयारियों का जायजा लेने पहुंचे प्रतिनिधि नदीम अहमद फारूकी ने अधिकारियों को दिशा-निर्देश दिए।

द क्लिफ न्यूज़ | फर्रुखाबाद | 25 जुलाई 2026
फर्रुखाबाद के ईमादपुर में 28 और 29 जुलाई को प्रस्तावित प्राचीन मेले के आयोजन को लेकर तैयारियां अंतिम चरण में हैं। मेले की तैयारियों का जायजा लेने के लिए दृष्टिकृत अध्यक्ष प्रतिनिधि नदीम अहमद फारूकी ने स्वयं गांव का दौरा किया और संबंधित अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए। इस दौरान, उन्होंने विशेष रूप से स्वच्छता, विद्युत व्यवस्था और पार्क के रखरखाव पर जोर दिया।
नदीम अहमद फारूकी ने ग्राम भ्रमण के दौरान उपस्थित सफाई कर्मियों और बिजली कर्मियों के साथ-साथ स्थानीय अधिकारियों से भी संवाद किया। उन्होंने मौके पर खड़े होकर विभिन्न स्थानों पर सफाई कार्य का निरीक्षण किया। बारात घर और सार्वजनिक शौचालयों की स्थिति का भी जायजा लिया गया, जहां किसी भी तरह की कमी पाए जाने पर तत्काल उसे ठीक करने के निर्देश दिए गए। खराब पड़ी विद्युत लाइटों को मौके पर ही ठीक कराया गया, ताकि मेले के दौरान किसी प्रकार की असुविधा न हो।
मेले की व्यवस्थाओं को लेकर कड़े निर्देश
स्वच्छता अभियान के तहत, कीटनाशक दवाइयों का छिड़काव भी करवाया गया, ताकि मच्छरों और अन्य कीटाणुओं के पनपने की संभावना को समाप्त किया जा सके। जल निगम के कर्मचारियों को भी निर्देशित किया गया कि वे किसी भी लंबित मरम्मत कार्य को शीघ्रता से पूरा करें। इस दौरान, अंबेडकर पार्क में वृक्षारोपण कार्यक्रम भी चलाया गया, जिससे पर्यावरण को हरा-भरा बनाने की पहल की गई।
नदीम अहमद फारूकी ने स्पष्ट किया कि मेले से पूर्व सभी कमियों को दूर करना अनिवार्य है और इस संबंध में सख्त निर्देश जारी किए गए हैं। उन्होंने जनता की समस्याओं को भी सुना और उनके त्वरित समाधान का आश्वासन दिया। इस अवसर पर क्षेत्रीय सभासद भी उपस्थित रहे, जिन्होंने स्थानीय स्तर पर व्यवस्थाओं को सुचारू बनाने में सहयोग का भरोसा दिलाया।
ऐतिहासिक पृष्ठभूमि और सांस्कृतिक महत्व
फर्रुखाबाद क्षेत्र का इतिहास अत्यंत प्राचीन है, जिसकी जड़ें कांस्य युग तक जाती हैं। इस क्षेत्र से प्राप्त प्रागैतिहासिक हथियारों और औजारों के अलावा, संकिसा और कंपिल जैसे स्थानों से बड़ी संख्या में पत्थर की मूर्तियां मिली हैं, जो इस क्षेत्र की प्राचीन मूर्तिकला में इसके महत्व को दर्शाती हैं। कहा जाता है कि प्राचीन काल में इस क्षेत्र में आर्यों का निवास था, जो कुरुओं के निकट सहयोगी थे। पारंपरिक इतिहास के अनुसार, इस जिले का इतिहास प्राचीन काल से लेकर महाभारत युद्ध की समाप्ति तक का वर्णन पुराणों और महाभारत में मिलता है। यह प्राचीन मेला इस क्षेत्र की सांस्कृतिक विरासत को संरक्षित करने और बढ़ावा देने का एक महत्वपूर्ण प्रयास है।
