फर्रुखाबाद: घटिया कार्य से गांवों पर कटान का खतरा, ठेकेदार-अधिकारियों की मिलीभगत का आरोप
फर्रुखाबाद के कई गांवों को गंगा कटान से बचाने के लिए 7 करोड़ की लागत से हुआ कार्य बेहद घटिया पाया गया है। ग्रामीणों ने ठेकेदार और अधिकारियों पर मिलीभगत कर धन के बंदरबांट का आरोप लगाया है।

द क्लिफ न्यूज़ | फर्रुखाबाद | 30 जुलाई 2026
जनपद फर्रुखाबाद की तहसील सदर के अंतर्गत पंखियों की मढ़ैया, दिलीप की मढ़ैया, कटरी भीमपुर सहित कई गांवों को गंगा नदी के कटान से बचाने के लिए सिंचाई विभाग द्वारा 7 करोड़ रुपये से अधिक की लागत से कराए जा रहे कार्य में भारी अनियमितता का मामला सामने आया है। ग्रामीणों ने ठेकेदार और विभागीय अधिकारियों की मिलीभगत से अत्यंत घटिया गुणवत्ता का काम करने और सरकारी धन के बंदरबांट का गंभीर आरोप लगाया है। इस कारण गांवों पर कटान का खतरा मंडरा रहा है, जबकि ग्रामीण भयभीत हैं।
गांववासियों ने बताया कि गंगा नदी की जरा सी धारा आते ही दिखावे के लिए किए गए सारे काम बह गए और लोगों के मकान कटान की जद में आ गए हैं। जब ग्रामीणों ने ठेकेदार से काम ढंग से करने का आग्रह किया, तो उन्हें कथित तौर पर सरकारी काम में बाधा डालने पर मुकदमे में फंसाकर जेल भेजने की धमकी दी गई, जिसके चलते वे चुप रहने को मजबूर हो गए। इस धमकी के डर से ठेकेदार और अधिकारी अपनी मनमानी करते रहे और परियोजना का अधिकांश धन हड़प लिया गया।
कार्य की गुणवत्ता पर गंभीर सवाल, सुरक्षा दावों की पोल खुली
सरकारी परियोजना का उद्देश्य पंखियों की मढ़ैया, दिलीप की मढ़ैया और कटरी भीमपुर जैसे गांवों को गंगा कटान से सुरक्षित करना था। इसके लिए पार्कूपाइन, जिओ बैग और स्टड लगाने का कार्य स्वीकृत किया गया था। हालांकि, ग्रामीणों के अनुसार, ठेकेदार ने जिओ बैग की जगह सीमेंट की बोरियों में रेत भरकर इस्तेमाल किया और केवल ऊपरी दिखावा किया। आरोप है कि इस कार्य की गुणवत्ता इतनी खराब थी कि गंगा की मामूली धारा आते ही लगाए गए सभी सुरक्षा उपाय नदी में समा गए।
गांववासियों ने बताया कि ठेकेदार के लोग अक्सर यह कहते थे कि एक बार पानी आ जाए, हमारा काम खत्म, उसके बाद जो करना है वह कर लेना, हमारा कुछ नहीं होने वाला। इस बेफिक्री और लापरवाही के कारण अब कई गांवों पर कटान का खतरा बढ़ गया है, और ग्रामीण अपने घरों को खोने के डर से सहमे हुए हैं।
वन विभाग की जमीन से शीशम के पेड़ काटने का भी आरोप
मामले को और भी गंभीर बनाते हुए, ग्रामीणों ने आरोप लगाया है कि ठेकेदार और अधिकारियों ने अपने किए कराए पर पर्दा डालने के उद्देश्य से वन विभाग की गौशाला की जमीन पर खड़े शीशम के पेड़ों को बिना किसी अनुमति के काट डाला। इन कटे हुए पेड़ों की डालियों को बोरियों और स्टड के आगे लगाकर यह दिखाने की कोशिश की गई कि इससे पानी का बहाव रुकेगा। हालांकि, गंगा के कटान को रोकने में यह प्रयास भी विफल रहा। फर्रुखाबाद विकास मंच के जिला अध्यक्ष भईयन मिश्रा ने इस संबंध में जानकारी मिलने पर घटनास्थल का दौरा किया और ग्रामीणों की व्यथा सुनी।
सामाजिक कार्यकर्ता ने की कड़ी कार्रवाई की मांग
फर्रुखाबाद विकास मंच के जिला अध्यक्ष भईयन मिश्रा ने घटिया कार्य की निंदा करते हुए कहा कि इस पूर्ण रूप से जिम्मेदार ठेकेदार और विभागीय अधिकारी हैं, जिन्होंने सरकारी धन का दुरुपयोग किया है। उन्होंने कहा कि इन सभी के विरुद्ध कड़ी कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी और इस मामले को लेकर शीघ्र ही आंदोलन प्रारंभ किया जाएगा। मिश्रा ने बताया कि जल्द ही एक प्रतिनिधिमंडल जिलाधिकारी फर्रुखाबाद से मिलकर इस पूरे मामले की जांच और दोषी पाए जाने वाले ठेकेदार व अधिकारियों के विरुद्ध त्वरित कार्रवाई की मांग करेगा। उन्होंने चेतावनी दी है कि यदि समय रहते कार्रवाई नहीं हुई, तो अनिश्चितकालीन धरना प्रदर्शन सहित अन्य आंदोलन किए जाएंगे।
भईयन मिश्रा ने वन विभाग द्वारा गौशाला की जमीन से शीशम के पेड़ काटने के मामले पर भी सवाल उठाया। उन्होंने कहा कि शीशम काटना प्रतिबंधित है, ऐसे में इसकी अनुमति किसने दी, इसकी भी गहन जांच होनी चाहिए। उन्होंने वन विभाग से आग्रह किया कि वे अपने स्तर से इन लोगों के विरुद्ध मुकदमा दर्ज करवाएं।
ग्रामीण राजीव वर्मा, रामू राजपूत, राम लखन वर्मा, पंकज राठौर, सत्यनारायण शाक्य और अन्य ने बताया कि ठेकेदार की धमकी के कारण वे अब तक चुप थे। उन्होंने कहा कि अधिकारी अपनी मौज में हैं, लेकिन ग्रामीण कटान के डर से भयभीत हैं क्योंकि किसी भी समय गंगा नदी उनके घरों को अपने आगोश में ले सकती है। यह स्थिति सरकारी परियोजनाओं के क्रियान्वयन में भ्रष्टाचार और जवाबदेही की कमी को उजागर करती है, जिस पर तत्काल ध्यान देने की आवश्यकता है।
