फर्रुखाबाद एनआरसी: कुपोषण उन्मूलन में 95% सफलता, बना मिसाल
फर्रुखाबाद एनआरसी ने गंभीर कुपोषण से जूझ रहे 95% बच्चों को स्वस्थ कर कुपोषण मुक्त बनाने में अभूतपूर्व सफलता हासिल की है। मात्र 10 बिस्तरों वाले इस केंद्र को प्रदेश के टॉप-10 एनआरसी में शामिल किया गया है।

द क्लिफ न्यूज़ | फर्रुखाबाद | 22 जुलाई 2026
फर्रुखाबाद जिले में गंभीर कुपोषण के विरुद्ध चलाए जा रहे अभियान में डॉ. राम मनोहर लोहिया जिला चिकित्सालय स्थित पोषण पुनर्वास केंद्र (एनआरसी) एक आशा की किरण बनकर उभरा है। केंद्र ने अपनी प्रभावी उपचार व्यवस्था और सुदृढ़ फॉलोअप तंत्र के माध्यम से 95 प्रतिशत बच्चों को कुपोषण से पूर्णतः निजात दिलाने में उल्लेखनीय सफलता प्राप्त की है। मात्र दस शैय्याओं की क्षमता वाला यह एनआरसी, प्रदेश के शीर्ष दस केंद्रों में अपनी विशेष पहचान बना चुका है, जहाँ गंभीर रूप से कुपोषित बच्चों के इलाज के लिए लगातार मांग बनी हुई है। जून माह में इस केंद्र ने 162 बेड-डे ऑक्यूपेंसी दर्ज कर अपनी उच्च कार्यक्षमता और विश्वसनीयता को प्रदर्शित किया है।
मुख्य चिकित्सा अधिकारी (सीएमओ) डॉ. आनंद उपाध्याय ने बताया कि स्वास्थ्य विभाग गंभीर तीव्र कुपोषण से ग्रसित बच्चों को सामान्य जीवनशैली में वापस लाने के लिए पूर्णतः प्रतिबद्ध है। एनआरसी में भर्ती प्रत्येक बच्चे को लगभग 14 दिनों तक विशेषज्ञ चिकित्सकों की कड़ी निगरानी में रखा जाता है। इस दौरान, दवाइयों, उच्च-ऊर्जा घनत्व वाले पौष्टिक आहार और नियमित स्वास्थ्य जांच जैसी सभी आवश्यक सेवाएं पूर्णतः निःशुल्क प्रदान की जाती हैं। इसके अतिरिक्त, बच्चे के साथ रुकने वाली माँ के भोजन की व्यवस्था भी नि:शुल्क की जाती है, साथ ही उन्हें प्रतिदिन ₹50 की प्रोत्साहन राशि भी दी जाती है। यह बहुआयामी सहायता न केवल परिवारों को आर्थिक बोझ से राहत देती है, बल्कि उनका मनोबल भी बढ़ाती है।
सुदृढ़ फॉलोअप प्रणाली का महत्व
डॉ. उपाध्याय ने इस बात पर विशेष जोर दिया कि अस्पताल से छुट्टी मिलने के बाद भी प्रत्येक बच्चे की प्रगति की निरंतर निगरानी की जाती है। कुपोषण को जड़ से समाप्त करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम के रूप में, प्रत्येक बच्चे का 15-15 दिनों के अंतराल पर चार बार फॉलोअप सुनिश्चित किया जाता है। प्रत्येक फॉलोअप विजिट पर अभिभावकों को ₹140 की प्रोत्साहन राशि प्रदान की जाती है। यह प्रोत्साहन प्रणाली यह सुनिश्चित करती है कि माता-पिता नियमित रूप से अपने बच्चों को जांच के लिए लाएं, जिससे उनके पोषण स्तर में लगातार सुधार बना रहता है। यह व्यवस्थित फॉलोअप दृष्टिकोण कुपोषण पर विजय पाने की रणनीति का एक अभिन्न अंग बन गया है।
समर्पित टीम का अथक प्रयास
पोषण पुनर्वास केंद्र का दैनिक संचालन चिकित्सा अधिकारी डॉ. विवेक सक्सेना के नेतृत्व में अत्यंत समर्पण और जवाबदेही के साथ किया जा रहा है। डॉ. सक्सेना की कुशल टीम में डायटीशियन श्रीमती संगीता शुक्ला, छह प्रशिक्षित स्टाफ नर्स और एक समर्पित रसोइया शामिल हैं। यह टीम न केवल बच्चों की व्यक्तिगत देखभाल करती है, बल्कि यह सुनिश्चित करती है कि उन्हें संतुलित और पौष्टिक आहार मिले। इसके साथ ही, माताओं को शिशु देखभाल, स्तनपान के महत्व और घर पर पौष्टिक आहार तैयार करने की विधियों पर विस्तृत परामर्श भी प्रदान किया जाता है। टीम का मुख्य लक्ष्य केवल बच्चों का वजन बढ़ाना नहीं, बल्कि पूरे परिवार को पोषण संबंधी स्वास्थ्य के प्रति जागरूक और सशक्त बनाना है।
जिला प्रशासन का सक्रिय सहयोग
यह अभियान जिला प्रशासन के सक्रिय सहयोग से और भी प्रभावी हो रहा है। जिलाधिकारी और मुख्य चिकित्सा अधिकारी नियमित अंतराल पर एनआरसी का दौरा कर भर्ती बच्चों और उनकी माताओं का हौसला बढ़ाते हैं। इस दौरान, बच्चों को फल, वस्त्र और बेबी जॉनसन किट जैसे उपहार भेंट किए जाते हैं, जो उनके मनोवैज्ञानिक स्वास्थ्य और उपचार के प्रति सकारात्मक दृष्टिकोण को बढ़ावा देते हैं। इस प्रकार की पहलें परिवारों में बच्चों के उचित पोषण और नियमित स्वास्थ्य देखभाल के महत्व के प्रति एक सकारात्मक सोच विकसित करने में सहायक सिद्ध हो रही हैं।
जनपदवासियों से समय पर उपचार की अपील
मुख्य चिकित्सा अधिकारी ने जिले के सभी नागरिकों से अपील की है कि यदि किसी भी बच्चे में गंभीर कुपोषण के लक्षण दिखाई दें, तो इसे गंभीरता से लें और छिपाने का प्रयास न करें। ऐसे बच्चों को तत्काल नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र या पोषण पुनर्वास केंद्र में लाकर आवश्यक उपचार दिलवाना चाहिए। डॉ. उपाध्याय ने पुनः दोहराया कि समय पर निदान, उचित पौष्टिक आहार और नियमित चिकित्सकीय फॉलोअप कुपोषण को सफलतापूर्वक परास्त करने के अचूक उपाय हैं। फर्रुखाबाद का यह एनआरसी आज पूरे प्रदेश के लिए एक प्रेरणास्रोत और अनुकरणीय मॉडल के रूप में स्थापित हुआ है।
