फर्रुखाबाद: डीएम ने शिक्षा में सुधार के दिए निर्देश
फर्रुखाबाद में डीएम ने बेसिक शिक्षा की समीक्षा की। विद्यालयों में गुणवत्ता सुधार, जर्जर भवनों को गिराने और कायाकल्प योजना के मानकों को पूरा करने...

फर्रुखाबाद | संवाददाता: संदीप तिवारी
द क्लिफ न्यूज़ | फर्रुखाबाद | 9 सितंबर 2026
फर्रुखाबाद के कलेक्ट्रेट सभागार, फतेहगढ़ में जिलाधिकारी डॉ. अंकुर लाठर ने बेसिक शिक्षा विभाग के अधिकारियों के साथ एक महत्वपूर्ण समीक्षा बैठक की अध्यक्षता की। इस बैठक में प्राथमिक और उच्च प्राथमिक विद्यालयों में शैक्षणिक गुणवत्ता, बुनियादी सुविधाओं और छात्र नामांकन से संबंधित विभिन्न योजनाओं की प्रगति पर गहनता से चर्चा की गई। जिलाधिकारी ने स्पष्ट किया कि बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध कराना प्रशासन की सर्वोच्च प्राथमिकता है और इस दिशा में किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
बैठक के दौरान, जिलाधिकारी ने शिक्षकों की नियमित उपस्थिति, छात्र नामांकन दर को बढ़ाने, शिक्षण कार्यों के निष्पादन में निरंतरता बनाए रखने और मध्यान्ह भोजन (मिड-डे मील) की व्यवस्था को सुचारू रूप से संचालित करने पर विशेष बल दिया। उन्होंने अधिकारियों को निर्देशित किया कि शासन द्वारा संचालित सभी योजनाओं का लाभ लक्षित और पात्र छात्रों तक पूरी पारदर्शिता के साथ पहुंचाया जाए। विद्यार्थियों को समय पर निःशुल्क पाठ्य-पुस्तकें, यूनिफॉर्म, जूते-मोजे और स्कूल बैग जैसी आवश्यक सामग्री उपलब्ध कराना सुनिश्चित किया जाए। जिन विद्यालयों में छात्र उपस्थिति संतोषजनक नहीं है, वहां के अभिभावकों से व्यक्तिगत रूप से संपर्क कर उन्हें अपने बच्चों को नियमित रूप से स्कूल भेजने के लिए प्रेरित करने के उपाय खोजने के निर्देश दिए गए। विद्यालयों में स्वच्छता, शुद्ध पेयजल की उपलब्धता और शौचालयों की स्थिति को भी बेहतर बनाने पर जोर दिया गया।
प्राथमिक विद्यालयों में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा सर्वोपरि
जिलाधिकारी डॉ. अंकुर लाठर ने अपने संबोधन में इस बात पर विशेष जोर दिया कि प्राथमिक विद्यालयों में बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्रदान करना जिला प्रशासन की सर्वोपरि प्राथमिकता है। उन्होंने कहा कि शिक्षा की गुणवत्ता से कोई समझौता नहीं किया जा सकता और प्रत्येक बच्चे को उसकी क्षमता के अनुसार सीखने के अवसर मिलने चाहिए। इस लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए, उन्होंने शिक्षकों को नवीनतम शिक्षण विधियों को अपनाने और बच्चों की व्यक्तिगत आवश्यकताओं पर ध्यान केंद्रित करने के लिए प्रोत्साहित किया। छात्र नामांकन को बढ़ाने के लिए, उन्होंने ग्राम प्रधानों, स्थानीय निकायों और स्वयं सहायता समूहों के साथ मिलकर काम करने के निर्देश दिए, ताकि समाज के सभी वर्गों को शिक्षा के महत्व के बारे में जागरूक किया जा सके। विशेष रूप से पिछड़े और वंचित समुदायों के बच्चों को स्कूल लाने के लिए विशेष अभियान चलाने पर भी चर्चा हुई।
कायाकल्प योजना के मानकों का पालन अनिवार्य
कायाकल्प योजना के तहत निर्धारित 19 मानक बिंदुओं को पूरा करने में किसी भी प्रकार की लापरवाही को गंभीरता से लिया जाएगा। जिलाधिकारी ने अधिकारियों को चेतावनी दी कि वे इस योजना के क्रियान्वयन में संवेदनशीलता और तत्परता दिखाएं। इस योजना का उद्देश्य विद्यालयों में मूलभूत सुविधाओं जैसे स्वच्छ पेयजल, कार्यात्मक शौचालय, बिजली, खेल का मैदान, पुस्तकालय और सुरक्षित भवन सुनिश्चित करना है। उन्होंने जोर देकर कहा कि इन मानकों को केवल कागजों पर ही नहीं, बल्कि धरातल पर भी पूरा किया जाना चाहिए। पेयजल की टंकियों की सफाई जैसे महत्वपूर्ण कार्य को तीन दिनों के भीतर पूरा करने और उसकी रिपोर्ट प्रस्तुत करने के स्पष्ट निर्देश दिए गए, जो इस बात का संकेत है कि स्वच्छता पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।
जर्जर भवनों का ध्वस्तीकरण और सुरक्षित वातावरण
बैठक में जर्जर और अनुपयोगी भवनों के ध्वस्तीकरण की कार्यवाही को आगामी एक सप्ताह के भीतर पूरा करने के लिए स्पष्ट आदेश जारी किए गए। यह एक महत्वपूर्ण कदम है जो छात्रों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए उठाया गया है। पुराने और असुरक्षित भवनों में कक्षाओं का संचालन बच्चों के लिए गंभीर खतरा पैदा कर सकता है। जिलाधिकारी ने कहा कि ऐसे भवनों की तत्काल पहचान कर उन्हें गिराने की प्रक्रिया को प्राथमिकता दी जाए। इसके साथ ही, उन्होंने विद्यालयों में एक अनुशासित एवं सुरक्षित शैक्षणिक वातावरण बनाए रखने को भी महत्वपूर्ण बताया। इसमें न केवल भौतिक सुरक्षा शामिल है, बल्कि छात्रों के बीच आपसी सम्मान और सहिष्णुता को बढ़ावा देना भी शामिल है। बच्चों के सीखने के स्तर का नियमित रूप से आकलन करने के निर्देश दिए गए ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि वे पाठ्यक्रम के अनुरूप प्रगति कर रहे हैं।
निरीक्षण की प्रक्रिया और जवाबदेही तय
जिलाधिकारी ने विद्यालयों के नियमित निरीक्षण की प्रक्रिया को अधिक प्रभावी बनाने के निर्देश दिए, ताकि शैक्षणिक गुणवत्ता का वास्तविक परीक्षण किया जा सके। उन्होंने विशेष रूप से पी.एम. श्री विद्यालयों में रंगाई-पुताई और अन्य आवश्यक शिक्षण संसाधनों की उपलब्धता को अविलंब सुनिश्चित करने का आदेश दिया। यह इंगित करता है कि सरकार विद्यालयों को आधुनिक और आकर्षक बनाने के लिए प्रतिबद्ध है, ताकि छात्र स्कूल आने के लिए प्रेरित हों। बेसिक शिक्षा अधिकारी को निर्देशित किया गया कि निरीक्षण के दौरान पाई जाने वाली किसी भी कमी का तत्काल समाधान किया जाए। यदि खंड शिक्षा अधिकारी अपने कार्यों में लापरवाही बरतते पाए जाते हैं, तो उनके विरुद्ध नियमानुसार सख्त कार्रवाई की जाएगी। इस तरह की जवाबदेही तय करने से अधिकारियों को अपने कर्तव्यों के प्रति अधिक सतर्क रहने की प्रेरणा मिलेगी।
समन्वय, टीम भावना और भविष्य की योजनाएं
इस समीक्षा बैठक में मुख्य विकास अधिकारी विनोद कुमार गौड़, परियोजना निदेशक डीआरडीए कपिल कुमार और जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी विश्वनाथ प्रताप सिंह सहित विभाग के अन्य वरिष्ठ अधिकारी और कर्मचारी उपस्थित रहे। जिलाधिकारी ने कहा कि भविष्य में शिक्षा संबंधी योजनाओं की प्रगति की निरंतर समीक्षा की जाएगी, जिसका उद्देश्य शिक्षा व्यवस्था में गुणात्मक सुधार लाना है। उन्होंने इस बात पर बल दिया कि प्रशासन का अंतिम लक्ष्य प्रत्येक बच्चे को एक उत्कृष्ट शैक्षणिक परिवेश प्रदान करना है, जहाँ सभी मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध हों। उन्होंने सभी विभागीय अधिकारियों को टीम भावना के साथ कार्य करते हुए निर्धारित समय-सीमा में लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए प्रोत्साहित किया। यह दृष्टिकोण यह सुनिश्चित करेगा कि विभिन्न विभाग मिलकर काम करें और शिक्षा प्रणाली को बेहतर बनाने के लिए एक साझा लक्ष्य की ओर अग्रसर हों। सभी को मिलकर काम करना होगा ताकि फर्रुखाबाद के प्रत्येक बच्चे को बेहतर शिक्षा मिल सके।
