पेपर लीक पर नड्डा का राहुल पर वार: 'छात्रों के मुद्दे का राजनीतिकरण बंद करें'
भाजपा अध्यक्ष जेपी नड्डा ने परीक्षा घोटालों पर राहुल गांधी के आरोपों का जवाब देते हुए कहा कि कांग्रेस केवल राजनीतिक लाभ के लिए चुनिंदा मामलों को उठा रही है।

द क्लिफ न्यूज़ | नई दिल्ली | 22 जुलाई 2026
भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के राष्ट्रीय अध्यक्ष जगत प्रकाश नड्डा ने कांग्रेस नेता राहुल गांधी के उन आरोपों का जोरदार खंडन किया है, जिनमें उन्होंने परीक्षा घोटालों और पेपर लीक की घटनाओं को लेकर सरकार पर निशाना साधा था। नई दिल्ली में 22 जुलाई 2026 को आयोजित एक प्रेसवार्ता में नड्डा ने राहुल गांधी पर छात्रों के संवेदनशील मुद्दों का राजनीतिकरण करने और परीक्षा व्यवस्था में अनियमितताओं पर चयनात्मक रवैया अपनाने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि सरकार युवाओं के भविष्य से जुड़े इन मामलों को गंभीरता से ले रही है और पारदर्शी परीक्षा व्यवस्था सुनिश्चित करने के लिए प्रतिबद्ध है।
जेपी नड्डा ने कहा कि किसी भी परीक्षा में अनियमितता पाए जाने पर दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने स्पष्ट किया कि सरकार किसी भी स्तर पर होने वाले पेपर लीक या परीक्षा संबंधी धांधली को बर्दाश्त नहीं करेगी और इसकी पूरी सच्चाई देश के सामने लाई जाएगी। उन्होंने यह भी कहा कि केंद्र सरकार निरंतर परीक्षा सुधारों की दिशा में कदम उठा रही है और छात्रों के हितों को सर्वोपरि प्राथमिकता दी जा रही है।
विपक्ष पर चुनिंदा मामले उठाने का आरोप
भाजपा अध्यक्ष ने विपक्षी दलों, विशेषकर कांग्रेस पर निशाना साधते हुए कहा कि वे केवल उन्हीं मामलों को उठा रहे हैं जिनसे उन्हें राजनीतिक लाभ मिल सकता है। उन्होंने झारखंड और तेलंगाना जैसे गैर-भाजपा शासित राज्यों में भी परीक्षा संबंधी अनियमितताओं का उल्लेख करते हुए कांग्रेस से सवाल किया कि उन राज्यों में हुई घटनाओं पर पार्टी का क्या रुख है। नड्डा ने आरोप लगाया कि विपक्ष केवल भ्रम फैलाने की कोशिश कर रहा है और वास्तविक समाधान खोजने में रुचि नहीं रखता।
नड्डा ने कहा कि सरकार संसद में परीक्षा सुधार, भर्ती प्रक्रियाओं को सुगम बनाने और पेपर लीक जैसे गंभीर मुद्दों पर रचनात्मक चर्चा के लिए पूरी तरह तैयार है। उन्होंने विपक्ष से अपील की कि वे युवाओं से जुड़े इन संवेदनशील विषयों को राजनीति का जरिया न बनाएं, बल्कि सकारात्मक भूमिका निभाते हुए समाधान की दिशा में सहयोग करें।
घायल छात्रों से मिले दोनों नेता
इसी बीच, परीक्षा घोटालों के विरोध में प्रदर्शन के दौरान घायल हुए छात्रों से मिलने के लिए भाजपा अध्यक्ष जेपी नड्डा और कांग्रेस नेता राहुल गांधी दोनों अलग-अलग अस्पतालों में पहुंचे। दोनों नेताओं ने छात्रों के स्वास्थ्य की जानकारी ली और उन्हें हर संभव मदद का आश्वासन दिया। यह मुलाकातें ऐसे समय में हुईं जब दोनों प्रमुख राजनीतिक दल पेपर लीक विवाद पर एक-दूसरे पर आरोप-प्रत्यारोप लगा रहे थे।
जेपी नड्डा ने छात्रों से मुलाकात के दौरान सरकार की ओर से परीक्षाओं में पारदर्शिता और निष्पक्षता सुनिश्चित करने के प्रयासों को दोहराया। उन्होंने कहा कि सरकार परीक्षा प्रणालियों को मजबूत करने के लिए प्रतिबद्ध है और यह सुनिश्चित करेगी कि किसी भी छात्र का भविष्य अनियमितताओं के कारण प्रभावित न हो। वहीं, राहुल गांधी ने छात्रों की समस्याओं को सुना और सरकार से त्वरित कार्रवाई की मांग की। उन्होंने कहा कि युवाओं की आवाज अनसुनी नहीं की जा सकती और सरकार को उनकी चिंताओं का समाधान करना होगा।
सामूहिक प्रयास की आवश्यकता पर जोर
भाजपा की ओर से जारी एक बयान में कहा गया कि छात्रों के भविष्य से जुड़े मुद्दों पर राजनीतिक टकराव के बजाय, सभी राजनीतिक दलों को मिलकर ऐसी एक मजबूत और निष्पक्ष परीक्षा व्यवस्था बनाने की दिशा में काम करना चाहिए, जिससे परीक्षाएं पूरी तरह से पारदर्शी और विश्वसनीय तरीके से संपन्न हो सकें। पार्टी का मानना है कि इस समस्या का समाधान आपसी सहयोग और सामूहिक प्रयासों से ही संभव है, न कि आरोप-प्रत्यारोप की राजनीति से।
भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा ने प्रेसवार्ता में इस बात पर जोर दिया कि परीक्षा अनियमितताओं के पीछे चाहे कोई भी हो, उसे बख्शा नहीं जाएगा। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि सरकार विभिन्न राज्यों में सामने आ रही इन घटनाओं को अलग-अलग चश्मे से नहीं देखती, बल्कि सभी मामलों को गंभीरता से ले रही है। उन्होंने कहा कि किसी भी राज्य में होने वाली ऐसी घटना की निष्पक्ष जांच कराई जाएगी और दोषियों को सजा दिलाई जाएगी। यह सुनिश्चित किया जाएगा कि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो।
संसद में भी छाया मुद्दा
पेपर लीक और परीक्षा व्यवस्था में सुधार की मांग को लेकर विपक्ष लगातार केंद्र सरकार पर हमलावर है। मानसून सत्र में यह मुद्दा प्रमुख राजनीतिक विषय बना हुआ है, जहां विपक्ष परीक्षा प्रणाली में व्यापक सुधार और जवाबदेही तय करने की मांग कर रहा है। सत्ता पक्ष जहां अपनी नीतियों और सुधारात्मक कदमों का बचाव कर रहा है, वहीं विपक्ष युवाओं के हितों और उनके भविष्य को लेकर सरकार पर दबाव बनाए हुए है। यह राजनीतिक बहस आने वाले दिनों में भी जारी रहने की संभावना है, क्योंकि परीक्षा घोटालों का मामला देश भर के लाखों छात्रों और अभिभावकों के लिए चिंता का विषय बना हुआ है।
इस राजनीतिक गतिरोध के बीच, यह स्पष्ट है कि पेपर लीक और परीक्षा प्रणाली में अनियमितताओं का मुद्दा अब केवल एक अकादमिक चिंता का विषय नहीं रह गया है, बल्कि यह राष्ट्रीय राजनीति का एक महत्वपूर्ण हिस्सा बन गया है। कांग्रेस और अन्य विपक्षी दल सरकार पर दबाव बनाने के लिए इन घटनाओं का उपयोग कर रहे हैं, जबकि भाजपा इन आरोपों का खंडन करते हुए अपनी सरकार द्वारा उठाए जा रहे कदमों को उजागर कर रही है। संसद के अंदर और बाहर, इस मुद्दे पर गरमागरम बहस की उम्मीद है, क्योंकि सभी पक्ष अपनी-अपनी राजनीतिक जमीन को मजबूत करने का प्रयास कर रहे हैं। अंततः, छात्रों के भविष्य को सुरक्षित रखना और परीक्षा प्रणालियों में विश्वास बहाल करना ही सबसे महत्वपूर्ण लक्ष्य होना चाहिए, जिसके लिए राजनीतिक इच्छाशक्ति और ठोस कार्यान्वयन की आवश्यकता होगी।
