पत्रकारों की गिरफ्तारी के विरोध में हरियाणा खाप की महापंचायत
हरियाणा के जींद जिले में बिनैन खाप ने 52 गांवों के प्रतिनिधियों के साथ महापंचायत कर पत्रकारों के खिलाफ दर्ज एफआईआर रद्द करने की मांग...

फर्रुखाबाद | संवाददाता: संदीप तिवारी
द क्लिफ न्यूज़ | फर्रुखाबाद | 15 अक्टूबर 2026
हरियाणा के नरवाना क्षेत्र में पत्रकारों के समर्थन में सर्वजातीय बिनैन खाप ने एक विशाल महापंचायत का आयोजन किया है। जींद जिले के दनौदा गांव स्थित ऐतिहासिक चबूतरे पर हुई इस सभा में 52 गांवों के प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया। प्रदर्शनकारियों ने राज्य सरकार से पत्रकारों के विरुद्ध दर्ज की गई सभी प्राथमिकियों को तत्काल रद्द करने की मांग की है। यह विरोध प्रदर्शन विशेष रूप से एक महिला पत्रकार की गिरफ्तारी के बाद तेज हुआ है, जिसने स्थानीय समुदाय में गहरा असंतोष पैदा किया है।
यह विवाद तब भड़का जब लिविंग इंडिया और हिंदी खबर न्यूज़ चैनल के संपादक अतुल अग्रवाल, सौरभ उपाध्याय तथा महिला पत्रकार सुदेश नैन मोर को गिरफ्तार कर लिया गया। उनकी गिरफ्तारी ने मीडिया जगत और नागरिक समाज के बीच चिंता की लहर दौड़ा दी है। विशेषकर एक महिला पत्रकार की गिरफ्तारी के बाद स्थानीय खाप में गहरा असंतोष देखा जा रहा है, जिसने इसे अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर संभावित हमले के रूप में देखा है। महापंचायत का नेतृत्व खाप प्रधान रघुवीर नैन ने किया, जिन्होंने गिरफ्तार पत्रकारों की तत्काल रिहाई की मांग उठाई। दनौदा गांव नरवाना विधानसभा क्षेत्र का सबसे बड़ा गांव है, जहाँ से भाजपा नेता कृष्ण बेदी विधायक हैं और राज्य सरकार में मंत्री भी हैं, जो इस मुद्दे को और अधिक राजनीतिक महत्व प्रदान करता है।
एफआईआर रद्द करने और निष्पक्ष जांच की मांग
महापंचायत में खाप ने एक स्पष्ट संदेश देते हुए पत्रकारों के विरुद्ध दर्ज एफआईआर को निरस्त करने की मांग की है। खाप का मानना है कि पत्रकारों को उनके कार्य के लिए निशाना बनाया जा रहा है, जो कि अलोकतांत्रिक है। इसके साथ ही, उन्होंने पूरे मामले की निष्पक्ष कानूनी जांच सुनिश्चित करने पर भी जोर दिया है, ताकि सच्चाई सामने आ सके और किसी भी निर्दोष को परेशान न किया जाए। प्रतिनिधियों ने इस बात पर बल दिया कि पत्रकारों को भयमुक्त वातावरण में काम करने का अधिकार है और उनकी आवाज को दबाया नहीं जाना चाहिए। बड़ी संख्या में जुटे ग्रामीणों ने अपनी मांगों को लेकर सरकार पर दबाव बनाया है, और इस बात के संकेत दिए हैं कि यदि उनकी मांगें पूरी नहीं होती हैं तो वे आंदोलन को और तेज कर सकते हैं।
प्रशासन और सरकार पर उठते सवाल
इस पूरे प्रकरण ने स्थानीय प्रशासन और राज्य सरकार की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। पत्रकारों की गिरफ्तारी की परिस्थितियों और उसके बाद की प्रतिक्रियाओं ने यह आशंका पैदा की है कि कहीं सरकार मीडिया की आवाज को दबाने का प्रयास तो नहीं कर रही है। खाप ने अपनी अगली रणनीति पर मंथन जारी रखा है, जिसमें आगे के विरोध प्रदर्शनों और कानूनी उपायों की योजना बनाना शामिल हो सकता है। इस विरोध प्रदर्शन पर प्रशासन की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है, जिससे स्थिति और भी अनिश्चित बनी हुई है। खाप के नेताओं ने स्पष्ट किया है कि जब तक पत्रकारों को न्याय नहीं मिलता, वे चैन से नहीं बैठेंगे। इस घटना ने हरियाणा में पत्रकारों के अधिकारों और स्वतंत्रता को लेकर एक बार फिर बहस छेड़ दी है।
