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पटवारी संघ का विरोध: वेतनवृद्धि रोकने का आदेश निरस्त करने की मांग

भिंड में प्रधानमंत्री आवास योजना की जांच में तेरह पटवारियों पर हुई दंडात्मक कार्रवाई के खिलाफ पटवारी संघ लामबंद हो गया है। संघ ने वेतनवृद्धि...

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संवाददाता: दीपेंद्र बोहरे
पटवारी संघ का विरोध: वेतनवृद्धि रोकने का आदेश निरस्त करने की मांग

भिण्ड | संवाददाता: दीपेंद्र बोहरे

द क्लिफ न्यूज़ | भिंड | 10 सितंबर 2026

मध्य प्रदेश पटवारी संघ ने भिंड जिले में प्रधानमंत्री आवास योजना (शहरी) के अंतर्गत लाभार्थियों की पात्रता की जांच के मामले में तेरह पटवारियों पर की गई दंडात्मक कार्रवाई का कड़ा विरोध दर्ज कराया है। संघ ने जिला प्रशासन से तत्कालीन एसडीएम द्वारा जारी वेतनवृद्धि रोकने के आदेश को तत्काल निरस्त करने की मांग की है। यह विरोध उन तेरह पटवारियों पर की गई कार्रवाई के विरुद्ध है, जो योजना के तहत लाभार्थियों की जांच में संलग्न थे।

संघ के जिलाध्यक्ष विनायक सिंह तोमर और सचिव सौरभ भदौरिया ने इस मामले को लेकर कलेक्टर को एक ज्ञापन सौंपा है, जिसमें तत्काल हस्तक्षेप की गुहार लगाई गई है। ज्ञापन में विस्तार से बताया गया है कि निकाय क्षेत्र के वार्ड क्रमांक एक से उनतालीस तक के हितग्राहियों की जांच के लिए संयुक्त दल गठित किए गए थे। इन दलों में विभिन्न सरकारी विभागों के अधिकारी और कर्मचारी शामिल थे, जिनमें पटवारी प्रमुख भूमिका में थे। जांच प्रक्रिया सुचारू रूप से संपन्न हुई और रिपोर्ट जमा कर दी गई।

हालांकि, रिपोर्ट जमा होने के उपरांत, विशेष रूप से १० सितंबर २०२२ के बाद, कुछ वार्डों में प्राप्त शिकायतों के आधार पर कार्रवाई का निर्णय लिया गया। इन शिकायतों की प्रामाणिकता पर संघ ने सवाल उठाए हैं। पांच जून २०२६ को जारी किए गए आदेश में, इन कर्मचारियों की दो-दो वेतनवृद्धियां असंचयी प्रभाव से रोकने का प्रावधान किया गया था। इसका अर्थ है कि यह कटौती भविष्य के वेतन में जुड़ने वाली मूल वृद्धि को प्रभावित करेगी, जो कि एक गंभीर वित्तीय दंड है।

एकपक्षीय कार्रवाई का आरोप

पटवारी संघ ने प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा है कि यह पूरी कार्रवाई प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों के विरुद्ध और पूरी तरह से एकपक्षीय है। संघ का मुख्य बिंदु यह है कि जांच प्रक्रिया के दौरान या उसके उपरांत, संबंधित तेरह पटवारियों को अपना पक्ष रखने, सफाई पेश करने या किसी भी प्रकार की सुनवाई का कोई अवसर नहीं दिया गया। बिना पर्याप्त सुनवाई के इस प्रकार की दंडात्मक कार्रवाई, विशेष रूप से जब यह उनके वित्तीय भविष्य को प्रभावित करती है, कर्मचारियों में भारी रोष और असंतोष का कारण बनी है।

संघ का मानना है कि किसी भी कर्मचारी पर कार्रवाई से पहले, उन्हें आरोपों का सामना करने और अपना बचाव करने का उचित अवसर मिलना चाहिए। यह सिद्धांत न केवल कानूनी रूप से आवश्यक है, बल्कि प्रशासनिक निष्पक्षता का भी आधार है। पटवारी संघ ने इस बात पर जोर दिया है कि यदि किसी भी पटवारी की ओर से कोई कमी या गलती हुई भी है, तो भी उचित प्रक्रिया का पालन किया जाना चाहिए था। संघ ने इस बात पर भी प्रकाश डाला कि जांच दल में अन्य सदस्य भी थे, लेकिन कार्रवाई केवल पटवारियों पर ही क्यों की गई, यह भी एक प्रश्न है।

इस कार्रवाई के जद में आए पटवारियों की सूची भी संघ ने जारी की है, जिसमें मनोज भदौरिया, ऋषभ शुक्ला, मनीष शर्मा, ऋषभ जैन, अभिजीत सिंह, अनुराग शर्मा, मनीष मिश्रा, सौरभ सिंह, प्रशांत शर्मा, आनंद पाण्डेय, राम सिंह जाटव, दिनेश शाक्य और सोहन सेन शामिल हैं। संघ ने मांग की है कि इन कर्मचारियों के साथ न्याय किया जाए, उनके हितों की रक्षा की जाए और वेतनवृद्धि रोकने के आदेश को तत्काल निरस्त किया जाए। संघ ने चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांगों को अनसुना किया गया, तो वे आंदोलन के लिए बाध्य होंगे।