पटवारी के स्थानांतरण में देरी पर कांग्रेस का सवाल, निष्पक्ष जांच की मांग
नीमच: कांग्रेस नेता प्रकाश रांका ने राजस्व विभाग के पटवारी प्रकाश चंद्र शुक्ला के स्थानांतरण आदेश को महीनों तक रोके रखने पर प्रशासन पर गंभीर सवाल उठाए हैं। उन्होंने उच्चस्तरीय जांच की मांग की है।

द क्लिफ न्यूज़ | नीमच | 7 सितंबर 2026
नीमच जिले में राजस्व विभाग के एक पटवारी के स्थानांतरण आदेश के क्रियान्वयन में महीनों की देरी को लेकर प्रशासनिक कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं। जावद विधानसभा क्षेत्र-230 से कांग्रेस नेता और पूर्व जिला उपाध्यक्ष एडवोकेट प्रकाश रांका ने इस मामले में शासन के आदेश की अवहेलना का आरोप लगाते हुए पूरे प्रकरण की निष्पक्ष एवं उच्चस्तरीय जांच की मांग की है। रांका का कहना है कि शासन द्वारा स्पष्ट स्थानांतरण आदेश जारी होने के बावजूद संबंधित पटवारी को निर्धारित समय पर कार्यमुक्त नहीं किया जाना, प्रशासनिक अनुशासन और जवाबदेही पर गंभीर प्रश्नचिह्न लगाता है।
कांग्रेस नेता प्रकाश रांका ने इस विलंब पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि जब राजस्व विभाग के शासन स्तर से स्थानांतरण आदेश जारी हो चुका था, तो पटवारी प्रकाश चंद्र शुक्ला को समय पर कार्यमुक्त क्यों नहीं किया गया, यह प्रशासन द्वारा स्पष्ट किया जाना चाहिए। उन्होंने जोर देकर कहा कि किसी भी अधिकारी या कर्मचारी के स्थानांतरण का आदेश यदि शासन स्तर से जारी होता है, तो संबंधित विभागीय अधिकारियों का यह कर्तव्य है कि वे उसका तत्काल पालन करें। ऐसे में, आदेश के क्रियान्वयन में अत्यधिक देरी प्रशासनिक व्यवस्था में गंभीर चूक का संकेत देती है।
स्थानांतरण आदेश को रोके रखने के पीछे की मंशा पर सवाल
पूर्व जिला उपाध्यक्ष रांका के अनुसार, यह मामला केवल एक पटवारी के स्थानांतरण तक सीमित नहीं है, बल्कि यह इस बड़े प्रश्न को जन्म देता है कि क्या प्रशासनिक स्तर पर शासन के आदेशों को किसी की व्यक्तिगत सुविधा या प्रभाव के चलते लंबित रखा जा सकता है। उन्होंने मांग की है कि आदेश के पालन में देरी के कारणों की गहन जांच की जाए ताकि यह पता लगाया जा सके कि इसके लिए कौन अधिकारी या कर्मचारी जिम्मेदार था और आदेश को निर्धारित समय-सीमा के भीतर लागू क्यों नहीं किया गया।
रांका द्वारा उपलब्ध कराए गए विवरण के अनुसार, संबंधित स्थानांतरण आदेश में पटवारी प्रकाश चंद्र शुक्ला का नाम क्रमांक 299 पर दर्ज है। इस आदेश के तहत उनका स्थानांतरण नीमच जिले से सतना जिले के लिए किया गया था। इसके बावजूद, उन्हें समय पर रिलीव न किए जाने के मामले में प्रशासन से स्थिति स्पष्ट करने की अपेक्षा की गई है।
राजस्व कार्यों की समीक्षा और पारदर्शिता की मांग
कांग्रेस नेता ने यह भी सवाल उठाया कि यदि स्थानांतरण आदेश इतने लंबे समय तक लंबित रहा, तो इस अवधि के दौरान संबंधित पटवारी की पदस्थापना और कार्यप्रणाली की निगरानी किस स्तर पर और किसके द्वारा की गई। उन्होंने कहा कि नीमच जिले में पटवारी प्रकाश चंद्र शुक्ला के कार्यकाल के दौरान किए गए प्रमुख राजस्व कार्यों, उनके द्वारा निपटाए गए प्रकरणों और निर्वहन किए गए प्रशासनिक दायित्वों की नियमानुसार समीक्षा की जानी चाहिए। रांका ने स्पष्ट किया कि इस समीक्षा का उद्देश्य किसी व्यक्ति विशेष को निशाना बनाना नहीं है, बल्कि प्रशासनिक पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करना है।
इस संदर्भ में, रांका ने विस्तृत विवरण की मांग की है, जिसमें पटवारी की नीमच जिले में अब तक की कुल पदस्थापना, विभिन्न स्थानों पर उनका कार्यकाल, और उनके द्वारा संपादित किए गए प्रमुख राजस्व दायित्वों का पूरा ब्यौरा शामिल हो। इसके अतिरिक्त, उन्होंने स्थानांतरण आदेश जारी होने के पश्चात उन्हें कार्यमुक्त करने में हुई देरी की विभागीय स्तर पर जांच कराने की वकालत की है। उन्होंने कहा कि यदि जांच में किसी अधिकारी की लापरवाही या जानबूझकर आदेश को लंबित रखने का तथ्य सामने आता है, तो संबंधित अधिकारी के विरुद्ध नियमानुसार कठोर कार्रवाई की जानी चाहिए।
प्रशासनिक आदेशों के पालन में विलंब पर चिंता
प्रकाश रांका ने इस बात पर जोर दिया कि सरकार और प्रशासन द्वारा जारी किए गए आदेशों का पालन एक निश्चित समय-सीमा के भीतर होना चाहिए। उन्होंने कहा कि यदि किसी कर्मचारी के स्थानांतरण जैसे सामान्य प्रशासनिक आदेश को भी महीनों तक लागू नहीं किया जाता है, तो इससे आम जनता के बीच प्रशासनिक व्यवस्था के प्रति एक नकारात्मक संदेश जाता है। जनता यह उम्मीद करती है कि उनके राजस्व संबंधी मामलों में अधिकारी और कर्मचारी नियमों के अनुसार समय पर कार्रवाई करें, न कि आदेशों को अपनी सुविधा अनुसार लटकाएं।
रांका ने घोषणा की कि वे इस पूरे मामले को मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री के संज्ञान में लाएंगे और शासन के आदेश के क्रियान्वयन में हुई इस अत्यधिक देरी की उच्चस्तरीय जांच की मांग को पुरजोर तरीके से उठाएंगे। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि इस मामले में किसी व्यक्ति विशेष के खिलाफ व्यक्तिगत द्वेष या पूर्वाग्रह के आधार पर कार्रवाई की बजाय, संपूर्ण घटनाक्रम की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए ताकि सच्चाई सामने आ सके।
उन्होंने अंत में कहा कि सरकार द्वारा जारी आदेश प्रशासनिक व्यवस्था में सर्वोच्च होते हैं। यदि आदेश जारी होने के बाद भी महीनों तक उनका पालन नहीं होता है, तो इसकी जवाबदेही तय की जानी अत्यंत आवश्यक है। रांका ने स्पष्ट किया कि यह सवाल केवल एक पटवारी के स्थानांतरण का नहीं है, बल्कि यह एक मूलभूत प्रश्न खड़ा करता है कि क्या प्रशासनिक व्यवस्था में शासन का आदेश सर्वोपरि है या किसी व्यक्ति विशेष का प्रभाव।
