पशु चिकित्सा विश्वविद्यालय में भर्ती अनियमितता: एनएसयूआई ने निष्पक्ष जाँच की मांग की
नानाजी देशमुख पशु चिकित्सा विज्ञान विश्वविद्यालय में 2012-13 की जूनियर स्टेनोग्राफर नियुक्तियों में कथित अनियमितताओं को लेकर एनएसयूआई ने कुलपति को ज्ञापन सौंपा है। संगठन...

Jabalpur | संवाददाता: शफी ख़ान
द क्लिफ न्यूज़ | जबलपुर | 14 अक्टूबर 2026
नानाजी देशमुख पशु चिकित्सा विज्ञान विश्वविद्यालय, जबलपुर में वर्ष 2012-13 के दौरान जूनियर स्टेनोग्राफर के पदों पर की गई नियुक्तियों में कथित अनियमितताओं को लेकर भारतीय राष्ट्रीय छात्र संगठन (एनएसयूआई) ने विश्वविद्यालय के कुलपति को एक ज्ञापन सौंपकर निष्पक्ष जाँच की मांग उठाई है। संगठन का आरोप है कि भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता का अभाव रहा और नियमों का उल्लंघन किया गया।
एनएसयूआई के प्रदेश सचिव एजाज अंसारी और प्रतीक गौतम के नेतृत्व में विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. मनदीप शर्मा को सौंपे गए ज्ञापन में विज्ञापन क्रमांक 990, दिनांक 19 जून 2013 के अंतर्गत हुई नियुक्तियों के सभी संबंधित अभिलेखों की गहन और उच्च स्तरीय जाँच कराने का अनुरोध किया गया है। छात्र नेताओं का कहना है कि भर्ती के दौरान पात्रता मानदंडों, आरक्षण रोस्टर के पालन और वेतनमान निर्धारण में गंभीर त्रुटियाँ बरती गई होंगी।
नियुक्ति प्रक्रिया पर गंभीर सवाल
एनएसयूआई ने इस बात पर जोर दिया कि शैक्षणिक संस्थानों में होने वाली नियुक्तियाँ पूरी तरह से पारदर्शी और नियमों के अनुसार होनी चाहिए। संगठन का मानना है कि यदि जाँच में नियमों के उल्लंघन की बात साबित होती है, तो उन नियुक्तियों की समीक्षा की जानी चाहिए। इसके अतिरिक्त, इस अनियमितता के लिए जिम्मेदार पाए जाने वाले अधिकारियों के विरुद्ध नियमानुसार कड़ी कार्रवाई सुनिश्चित की जाए, ताकि भविष्य में इस तरह की घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो सके।
छात्र नेताओं का तर्क है कि निष्पक्ष जाँच से ही विश्वविद्यालय प्रशासन की जवाबदेही तय होगी और भर्ती प्रक्रिया के दौरान हुई गड़बड़ियों का सच सामने आ सकेगा। ज्ञापन सौंपने के अवसर पर अनुराग शुक्ला, वक़ार राईन, अदील सैय्यद, समीर अंसारी, असदाक अनवर, युग ठाकुर, निखिल वंशकार, सोनू बर्मन, अंकित सूर्यवंशी, भोलू ठाकुर, अरुण बिल्थरे और अभिषेक कुर्मी सहित एनएसयूआई के कई कार्यकर्ता मौजूद रहे।
विश्वविद्यालय प्रशासन ने दिया आश्वासन
विश्वविद्यालय प्रशासन ने ज्ञापन को प्राप्त कर लिया है और मामले की संवेदनशीलता को समझते हुए जाँच के संबंध में उचित प्रक्रिया का पालन करने का आश्वासन दिया है। अब सभी की निगाहें विश्वविद्यालय प्रशासन द्वारा की जाने वाली जाँच के परिणामों पर टिकी हैं, जिससे यह स्पष्ट हो सकेगा कि भर्ती प्रक्रिया में वास्तव में क्या खामियाँ थीं और दोषियों पर क्या कार्रवाई होती है।
