पश्चिम एशिया से रिश्ते मजबूत करने पर विदेश मंत्री एस. जयशंकर का जोर
नई दिल्ली में संसदीय समिति की बैठक में विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर ने पश्चिम एशिया के साथ भारत के ऐतिहासिक, करीबी और रणनीतिक संबंधों को और मजबूत करने पर बल दिया।

संवाददाता: शाश्वत तिवारी
द क्लिफ न्यूज़ | नई दिल्ली | 8 सितंबर 2026
विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर ने नई दिल्ली में संसद की परामर्शदात्री समिति की एक महत्वपूर्ण बैठक की अध्यक्षता करते हुए पश्चिम एशिया के साथ भारत के संबंधों को और अधिक मजबूत करने की आवश्यकता पर विशेष बल दिया। उन्होंने खाड़ी और पश्चिम एशिया तथा उत्तरी अफ्रीका (वाना) क्षेत्र के साथ भारत के ऐतिहासिक, करीबी और रणनीतिक संबंधों को गहरा करने की बात कही। इस उच्च स्तरीय बैठक में सांसदों को संबोधित करते हुए, विदेश मंत्री ने इस क्षेत्र में भारत की बढ़ती सक्रियता और दीर्घकालिक प्राथमिकताओं से अवगत कराया।
पश्चिम एशिया में भारत की बढ़ती सक्रियता
डॉ. जयशंकर ने इस बात पर जोर दिया कि पश्चिम एशिया क्षेत्र में जारी मौजूदा संघर्षों और भू-राजनीतिक उथल-पुथल के बावजूद, भारत इस क्षेत्र के साथ अपने व्यापार, निवेश और कनेक्टिविटी को लगातार आगे बढ़ा रहा है। उन्होंने रेखांकित किया कि क्षेत्र के देश भारत के ऊर्जा और आर्थिक हितों के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण हैं। व्यापार, निवेश, ऊर्जा, समुद्री सुरक्षा और दोनों देशों के नागरिकों के बीच आपसी संपर्क जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों में भारत की पुरानी रणनीतिक साझेदारी लगातार नई ऊंचाइयों को छू रही है।
विदेश मंत्री ने 'एक्स' (पूर्व में ट्विटर) पर बैठक से संबंधित एक तस्वीर साझा करते हुए पश्चिम एशिया के साथ भारत के संबंधों पर हुई चर्चा का उल्लेख किया। उन्होंने बताया कि खाड़ी और वाना क्षेत्र के साथ भारत के करीबी संबंधों में व्यापार, निवेश, ऊर्जा, समुद्री मामले और लोगों के बीच आपसी संबंधों के क्षेत्रों में हमारी पुरानी साझेदारी और सहयोग शामिल है। उन्होंने यह भी बताया कि क्षेत्र में चल रहे संघर्ष के बीच एक करोड़ भारतीयों के कल्याण, ऊर्जा और उर्वरक सुरक्षा सुनिश्चित करने, और व्यापार व कनेक्टिविटी को आगे बढ़ाने की भारत की कोशिशों पर भी ज़ोर दिया गया।
लक्ज़मबर्ग के साथ द्विपक्षीय संबंधों पर चर्चा
इस संसदीय समिति की बैठक से ठीक पहले, विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर ने लक्ज़मबर्ग के उप-प्रधानमंत्री और विदेश मंत्री ज़ेवियर बेटेल के साथ एक द्विपक्षीय बैठक भी की। इस बैठक के दौरान, दोनों नेताओं ने भारत-लक्ज़मबर्ग के बीच व्यापार, निवेश, वित्तीय सहयोग और अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों में साझेदारी को और गहरा करने पर विस्तृत चर्चा की। डॉ. जयशंकर ने कहा कि मौजूदा वैश्विक अनिश्चितताओं और व्यवधानों के इस दौर में भारत और लक्ज़मबर्ग जैसे भरोसेमंद देशों के बीच की रणनीतिक साझेदारी और अधिक प्रासंगिक तथा मजबूत हो गई है।
