पप्पू यादव की प्रेस कॉन्फ्रेंस में हंगामा: मारपीट और विवाद से गरमाई सियासत
सांसद पप्पू यादव की दिल्ली स्थित आवास पर प्रेस वार्ता के दौरान हंगामा और मारपीट का आरोप, राम मंदिर चढ़ावे के मुद्दे पर पहले से चल रहा विवाद गहराया।

द क्लिफ न्यूज़ | नई दिल्ली | 2 अगस्त 2026
पूर्णिया से निर्दलीय सांसद पप्पू यादव की दिल्ली स्थित आवास पर आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान उस समय अफरा-तफरी मच गई, जब कार्यक्रम के बीच अचानक हंगामा शुरू हो गया। इस घटना में कुछ लोगों के साथ विवाद और धक्का-मुक्की की नौबत आने का आरोप है, जिसने राष्ट्रीय राजधानी में राजनीतिक सरगर्मी तेज कर दी है। यह घटना राम मंदिर चढ़ावे और दान से जुड़े मुद्दों पर पप्पू यादव द्वारा उठाए गए सवालों के बाद पहले से चल रहे विवाद को और भी हवा देने वाली साबित हुई है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, पप्पू यादव अपनी प्रेस कॉन्फ्रेंस में विभिन्न समकालीन मुद्दों पर अपना पक्ष रख रहे थे। इसी दौरान, कार्यक्रम में उपस्थित कुछ व्यक्तियों के साथ उनकी तीखी बहस छिड़ गई। देखते ही देखते, यह बहस इतनी बढ़ गई कि माहौल तनावपूर्ण हो गया और हंगामे की स्थिति उत्पन्न हो गई। इस घटना के बाद, सुरक्षा व्यवस्था पर भी सवाल उठाए गए हैं।
प्रेस कॉन्फ्रेंस में विवाद और मारपीट के आरोप
सांसद पप्पू यादव ने इस घटना को एक सुनियोजित साजिश करार दिया है। उन्होंने दावा किया कि उनके साथ बदसलूकी करने और हंगामा करने वाले लोग पूर्व-नियोजित ढंग से पहुंचे थे। यादव ने यह भी आरोप लगाया कि हमलावरों के पास हथियार भी थे, जिससे उनकी सुरक्षा को खतरा पैदा हो सकता था। उन्होंने इस घटना को उनकी आवाज को दबाने का एक प्रयास बताया। हालांकि, इस पूरे मामले की सत्यता और विस्तार से जांच के बाद ही स्पष्ट हो पाएगी।
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, हंगामे के दौरान सांसद के समर्थकों और विरोधियों के बीच तीखी नोकझोंक हुई, जो धक्का-मुक्की में बदल गई। मौके पर मौजूद अन्य लोगों ने स्थिति को शांत करने का प्रयास किया। इस घटना ने एक बार फिर सार्वजनिक मंचों पर नेताओं की सुरक्षा और ऐसे आयोजनों के प्रबंधन पर प्रश्नचिन्ह लगा दिए हैं।
भगवा वेश प्रदर्शन से शुरू हुआ था विवाद
यह मौजूदा विवाद उस समय और अधिक भड़क गया था, जब पप्पू यादव ने संसद परिसर में भगवा वेश धारण कर एक प्रदर्शन किया था। इस प्रदर्शन के माध्यम से उन्होंने राम मंदिर में चढ़ावे और मंदिर निर्माण के लिए प्राप्त दान की पारदर्शिता पर सवाल उठाए थे। पप्पू यादव के इस कदम का कई हिंदू संगठनों और भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के नेताओं ने कड़ा विरोध किया था। विरोधियों का तर्क था कि धार्मिक आस्था से जुड़े पवित्र प्रतीकों का राजनीतिक उद्देश्यों के लिए इस्तेमाल नहीं किया जाना चाहिए। वहीं, पप्पू यादव ने अपने कृत्य का बचाव करते हुए इसे भ्रष्टाचार और जवाबदेही से जुड़ा एक महत्वपूर्ण मुद्दा बताया था, जिसे जनता के समक्ष उठाना आवश्यक है।
एफआईआर और तीखी राजनीतिक बयानबाजी
पप्पू यादव के प्रदर्शन और बयानों के चलते, उन पर और कुछ अन्य नेताओं के खिलाफ धार्मिक भावनाओं को आहत करने के आरोपों को लेकर शिकायतें दर्ज होने की खबरें सामने आई हैं। इस घटनाक्रम के बाद से ही सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच बयानबाजी का दौर तेज हो गया है। पप्पू यादव ने अपने ऊपर लगे आरोपों को एक राजनीतिक चाल बताया है और जोर देकर कहा है कि वह जनता से जुड़े ज्वलंत मुद्दों को उठाना जारी रखेंगे। उन्होंने कहा कि ऐसे प्रयासों से उन्हें रोका नहीं जा सकता।
बढ़ता सियासी पारा और भविष्य की राह
प्रेस कॉन्फ्रेंस में हुए हंगामे ने पहले से चल रहे विवाद को और हवा दे दी है, जिससे राजनीतिक माहौल और भी गर्म हो गया है। एक ओर, पप्पू यादव के समर्थक इस घटना को लोकतांत्रिक आवाज पर हमला बता रहे हैं, वहीं दूसरी ओर, विरोधी पक्ष उनके प्रदर्शन और उनके द्वारा उठाए गए मुद्दों की प्रासंगिकता पर सवाल उठा रहा है। फिलहाल, इस पूरे मामले की विस्तृत जांच पुलिस और संबंधित एजेंसियों द्वारा की जा रही है। इस जांच के बाद ही यह स्पष्ट हो पाएगा कि प्रेस वार्ता के दौरान विवाद का वास्तविक कारण क्या था और इसमें कौन-कौन से व्यक्ति या समूह शामिल थे। इस घटना ने बिहार और दिल्ली की राजनीति में एक नए और महत्वपूर्ण सियासी मुद्दे को जन्म दिया है।
