पन्ना में सरकारी धान खराब, खुले में रखे हजारों क्विंटल अनाज से निकले अंकुर
मध्य प्रदेश के पन्ना जिले में समर्थन मूल्य पर खरीदे गए हजारों क्विंटल धान के खुले में रखे होने और बारिश से खराब होने की घटना सामने आई है। धान से अंकुर निकलने की स्थिति को प्रशासनिक लापरवाही का प्रतीक माना जा रहा है।

द क्लिफ न्यूज़ | पन्ना | 31 जुलाई 2026
मध्य प्रदेश के पन्ना जिले में सरकारी अनाज के भंडारण की अव्यवस्थाओं की एक गंभीर तस्वीर सामने आई है। जिले के बड़ागांव और लक्ष्मीपुर जैसे खरीदी केंद्रों पर समर्थन मूल्य पर किसानों से खरीदा गया हजारों क्विंटल धान उचित सुरक्षा व्यवस्था के अभाव में खुले आसमान के नीचे पड़ा हुआ सड़ रहा है। लगातार बारिश के कारण अनाज में नमी बढ़ने से कई जगह धान के ढेरों से पौधे और कोंपलें तक निकल आई हैं, जो पूरी सरकारी व्यवस्था पर सवाल खड़े कर रही है।
यह स्थिति न केवल अनाज की बर्बादी है, बल्कि यह सरकार की अनाज खरीद, परिवहन और भंडारण की पूरी कार्यप्रणाली में गंभीर खामियों को उजागर करती है। खरीदे गए धान का समय पर सुरक्षित गोदामों तक उठाव न होना और बारिश से बचाव के पुख्ता इंतजाम न होने के कारण यह मूल्यवान खाद्यान्न खराब होने की कगार पर है। हालांकि, मामले के संज्ञान में आने के बाद खाद्य विभाग और स्थानीय प्रशासन ने जांच कराने का आश्वासन दिया है।
खुले में पड़े धान की गुणवत्ता पर गंभीर खतरा
पन्ना जिले के विभिन्न धान खरीदी केंद्रों पर, विशेष रूप से बड़ागांव और लक्ष्मीपुर में, खरीद प्रक्रिया संपन्न होने के बावजूद बड़ी मात्रा में धान का उठाव नहीं किया गया। मानसून की मार झेलते हुए यह धान खुले मैदानों में पड़ा रहा। बारिश का पानी सीधे धान के ढेर तक पहुंचने से अनाज में अत्यधिक नमी आ गई। इस नमी ने अनाज को खराब करना शुरू कर दिया, जिसके चलते कई जगहों पर धान के दानों से अंकुर निकलने लगे। सामान्य परिस्थितियों में, किसानों के खेतों से वैज्ञानिक तरीके से खरीदा गया अनाज सुरक्षित भंडारण तक पहुंचाने के लिए होता है, लेकिन यहां सरकारी लापरवाही के चलते यह अनाज प्रतिकूल परिस्थितियों में पड़ा रहा। धान में अंकुरण इस बात का स्पष्ट संकेत है कि अनाज लंबे समय तक नमी और गर्मी के संपर्क में रहा, जिससे उसकी गुणवत्ता गंभीर रूप से प्रभावित हुई है।
सरकारी संरक्षण व्यवस्था पर उठते सवाल
सरकार किसानों को आर्थिक सुरक्षा प्रदान करने के उद्देश्य से न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) पर धान की खरीद करती है। इस खरीद का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि किसानों को उनकी उपज का उचित मूल्य मिले और खाद्यान्न की आपूर्ति बनी रहे। खरीदे गए अनाज को सुरक्षित रखना संबंधित सरकारी विभागों और एजेंसियों का प्राथमिक दायित्व है। इसके लिए वेयरहाउस, परिवहन की सुगम व्यवस्था और सुनियोजित भंडारण ढांचा तैयार किया जाता है। परंतु, पन्ना जैसे मामलों में जब यही सरकारी अनाज खुले में रहकर खराब हो जाता है, तो यह न केवल सरकारी धन की भारी बर्बादी को दर्शाता है, बल्कि यह किसानों के हित पर भी अप्रत्यक्ष रूप से नकारात्मक प्रभाव डालता है। स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि खरीद के तुरंत बाद धान का उठाव कर सुरक्षित गोदामों में पहुंचा दिया जाता, तो इस प्रकार की बर्बादी से बचा जा सकता था। उनके प्रश्न वाजिब हैं कि जब अनाज संरक्षण के लिए सरकारी योजनाएं और पर्याप्त संसाधन उपलब्ध हैं, तो हजारों क्विंटल धान को खुले में रखने की नौबत क्यों आई?
लापरवाही के आरोप और जांच की मांग
इस पूरे प्रकरण में वेयरहाउस कॉरपोरेशन और खाद्य आपूर्ति से जुड़े अन्य संबंधित विभागों की भूमिका पर गंभीर प्रश्नचिह्न लग रहे हैं। स्थानीय स्तर पर यह व्यापक आरोप है कि अधिकारियों की ओर से पर्याप्त निगरानी और प्रभावी प्रबंधन का अभाव रहा, जिसके कारण सरकारी अनाज को नुकसान पहुंचा। प्रशासन का कहना है कि फिलहाल जांच की जाएगी और उसके बाद ही वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी। धान की यह बर्बादी बड़े आर्थिक नुकसान का कारण बन सकती है। हजारों क्विंटल धान की गुणवत्ता प्रभावित होने से सरकार को लाखों रुपये का राजस्व घाटा हो सकता है। इसके अलावा, खराब हो चुके इस अनाज के आगे के उपयोग और उसके निपटान को लेकर भी प्रशासन के सामने एक नई चुनौती खड़ी हो जाएगी।
खाद्य सुरक्षा और अनाज संरक्षण का महत्व
सरकारी अनाज की सुरक्षा केवल एक आर्थिक मुद्दा नहीं है, बल्कि यह देश की खाद्य सुरक्षा से भी गहराई से जुड़ा हुआ है। भारत जैसे विशाल जनसंख्या वाले देश में, जहां करोड़ों लोग खाद्यान्न योजनाओं पर निर्भर हैं, अनाज की बर्बादी एक चिंताजनक विषय है। प्रत्येक किलो अनाज का संरक्षण अत्यंत महत्वपूर्ण है, क्योंकि इसके पीछे न केवल सरकारी संसाधन लगे होते हैं, बल्कि किसानों की कड़ी मेहनत भी शामिल होती है। विशेषज्ञों का मत है कि खरीद के उपरांत अनाज का तत्काल परिवहन, वैज्ञानिक तरीके से उसका भंडारण और नियमित रूप से उसकी निगरानी की व्यवस्थाओं को और अधिक मजबूत किए जाने की आवश्यकता है। खुले में रखे जाने वाले अनाज के लिए तिरपाल, ऊंचे और पक्के प्लेटफॉर्म तथा मौसम के अनुरूप अन्य सुरक्षात्मक उपायों का उपयोग अनिवार्य होना चाहिए। यदि इन व्यवस्थाओं में किसी भी स्तर पर लापरवाही बरती जाती है, तो बारिश और नमी के कारण अनाज बहुत तेजी से खराब हो सकता है।
भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने की आवश्यकता
मामले के सार्वजनिक होने के बाद, खाद्य विभाग और स्थानीय प्रशासन ने त्वरित जांच के आदेश दिए हैं। अधिकारियों ने विश्वास दिलाया है कि पूरे प्रकरण की गहन जांच की जाएगी और यदि किसी भी स्तर पर लापरवाही पाई जाती है, तो संबंधित अधिकारियों और कर्मचारियों के विरुद्ध नियमानुसार कड़ी कार्रवाई की जाएगी। मुख्य प्रश्न यह बना हुआ है कि आखिर हजारों क्विंटल धान खुले में इतने लंबे समय तक क्यों पड़ा रहा? क्या समय पर उठाव और भंडारण की कोई प्रभावी योजना ही नहीं बनाई गई थी? या फिर निगरानी की पूरी व्यवस्था ही चरमरा गई थी? इन सभी सवालों के जवाब जांच रिपोर्ट आने के बाद ही सामने आएंगे। सरकारी योजनाओं का मूल उद्देश्य केवल अनाज की खरीद करना ही नहीं है, बल्कि खरीदे गए अनाज को सुरक्षित रखना भी उतना ही महत्वपूर्ण है। किसानों से खरीदे गए धान की बर्बादी प्रशासनिक लापरवाही के प्रतीक के रूप में नहीं देखी जानी चाहिए। भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति को रोकने के लिए मजबूत निगरानी तंत्र, विभिन्न विभागों के बीच बेहतर समन्वय और जवाबदेही तय करने की तत्काल आवश्यकता है। पन्ना के खरीदी केंद्रों पर धान में उगी कोंपलें केवल खराब हुए अनाज का प्रतीक नहीं हैं, बल्कि वे सरकारी भंडारण व्यवस्था की खामियों के सामने एक गंभीर चुनौती पेश करती हैं। जांच के साथ-साथ एक ऐसी सुदृढ़ प्रणाली विकसित करना आवश्यक है, जिससे किसानों की मेहनत और जनता के पैसे से खरीदा गया अनाज पूरी तरह सुरक्षित रह सके।
