पांचाल की अनूठी विरासत को मिलेगी वैश्विक पहचान: पर्यटन विभाग की योजनाएं
पांचाल क्षेत्र की ऐतिहासिक और पौराणिक धरोहरों को वैश्विक पहचान दिलाने की तैयारी है। पर्यटन विभाग की योजनाओं से संकिसा, कम्पिल, नीब करोरी धाम व...

फर्रुखाबाद | संवाददाता: संदीप तिवारी
द क्लिफ न्यूज़ | फर्रुखाबाद | 27 सितंबर 2026
फर्रुखाबाद में विश्व पर्यटन दिवस के अवसर पर आयोजित एक गोष्ठी में पांचाल क्षेत्र की समृद्ध सांस्कृतिक और धार्मिक धरोहरों को वैश्विक पटल पर स्थापित करने के लिए पर्यटन विभाग की महत्वाकांक्षी योजनाओं पर प्रकाश डाला गया। ‘पांचाल शोध एवं विकास समिति’ द्वारा बेवर रोड स्थित संध्या पैलेस में आयोजित इस कार्यक्रम में वक्ताओं ने इस क्षेत्र के ऐतिहासिक स्थलों के संरक्षण और पर्यटन विकास की अपार संभावनाओं पर विस्तृत चर्चा की और एक कार्ययोजना साझा की।
समिति के अध्यक्ष एवं वरिष्ठ अधिवक्ता सुरेंद्र सिंह सोमवंशी ने पांचाल की पवित्र भूमि के गौरवशाली इतिहास को आधुनिक पर्यटन ढांचे से जोड़ने की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि यह क्षेत्र पौराणिक और ऐतिहासिक महत्व रखता है, जिसे संरक्षित कर वैश्विक पहचान दिलाना वर्तमान समय की मांग है।
प्रमुख पर्यटन स्थलों का कायाकल्प
गोष्ठी में वक्ताओं ने विशेष रूप से बाबा नीब करोरी धाम, बौद्ध स्थली संकिसा, महाभारत कालीन नगरी कम्पिल और महर्षि श्रृंगी ऋषि की तपोस्थली श्रृंगीरामपुर के जीर्णोद्धार एवं सौंदर्यीकरण के कार्यों को रेखांकित किया। भूपेंद्र प्रताप सिंह ने बताया कि इन प्रमुख केंद्रों पर नागरिक सुविधाओं के विस्तार से यहां आने वाले श्रद्धालुओं की संख्या में निरंतर वृद्धि दर्ज की जा रही है। वक्ताओं ने एक स्वर से यह माना कि इन महत्वपूर्ण स्थलों के बुनियादी ढांचे को सुदृढ़ करने से न केवल धार्मिक पर्यटन को बल मिलेगा, बल्कि इससे क्षेत्र की स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी एक नई गति प्राप्त होगी।
स्थानीय उत्पादों और कृषि को बढ़ावा
कार्यक्रम में स्थानीय उत्पादों को पर्यटन से जोड़ने के लिए 'एक जिला एक उत्पाद' योजना के तहत फर्रुखाबाद के विश्व प्रसिद्ध जरदोजी और ब्लॉक प्रिंटिंग जैसे हस्तशिल्प उद्योगों को पर्यटन सर्किट में प्रमुखता देने का सुझाव दिया गया। इसके अतिरिक्त, 'एक जिला एक व्यंजन' योजना को भी पर्यटन गतिविधियों का एक अभिन्न अंग बनाने पर विचार-विमर्श हुआ। समिति ने कृषि और पर्यावरण पर्यटन को प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से जिले की नर्सरियों को टूरिज्म सर्किट से जोड़ने का एक महत्वपूर्ण प्रस्ताव भी रखा। इस पहल से पर्यटकों को प्राकृतिक सौंदर्य के साथ-साथ स्थानीय हस्तशिल्प और पारंपरिक व्यंजनों को करीब से जानने और अनुभव करने का अवसर मिलेगा।
इस अवसर पर भानु प्रकाश मिश्रा, अनिल प्रताप सिंह, एम.आर. पाल, कैप्टन डी.एस. राठौर, डॉ. मुकेश सिंह राठौर, शरद चंदेल, आकिब खां, राजीव बाजपेयी, अनिल ददुआ, सत्यपाल सिंह, के.के. वर्मा और प्रदीप कुमार सहित अनेक गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे। सभी वक्ताओं ने सामूहिक प्रयासों के माध्यम से पांचाल क्षेत्र को एक प्रमुख पर्यटन हब के रूप में विकसित करने का संकल्प दोहराया। इस संवाद से यह स्पष्ट होता है कि जिले की अनूठी सांस्कृतिक विरासत को सहेजने और उसे आधुनिक विकास की धारा से जोड़ने की दिशा में ठोस और सकारात्मक कदम उठाए जा रहे हैं।
