पुलिस भर्ती मामला: OBC–EWS की तीन अभ्यर्थियों की याचिका हाईकोर्ट ने की खारिज, सामान्य वर्ग में चयन से इनकार
मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की एकल पीठ ने एक अहम फैसले में OBC और EWS वर्ग की तीन युवतियों की याचिका खारिज कर दी है। इन...

मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की एकल पीठ ने एक अहम फैसले में OBC और EWS वर्ग की तीन युवतियों की याचिका खारिज कर दी है। इन युवतियों ने पुलिस आरक्षक भर्ती परीक्षा में शामिल होने के बाद सामान्य वर्ग में चयन की मांग की थी।
तीनों अभ्यर्थियों ने भर्ती परीक्षा में OBC और EWS श्रेणी के तहत आवेदन किया था। लिखित परीक्षा में वे सामान्य वर्ग की कट-ऑफ से कम अंक हासिल कर पाईं, लेकिन शारीरिक दक्षता परीक्षा (फिजिकल टेस्ट) में उनका प्रदर्शन बेहतर रहा। इसके चलते कुल अंकों के आधार पर उनका स्कोर सामान्य वर्ग के कई अभ्यर्थियों से अधिक हो गया था।
हालांकि, अंतिम मेरिट लिस्ट में उनके नाम सामान्य वर्ग में शामिल नहीं किए गए, क्योंकि वे पहले चरण की लिखित परीक्षा OBC और EWS श्रेणी के तहत उत्तीर्ण हुई थीं। इसी आधार पर उनका चयन भी आरक्षित श्रेणी में ही माना गया।
इस फैसले को चुनौती देते हुए युवतियों ने हाईकोर्ट में याचिका दायर की और मांग की कि कुल अंकों के आधार पर उन्हें सामान्य वर्ग में चयनित किया जाए। मामले की सुनवाई न्यायमूर्ति दीपक खोत की एकल पीठ ने की।
कोर्ट ने याचिका खारिज करते हुए कहा कि नियमों के अनुसार याचिकाकर्ताओं ने पहले चरण की परीक्षा में सामान्य वर्ग की कट-ऑफ से अधिक अंक प्राप्त नहीं किए थे। उन्हें दूसरे चरण यानी शारीरिक दक्षता परीक्षा में शामिल होने का अवसर OBC आरक्षण का लाभ देकर दिया गया, क्योंकि OBC वर्ग की कट-ऑफ उनके अंकों से कम थी।
अदालत ने स्पष्ट किया कि ऐसी स्थिति में आरक्षित वर्ग के अभ्यर्थियों को सामान्य वर्ग के अभ्यर्थियों के साथ समायोजित (एडजस्ट) करने का कोई सवाल ही नहीं उठता, जिन्होंने पहले चरण में ही सामान्य वर्ग की कट-ऑफ पार की हो।
कोर्ट ने यह भी कहा कि यदि OBC आरक्षण का लाभ याचिकाकर्ताओं को नहीं दिया जाता, तो वे पहले चरण में ही बाहर हो जातीं और दूसरे चरण तक पहुंच ही नहीं पातीं। इसलिए आरक्षण के लाभ से दूसरे चरण में पहुंचने के बाद सामान्य वर्ग में चयन की मांग नियमों के अनुरूप नहीं है।
