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नॉन-मेडिकल असिस्टेंट (कुष्ठ) के ग्रेड-पे संशोधन की मांग, पेंशनर्स एसोसिएशन ने की अपील

मध्य प्रदेश में नॉन-मेडिकल असिस्टेंट (कुष्ठ) संवर्ग के कर्मचारियों के समयमान वेतनमान में ग्रेड-पे संशोधन की मांग उठी है। पेंशनर्स वेलफेयर एसोसिएशन ने वित्त विभाग के आदेश को समिति के निर्णय से भिन्न बताया है।

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नॉन-मेडिकल असिस्टेंट (कुष्ठ) के ग्रेड-पे संशोधन की मांग, पेंशनर्स एसोसिएशन ने की अपील

द क्लिफ न्यूज़ | भोपाल | 26 अगस्त 2026

मध्य प्रदेश में नॉन-मेडिकल असिस्टेंट (कुष्ठ) संवर्ग के कर्मचारियों को समयमान वेतनमान में निर्धारित ग्रेड-पे को लेकर पेंशनर्स वेलफेयर एसोसिएशन ने राज्य शासन से संशोधन की मांग की है। एसोसिएशन का आरोप है कि वित्त विभाग द्वारा जारी आदेश में निर्धारित ग्रेड-पे, विभागीय स्तर पर हुई समिति की बैठक में लिए गए निर्णय से कम है, जिससे संबंधित कर्मचारियों को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है।

यह विसंगति नॉन-मेडिकल असिस्टेंट (कुष्ठ) संवर्ग के कर्मचारियों के प्रथम एवं द्वितीय उच्चतर वेतनमान से संबंधित है। स्वास्थ्य संचालनालय ने 18 दिसंबर 2015 को इस मामले में शासन को एक प्रस्ताव भेजा था। इसके बाद, 12 अप्रैल 2018 को मुख्य सचिव की अध्यक्षता में आयोजित एक समिति की बैठक में यह निर्णय लिया गया था कि इस संवर्ग के कर्मचारियों के लिए प्रथम समयमान वेतनमान में ₹2800 और द्वितीय समयमान वेतनमान में ₹3600 का ग्रेड-पे निर्धारित किया जाए।

वित्त विभाग के आदेश में विसंगति का आरोप

पेंशनर्स वेलफेयर एसोसिएशन के अनुसार, मुख्य सचिव की अध्यक्षता वाली समिति के निर्णय के बावजूद, वित्त विभाग ने 7 जून 2018 को एक परिपत्र जारी किया। इस परिपत्र में प्रथम उच्चतर वेतनमान के लिए ₹2400 और द्वितीय उच्चतर वेतनमान के लिए ₹2800 का ग्रेड-पे निर्धारित किया गया। एसोसिएशन का कहना है कि यह ग्रेड-पे, समिति द्वारा लिए गए निर्णय से भिन्न है और इससे कर्मचारियों को अपेक्षित लाभ नहीं मिल पा रहा है।

एसोसिएशन के प्रदेश अध्यक्ष आमोद कुमार सक्सेना और सचिव रामगोपाल माथुर ने अपर मुख्य सचिव, वित्त विभाग से इस मामले में तत्काल हस्तक्षेप करने का आग्रह किया है। उन्होंने मांग की है कि 12 अप्रैल 2018 को हुई समिति की बैठक के निर्णय को आधार मानते हुए 7 जून 2018 के आदेश में आवश्यक संशोधन किया जाए।

कर्मचारियों को न्याय दिलाने की मांग

संगठन का तर्क है कि जब सक्षम समिति ने उच्च ग्रेड-पे निर्धारित करने का निर्णय लिया था, तो उसी के अनुरूप शासनादेश जारी होना चाहिए था। वित्त विभाग के परिपत्र में अलग प्रावधान किए जाने से कर्मचारियों को लंबे समय से आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है। पेंशनर्स वेलफेयर एसोसिएशन ने उम्मीद जताई है कि वित्त विभाग मामले की गंभीरता को समझेगा और पूर्व में लिए गए निर्णय तथा वर्तमान प्रावधानों के बीच के अंतर को दूर करते हुए कर्मचारियों के हित में शीघ्र ही संशोधित आदेश जारी करेगा। इससे संबंधित कर्मचारियों को समिति के निर्णय के अनुरूप न्याय मिल सकेगा और लंबे समय से चली आ रही वेतन विसंगति दूर होगी।