NIVH में अनिश्चितकालीन आंदोलन: छात्रवृत्ति, स्थायी निदेशक और सुविधाओं पर घिरी संस्थान व्यवस्था
देहरादून के NIVH में दृष्टिबाधित छात्र छात्रवृत्ति, स्थायी निदेशक की अनुपस्थिति और सुविधाओं में कमी के विरोध में अनिश्चितकालीन आंदोलन कर रहे हैं।

द क्लिफ न्यूज़ | देहरादून | 11 अगस्त 2026
राष्ट्रीय दृष्टि दिव्यांगजन सशक्तिकरण संस्थान (NIVH), देहरादून में सैकड़ों दृष्टिबाधित छात्रों का अनिश्चितकालीन आंदोलन जारी है। पिछले कई दिनों से संस्थान में व्याप्त अव्यवस्थाओं और सुविधाओं की अनदेखी के विरोध में छात्र प्रदर्शन कर रहे हैं। उनकी मुख्य मांगों में तीन वर्षों से बंद छात्रवृत्ति की तत्काल बहाली, चार वर्षों से रिक्त स्थायी निदेशक के पद पर नियुक्ति, तथा शैक्षणिक और छात्रावास व्यवस्थाओं में व्यापक सुधार शामिल हैं। छात्रों का आरोप है कि संस्थान प्रबंधन और संबंधित अधिकारियों द्वारा उनकी समस्याओं को लगातार नजरअंदाज किया जा रहा है, जिसके कारण उन्हें आंदोलन का सहारा लेना पड़ा है।
छात्रों का कहना है कि छात्रवृत्ति उनके लिए शिक्षा जारी रखने हेतु आर्थिक संबल का एक महत्वपूर्ण स्रोत है। इस महत्वपूर्ण सहायता के पिछले तीन वर्षों से बंद होने के कारण कई विद्यार्थियों को अपनी पढ़ाई और दैनिक जीवन की आवश्यकताओं को पूरा करने में गंभीर कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। प्रदर्शनकारी छात्रों ने लंबित छात्रवृत्तियों के अविलंब भुगतान की मांग की है, साथ ही भविष्य में इस प्रक्रिया को नियमित और सुचारू बनाए रखने के लिए ठोस व्यवस्था सुनिश्चित करने पर जोर दिया है। यह केवल वित्तीय सहायता का मामला नहीं है, बल्कि यह उन दृष्टिबाधित छात्रों के लिए एक बुनियादी अधिकार है जो सामाजिक और आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों से आते हैं और जिन्हें उच्च शिक्षा प्राप्त करने के लिए इस समर्थन की नितांत आवश्यकता है।
स्थायी नेतृत्व की अनुपस्थिति से व्यवस्था पर असर
छात्रों ने संस्थान में स्थायी निदेशक की नियुक्ति को लेकर भी चिंता जताई है। उनका दावा है कि पिछले लगभग चार वर्षों से NIVH में एक भी स्थायी निदेशक कार्यभार ग्रहण नहीं कर पाया है। लंबे समय तक स्थायी प्रशासनिक नेतृत्व के अभाव ने संस्थान की समग्र व्यवस्था, निर्णय लेने की प्रक्रिया और भविष्य की योजनाओं के क्रियान्वयन को सीधे तौर पर प्रभावित किया है। एक तदर्थ या कार्यवाहक व्यवस्था में अक्सर निर्णय लेने में देरी होती है और दीर्घकालिक योजनाओं पर ध्यान केंद्रित करना मुश्किल हो जाता है। छात्रों का मानना है कि एक सक्षम और समर्पित स्थायी निदेशक की त्वरित नियुक्ति संस्थान के सुचारू और प्रभावी संचालन के लिए अत्यंत आवश्यक है, ताकि संस्थान अपनी पूरी क्षमता से काम कर सके और दृष्टिबाधित छात्रों की आवश्यकताओं को प्रभावी ढंग से पूरा कर सके।
इसके अतिरिक्त, आंदोलनरत छात्रों ने छात्रावास में परोसे जाने वाले भोजन की गुणवत्ता पर भी गंभीर आपत्तियां जताई हैं। उनके अनुसार, छात्रावास में उपलब्ध भोजन निर्धारित गुणवत्ता मानकों को पूरा नहीं करता है, जिससे उनके स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है। एक ऐसे संस्थान में जहाँ छात्र अपनी पढ़ाई के लिए रहते हैं, गुणवत्तापूर्ण और पौष्टिक भोजन उनकी शारीरिक और मानसिक सेहत के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। इसी क्रम में, संस्थान की डिस्पेंसरी में स्वास्थ्य सेवाओं और कर्मचारियों के व्यवहार को लेकर भी छात्रों ने असंतोष व्यक्त किया है। दृष्टिबाधित विद्यार्थियों के लिए सुलभ और संवेदनशील स्वास्थ्य एवं आवास सुविधाओं का महत्व बताते हुए, छात्रों ने इन व्यवस्थाओं की निरंतर निगरानी और उसमें तत्काल सुधार की मांग की है। इन मूलभूत सुविधाओं की कमी छात्रों की दैनिक दिनचर्या और उनके अध्ययन पर नकारात्मक प्रभाव डालती है।
शैक्षणिक संसाधन और शिक्षकों की कमी एक प्रमुख चिंता
आंदोलन में शैक्षणिक संसाधनों की कमी और उनकी ऊंची कीमतों का मुद्दा भी प्रमुखता से उभरा है। दृष्टिबाधित छात्रों के लिए ब्रेल लिपि में उपलब्ध किताबों और अन्य आवश्यक अध्ययन सामग्रियों की कमी तथा उनकी महंगी कीमतों को लेकर छात्रों ने चिंता व्यक्त की है। उनका तर्क है कि दृष्टिबाधित विद्यार्थियों के लिए उच्च गुणवत्ता वाली पाठ्य सामग्री सरल और सुलभ मूल्य पर उपलब्ध होनी चाहिए, ताकि वे बिना किसी बाधा के अपनी शिक्षा जारी रख सकें। ब्रेल पुस्तकों की सीमित उपलब्धता और अधिक मूल्य कई छात्रों के लिए एक बड़ी आर्थिक चुनौती पेश करती है।
छात्रों की मांगों में ब्रेल इंस्ट्रक्टर और प्रमुख शैक्षणिक विषयों के लिए पर्याप्त संख्या में योग्य शिक्षकों की नियुक्ति भी शामिल है। शिक्षकों की वर्तमान कमी का सीधा असर शिक्षण की गुणवत्ता और विद्यार्थियों के समग्र शैक्षणिक प्रदर्शन पर पड़ रहा है। ऐसे में, नए और उन्नत शिक्षण विधियों को अपनाना मुश्किल हो जाता है, जो दृष्टिबाधित छात्रों की विशिष्ट सीखने की शैलियों के लिए अनुकूल हों। संस्थान में ऐसे समर्पित शिक्षकों की आवश्यकता है जो दृष्टिबाधित छात्रों की विशेष शैक्षिक आवश्यकताओं को समझ सकें और उन्हें प्रभावी ढंग से पढ़ा सकें, साथ ही उन्हें मुख्यधारा की शिक्षा में समान अवसर प्रदान करने में मदद कर सकें। पर्याप्त शिक्षक और सहायक स्टाफ यह सुनिश्चित करने के लिए महत्वपूर्ण हैं कि प्रत्येक छात्र को व्यक्तिगत ध्यान और सहायता मिले।
मांगें पूरी होने तक जारी रहेगा आंदोलन
छात्रों ने स्पष्ट कर दिया है कि जब तक उनकी प्रमुख मांगों पर प्रशासन द्वारा ठोस और सकारात्मक कार्रवाई नहीं की जाती, तब तक यह अनिश्चितकालीन आंदोलन किसी भी कीमत पर स्थगित नहीं किया जाएगा। प्रदर्शनकारियों ने किसी भी प्रकार के टकराव से बचने की अपनी मंशा दोहराई है, परंतु यह भी कहा है कि वर्षों से चली आ रही उपेक्षित समस्याओं का समाधान अब समय की मांग है। उनकी आवाज को अनसुना नहीं किया जा सकता और उनकी मांगों को केवल आश्वासन तक सीमित नहीं रखा जा सकता।
राष्ट्रीय दृष्टि दिव्यांगजन सशक्तिकरण संस्थान में दृष्टिबाधित छात्रों का यह आंदोलन केवल संस्थानिक अव्यवस्थाओं को उजागर नहीं करता, बल्कि यह पूरे देश में दिव्यांगजनों के लिए शिक्षा, छात्रवृत्ति, आवास, स्वास्थ्य सुविधाएं और रोजगारोन्मुख प्रशिक्षण जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों में मौजूद गंभीर चुनौतियों की ओर भी ध्यान आकर्षित करता है। यह आंदोलन एक व्यापक संदेश देता है कि दिव्यांग छात्रों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और आवश्यक सुविधाओं तक समान पहुँच सुनिश्चित करने के लिए ठोस और प्रभावी नीतियों की आवश्यकता है। छात्रों की निगाहें अब प्रशासन की ओर से उनकी मांगों पर की जाने वाली आधिकारिक प्रतिक्रिया और ठोस कार्रवाई पर टिकी हैं, और वे उम्मीद करते हैं कि उनकी आवाज सुनी जाएगी और उनकी समस्याओं का स्थायी समाधान निकाला जाएगा।
