नीट विवाद: CJP और सरकार की बैठक बेनतीजा, शिक्षा मंत्री के इस्तीफे पर अड़ा गतिरोध
नीट परीक्षा में अनियमितताओं को लेकर CJP और केंद्र सरकार के बीच 45 मिनट की वार्ता हुई, जिसमें शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग पर सहमति नहीं बन सकी।

द क्लिफ न्यूज़ | नई दिल्ली | 24 जुलाई 2026
राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा (नीट) 2026 में कथित अनियमितताओं और पेपर लीक के विवादों के बीच, कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) और केंद्र सरकार के प्रतिनिधियों के बीच शुक्रवार को नई दिल्ली स्थित कॉन्स्टिट्यूशन क्लब में एक महत्वपूर्ण बैठक संपन्न हुई। लगभग 45 मिनट तक चली इस उच्चस्तरीय वार्ता का मुख्य उद्देश्य नीट परीक्षा से जुड़े विवादों, छात्रों की व्यापक मांगों और चल रहे आंदोलन के समाधान हेतु एक आम सहमति बनाना था। इस बैठक में केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री जेपी नड्डा, केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह, CJP के प्रमुख नेता आशुतोष राका और सौरव दास सहित दोनों पक्षों के वरिष्ठ अधिकारी शामिल हुए।
इस वार्ता की एक विशेष बात यह रही कि सरकार ने CJP की उस मांग को स्वीकार किया जिसके तहत यह बातचीत किसी मंत्री के सरकारी आवास या कार्यालय के बजाय एक तटस्थ स्थान पर आयोजित की जाए। कॉन्स्टिट्यूशन क्लब का चयन इस उद्देश्य को पूरा करता है, जिससे वार्ता का माहौल अधिक निष्पक्ष और सकारात्मक बना रहा।
शिक्षा मंत्री के इस्तीफे पर CJP का अड़ियल रवैया
बैठक के दौरान CJP नेताओं द्वारा उठाई गई प्रमुख मांगों में से एक केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का तत्काल इस्तीफा रही। CJP का तर्क था कि नीट परीक्षा में हुई कथित अनियमितताओं और पेपर लीक जैसी गंभीर घटनाओं की नैतिक जिम्मेदारी स्वीकार करते हुए शिक्षा मंत्री को अपने पद से त्यागपत्र देना चाहिए। हालांकि, सरकार की ओर से इस मांग पर कोई भी सहमति नहीं बन सकी, जिसके चलते यह मुद्दा वार्ता में सबसे बड़ा गतिरोध साबित हुआ। CJP नेताओं ने स्पष्ट किया कि जब तक शिक्षा मंत्री इस्तीफा नहीं देते, तब तक वे अपनी मांग पर कायम रहेंगे।
मुआवजे और FIR वापसी की मांग
बातचीत के दौरान CJP ने नीट परीक्षा विवाद और उसके परिणामस्वरूप हुए आंदोलनों के दौरान प्रभावित हुए छात्रों और उनके परिवारों को एक-एक करोड़ रुपये के मुआवजे की भी मांग रखी। इसके अतिरिक्त, प्रदर्शनों में भाग लेने वाले छात्रों और कार्यकर्ताओं के विरुद्ध दर्ज की गई सभी प्रथम सूचना रिपोर्ट (FIR) को तत्काल वापस लेने की मांग को भी दोहराया गया। सूत्रों के अनुसार, सरकार ने इन दोनों मांगों पर सकारात्मक प्रतिक्रिया दी और कहा कि इन पर गंभीरता से विचार किया जाएगा।
परीक्षा प्रणाली में सुधार पर चर्चा
बैठक में परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता को बढ़ाने और भविष्य में ऐसी किसी भी घटना की पुनरावृत्ति को रोकने के लिए आवश्यक सुधारात्मक उपायों पर भी विस्तृत चर्चा हुई। सरकार के प्रतिनिधियों ने आश्वस्त किया कि वे परीक्षा प्रणाली को और अधिक मजबूत तथा विश्वसनीय बनाने के लिए प्रतिबद्ध हैं। इस संबंध में विभिन्न सुझावों पर विचार-विमर्श किया गया, जिनका उद्देश्य राष्ट्रीय स्तर की परीक्षाओं की गरिमा और विश्वसनीयता को बनाए रखना है।
सरकार ने मांगा अंतिम निर्णय के लिए समय
बैठक के समापन पर, सरकारी प्रतिनिधियों ने CJP द्वारा उठाई गई सभी मांगों पर विचार-विमर्श करने और संबंधित मंत्रालयों व उच्चाधिकारियों के साथ चर्चा के बाद अंतिम निर्णय लेने के लिए शनिवार दोपहर तक का समय मांगा। उन्होंने CJP को आश्वस्त किया कि इस चर्चा के निष्कर्ष से पार्टी को समय पर अवगत करा दिया जाएगा।
CJP की आंदोलन तेज करने की चेतावनी
बैठक के उपरांत CJP नेताओं ने यह स्पष्ट कर दिया कि यदि शनिवार तक उनकी प्रमुख मांगों, विशेषकर शिक्षा मंत्री के इस्तीफे पर संतोषजनक कार्रवाई नहीं की गई, तो देशभर में चल रहे आंदोलन को और अधिक व्यापक और तीव्र बनाया जाएगा। उन्होंने कहा कि छात्र हितों से कोई समझौता स्वीकार्य नहीं होगा और आवश्यकता पड़ने पर राष्ट्रव्यापी विरोध प्रदर्शनों का एक नया चरण शुरू किया जा सकता है। CJP ने छात्रों और अभिभावकों को संगठित रहने और अपनी मांगों के प्रति दृढ़ रहने का आह्वान किया।
छात्रों और अभिभावकों की निगाहें सरकार के अगले कदम पर
नीट परीक्षा विवाद को लेकर देश भर के छात्र, अभिभावक और शिक्षण संस्थान समुदाय की निगाहें अब सरकार द्वारा शनिवार को लिए जाने वाले निर्णय पर टिकी हैं। इस निर्णय को न केवल मौजूदा आंदोलन की दिशा तय करने वाला माना जा रहा है, बल्कि यह परीक्षा प्रणाली में अपेक्षित सुधारों को लागू करने और छात्रों के विश्वास को बहाल करने की दिशा में भी एक महत्वपूर्ण कदम साबित हो सकता है। सरकार और CJP के बीच हुई यह पहली औपचारिक वार्ता जहाँ समाधान की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल मानी जा रही है, वहीं शिक्षा मंत्री के इस्तीफे जैसे संवेदनशील मुद्दे पर अभी भी दोनों पक्षों के बीच आम सहमति का अभाव है, जो भविष्य की रणनीतियों को प्रभावित कर सकता है।
