नीट पेपर लीक: पटना में उग्र प्रदर्शन, पुलिस-छात्र भिड़े; इस्तीफे की मांग
पटना में नीट परीक्षा में कथित पेपर लीक और अनियमितताओं के विरोध में छात्र संगठनों का प्रदर्शन उग्र हो गया। पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच झड़प हुई, जिसमें आंसू गैस और लाठीचार्ज का प्रयोग किया गया।

द क्लिफ न्यूज़ | पटना | 25 जुलाई 2026
बिहार की राजधानी पटना में राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा (NEET) में कथित पेपर लीक और परीक्षा प्रक्रिया में अनियमितताओं को लेकर छात्र संगठनों का आंदोलन हिंसक रूप ले चुका है। केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर अखिल भारतीय छात्र संगठन (AISA) सहित कई छात्र संगठनों के सदस्यों ने सड़कों पर उतरकर जमकर विरोध प्रदर्शन किया। प्रदर्शन के दौरान डाकबंगला चौराहा और मुख्यमंत्री आवास के आसपास प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच तीखी झड़प हुई। स्थिति को नियंत्रित करने के लिए पुलिस को वाटर कैनन, आंसू गैस के गोले छोड़ने और लाठीचार्ज का सहारा लेना पड़ा।
प्रदर्शनकारी छात्रों का मुख्य आरोप है कि नीट परीक्षा में कथित पेपर लीक और हुई गड़बड़ियों ने लाखों युवा उम्मीदवारों के भविष्य पर गंभीर प्रश्नचिन्ह लगा दिया है। छात्र परीक्षा की निष्पक्ष जांच, दोषियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई और केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के तत्काल इस्तीफे की मांग कर रहे हैं। उनका कहना है कि सरकार छात्रों की आवाज को अनसुना कर रही है, जबकि यह मुद्दा उनके भविष्य से जुड़ा है।
दिल्ली की कार्रवाई के विरोध में पटना में मार्च
छात्र संगठनों ने बताया कि पटना में यह विरोध प्रदर्शन दिल्ली के जंतर-मंतर पर नीट मुद्दे को लेकर प्रदर्शन कर रहे छात्रों पर हुई पुलिस कार्रवाई के विरोध में भी निकाला गया था। प्रदर्शनकारियों ने बल प्रयोग की निंदा करते हुए कहा कि सरकार को छात्रों की समस्याओं को गंभीरता से सुनना चाहिए, न कि उनकी आवाज को दबाने के लिए बल का प्रयोग करना चाहिए। पटना में निकले मार्च के दौरान भारी संख्या में छात्र सड़कों पर एकत्र हुए। जैसे-जैसे प्रदर्शन आगे बढ़ा, भीड़ और पुलिस के बीच तनाव बढ़ता गया। पुलिस द्वारा प्रदर्शनकारियों को आगे बढ़ने से रोकने के प्रयासों के बाद स्थिति बिगड़ गई और दोनों पक्षों के बीच टकराव शुरू हो गया।
पथराव और तोड़फोड़ के आरोप, सुरक्षा कड़ी
इस विरोध प्रदर्शन के दौरान कुछ स्थानों पर हिंसात्मक घटनाएं भी सामने आईं। पुलिस सूत्रों के अनुसार, कुछ अज्ञात उपद्रवियों ने कथित तौर पर पथराव किया और कुछ वाहनों में तोड़फोड़ की। यह भी शिकायतें सामने आई हैं कि प्रदर्शन के दौरान कुछ राजनीतिक कार्यकर्ताओं और पत्रकारों को भी निशाना बनाया गया। प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि शांतिपूर्ण ढंग से विरोध करना एक लोकतांत्रिक अधिकार है, लेकिन कानून व्यवस्था को बाधित करने वाली किसी भी हिंसक गतिविधि को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। पुलिस ने हिंसा में शामिल व्यक्तियों की पहचान के लिए सीसीटीवी फुटेज और अन्य उपलब्ध माध्यमों से जांच शुरू कर दी है। पटना में बढ़ते तनाव को देखते हुए प्रशासन ने सुरक्षा व्यवस्था को और कड़ा कर दिया है। कानून और व्यवस्था बनाए रखने के लिए सशस्त्र सीमा बल (SSB), केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (CRPF) और सीमा सुरक्षा बल (BSF) के अतिरिक्त जवानों को तैनात किया गया है। संवेदनशील इलाकों में पुलिस बल की मौजूदगी बढ़ाई गई है और संबंधित अधिकारियों को स्थिति पर लगातार नजर रखने के निर्देश दिए गए हैं। प्रशासन ने जोर देकर कहा है कि किसी भी व्यक्ति को कानून को अपने हाथ में लेने की अनुमति नहीं दी जाएगी और सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाने वालों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
विधानसभा में भी गूंजा नीट विवाद
नीट विवाद और छात्र आंदोलन का असर बिहार विधानसभा और विधान परिषद की कार्यवाही पर भी दिखाई दिया। विपक्षी दलों ने सदन में इस मुद्दे को उठाकर सरकार को घेरने का प्रयास किया और छात्रों के हितों की रक्षा तथा परीक्षा में पूर्ण पारदर्शिता सुनिश्चित करने की मांग उठाई। सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच इस संवेदनशील मुद्दे को लेकर तीखी बहस हुई, जिसके कारण सदन की कार्यवाही प्रभावित हुई और कई बार सदन का माहौल तनावपूर्ण बना रहा। विपक्ष ने आरोप लगाया कि सरकार छात्रों की चिंताओं को नजरअंदाज कर रही है, जबकि सत्ता पक्ष ने आश्वासन दिया कि मामले की गहन जांच की जा रही है और दोषियों को बख्शा नहीं जाएगा।
दोषियों पर कार्रवाई और भविष्य की दिशा
पुलिस प्रशासन ने एक बार फिर स्पष्ट किया है कि हिंसा और उपद्रव में शामिल व्यक्तियों के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाएगी। अधिकारियों ने बताया कि सीसीटीवी फुटेज और अन्य सबूतों के आधार पर आरोपियों की पहचान की जा रही है और दोषियों के खिलाफ स्पीडी ट्रायल (त्वरित मुकदमा) चलाने की प्रक्रिया भी अपनाई जाएगी। नीट विवाद अब केवल एक परीक्षा से संबंधित मुद्दा नहीं रह गया है, बल्कि यह छात्रों के विश्वास, परीक्षा प्रणाली की पारदर्शिता और प्रशासनिक जवाबदेही का एक बड़ा सवाल बन चुका है। छात्र संगठन लगातार यह मांग कर रहे हैं कि परीक्षा प्रक्रिया में व्यापक सुधार किए जाएं और भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति को रोकने के लिए एक मजबूत और प्रभावी व्यवस्था बनाई जाए। पटना में हुआ यह प्रदर्शन देशभर में चल रहे छात्र आंदोलनों की एक महत्वपूर्ण कड़ी माना जा रहा है। इस विवाद के समाधान की दिशा आने वाले दिनों में सरकार, जांच एजेंसियों और छात्र संगठनों के बीच होने वाली बातचीत और उनके द्वारा उठाए जाने वाले कदमों से ही तय होगी।
